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Jhajjar-Bahadurgarh News: डीसी से मिला झज्जर के 22 गांवों का प्रतिनिधिमंडल, नहीं बन पाई सहमति

Fri, 05 Jul 2024 06:31 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़ Updated Fri, 05 Jul 2024 06:31 AM IST
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A delegation of 22 villages of Jhajjar met the DC, but no consensus could be reached
झज्जर में ​स्थित लघु ​सचिवालय मे अपनी मागों को लेकर नारेबाजी करते हुए किसान।
झज्जर। राजस्थान से वाया हरियाणा होकर खेतों के रास्ते से दिल्ली जाने वाली 765 केवी की हाईटेंशन तारों के मुआवजे को लेकर वीरवार को जिले के करीब 22 गांवों के किसान लघु सचिवालय डीसी से मिलने पहुंचे। इस मामले में डीसी के साथ उन्होंने चौथी वार्ता की। इसमें में भी किसानों की समस्या का कोई समाधान नहीं मिला। लघु सचिवालय परिसर में किसानों ने अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी की और सीएम नायब सैनी व एसीएस से मुलाकात करने की बात कही। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि विधानसभा चुनाव से पहले उनकी समस्या का हल नहीं हुआ तो चुनाव में इसे मुद्दा बनाया जाएगा।
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बैठक में उपायुक्त ने जहां किसानों को हरियाणा सरकार द्वारा गुजरात और महाराष्ट्र की तर्ज पर मुआवजा देने की बात कही तो वहीं किसानों ने उपायुक्त के तर्क पर असहमति जताई और मुआवजा कर्नाटक सरकार की तर्ज पर दिए जाने की बात कही। किसान-कामगार अधिकार मोर्चे के सदस्य सत्येन्द्र लोहचब ने कहा कि उपायुक्त के साथ यह उनकी चौथी वार्ता थी, लेकिन इस वार्ता में भी किसानों की समस्या का कोई समाधान नहीं निकला। किसान सर्कल रेट से नहीं बल्कि मार्किट रेट से अपनी जमीन का मुआवजा चाहते हैं जोकि शासन और प्रशासन को मंजूर नहीं है। उन्होंने कहा कि इस मामले में उनका आंदोलन उग्र रूप लेता जा रहा है। इस अवसर पर रोहताश दलाल, कर्मवीर, रत्न, वेदप्रकाश, राकेश, विनोद, रणबीर, सतबीर, देवेंद्र, मांगेराम, संदीप, कमल, मोहित, राजेश, दिल्लू मौजूद रहे।
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डीसी बोले, पोल पर तार खींचने दें तो किसानों ने किया मना
बातचीत के दौरान डीसी शक्ति सिंह ने किसानों से कहा कि 14 जून को केंद्र सरकार ने बिजली मंत्रालय को गाइड लाइन दी है, उसके हिसाब से किसानों को मुआवजा देने की बात कही। डीसी ने किसानों से अपील की है कि जब तक आपकी मुख्यमंत्री और एसीएस एनर्जी से अगली बैठक हो, तब तक खड़े पोल पर तार खींचने दी जाए, लेकिन किसानों ने साफ इंकार कर दिया। किसानों का कहना था कि जब तक हमारा मुआवजे बैंक खाते में नहीं आ जाएगा, तब तक किसान अपने खेतों में नहीं घुसने देंगे। आगामी चुनाव में आचार संहिता लगने से पूर्व अगर हमारी मांगे नहीं मानी तो हम प्रदेश में अनेकों पंचायतों के माध्यम से मौजूदा सरकार के खिलाफ अपनी आवाज उठाएंगे।

झज्जर में स्थित लघु सचिवालय मे अपनी मागों को लेकर नारेबाजी करते हुए किसान।

झज्जर में स्थित लघु सचिवालय मे अपनी मागों को लेकर नारेबाजी करते हुए किसान।

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