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Jhajjar-Bahadurgarh News: नूनीशेखपुरा में बासोड़ा पर्व पर लगा भव्य मेला, सुबह से उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
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फोटो नंबर-12शीतला माता के दर्शनों के लिए लगी श्रद्धालुओं की लंबी कतार। संवाद
नारनौल। बासोड़ा पर शहर के समीपवर्ती गांव नूनीशेखपुरा में सोमवार को शीतला माता के मंदिर परिसर में भव्य मेले का आयोजन किया गया। मेले में सुबह करीब चार बजे से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़नी शुरू हो गई।
विशेष रूप से छोटे बच्चों को शीतला माता की धोक लगवाने के लिए महिलाओं और परिजनों की लंबी कतारें देखने को मिलीं। मेले में उमड़ी भीड़ को देखते हुए मेला कमेटी और पुलिस प्रशासन की ओर से सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध किए गए थे।
बासोड़ा पर्व को लेकर महिलाओं ने एक दिन पहले ही अपने घरों में भोजन तैयार किया। परंपरा के अनुसार शाम के समय घरों में राबड़ी, गुलगुले और अन्य व्यंजन बनाए जाते हैं। अगले दिन सुबह शीतला माता को भोग लगाने के बाद परिवार के सभी सदस्य उसी बासी भोजन को प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं।
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मेला कमेटी के सदस्यों ने बताया कि शीतला माता की छोटे बच्चों को धोक लगवाने की प्राचीन परंपरा है। मान्यता है कि माता के आशीर्वाद से बच्चों को कई प्रकार की बीमारियों से राहत मिलती है। इसी आस्था के चलते आसपास ही नहीं बल्कि दूर-दराज के गांवों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।
मेले में लगी दुकानों पर बच्चों और महिलाओं ने जमकर खरीदारी की और झूलों का आनंद लिया। पूरे क्षेत्र में मेले को लेकर धार्मिक उत्साह और श्रद्धा का माहौल देखने को मिला।
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विशेष रूप से छोटे बच्चों को शीतला माता की धोक लगवाने के लिए महिलाओं और परिजनों की लंबी कतारें देखने को मिलीं। मेले में उमड़ी भीड़ को देखते हुए मेला कमेटी और पुलिस प्रशासन की ओर से सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध किए गए थे।
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बासोड़ा पर्व को लेकर महिलाओं ने एक दिन पहले ही अपने घरों में भोजन तैयार किया। परंपरा के अनुसार शाम के समय घरों में राबड़ी, गुलगुले और अन्य व्यंजन बनाए जाते हैं। अगले दिन सुबह शीतला माता को भोग लगाने के बाद परिवार के सभी सदस्य उसी बासी भोजन को प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं।
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मेला कमेटी के सदस्यों ने बताया कि शीतला माता की छोटे बच्चों को धोक लगवाने की प्राचीन परंपरा है। मान्यता है कि माता के आशीर्वाद से बच्चों को कई प्रकार की बीमारियों से राहत मिलती है। इसी आस्था के चलते आसपास ही नहीं बल्कि दूर-दराज के गांवों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।
मेले में लगी दुकानों पर बच्चों और महिलाओं ने जमकर खरीदारी की और झूलों का आनंद लिया। पूरे क्षेत्र में मेले को लेकर धार्मिक उत्साह और श्रद्धा का माहौल देखने को मिला।