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Jhajjar-Bahadurgarh News: भिंडावास में उतरा परिंदों का मेला, यूरोप से रूस तक की प्रजातियां

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 05 Jan 2026 02:25 AM IST
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A gathering of birds has descended upon Bhindawas, with species from Europe to Russia.
झज्जर। भिंडावास पर्यटन के लिहाज से आकर्षण का केंद्र है। यहां काफी संख्या में प्रवासी पक्षी आ चुके हैं और अठखेलियां करके आकर्षण का केंद्र बन रहे हैं। यहां दुनिया भर से अक्तूबर से फरवरी माह तक बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षी आते हैं।
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भिंडावास वन्यजीव अभयारण्य की वेटलैंड को अंतरराष्ट्रीय महत्व की रामसर कन्वेंशन सूची में शामिल किया गया है। यह मानव निर्मित वेटलैंड है। यहां पक्षियों की करीब 266 से अधिक प्रजातियां हैं। भिंडावास अभयारण्य राज्य में मीठे पानी की आर्द्रभूमि का सबसे बड़ा स्थल है।
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यहां सर्दियों के दौरान 80 प्रजातियों के 40 हजार से अधिक प्रवासी पक्षी आते हैं। भिंडावास पक्षी अभ्यारण को सरकार ने 3 जून 2009 को एक पक्षी अभयारण्य के रूप में स्थापित किया था। यह करीब 1074 एकड़ में फैला हुआ है।
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यहां ओरिएंटल हनी-बजर्ड़, पाइड किंगफिशर, सारस क्रेन आदि पक्षियों को देखा जा सकता है। यहां एक झील का निर्माण किया गया है जहां सैर का आनंद ले सकते हैं। मौसम बदलने के साथ ही क्षेत्र में विदेशी परिंदों की आहट का असर साफ देखने को मिलता है। सदियों से बना यह रिश्ता आज भी बदस्तूर जारी है।
विदेशी परिंदों की कई प्रजातियां बर्ड वाचर द्वारा क्षेत्र में देखी गई हैं। ऐसे में स्थानीय परिंदों का कलरव भी बर्ड वाचर को आकर्षित कर रहा हैं। फिलहाल यूरोप, रूस देशों के पक्षी डीघल, गोच्छी, बालंद, झाड़ली, दुजाना मांडौठी व आसपास के क्षेत्रों में पहुंच चुके हैं।
भिंडावास के अलावा ग्रामीण आंचल के खेतों में भी पक्षियों की देखी गई विभिन्न प्रजातियां बर्ड वाचर को आमंत्रित कर रही हैं। यहां फरवरी के अंत व मार्च की शुरुआत तक प्रवासी पक्षी देखे जा सकेंगे।

एनटीपीसी के तालाब में भी आए विदेशी मेहमान
इस साल कम पानी वाले और भोजन युक्त क्षेत्र झाड़ली स्थित एनटीपीसी के तालाब में भी यह विदेशी मेहमान पहुंचे हैं। हजारों की संख्या में रूस से आए ब्लैक विंगड स्टील, मंगोलिया, चीन और कजाकिस्तान से आई बार हेडेड गूंज और फिनलैंड से उड़कर झज्जर आए कामन टीम सहित अन्य देशों की कई प्रजातियाें के पक्षी एनटीपीसी के तालाब के आसपास अपना घर बनाए हुए हैं। यहां पर भी हर साल सैकड़ों की संख्या में पक्षी आते हैं।
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