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अमित शाह की जींद रैली को जाटों के व्यवधान से बचाने के लिए सरकार ने तेज किए प्रयास
Updated Mon, 12 Feb 2018 01:33 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
बहादुरगढ़।
पुलिस ने फरवरी 2016 में जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हिंसा फैलाने के आरोप में आंदोलनकारियों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने की कवायद शुरू कर दी है। रोहतक पुलिस ने शनिवार-रविवार की पूरी रात नामजद आंदोलनकारियों के घर जाकर मुलाकात की और जिलाधीश रोहतक के नाम केस वापसी के लिए दरखास्त पर दस्तखत कराए।
फरवरी 2016 में हुए जाट आरक्षण आंदोलन में बहादुरगढ़ के भी अनेक लोगों ने भाग लिया था। इनमें सैकड़ों लोग सांपला धरने में भी शामिल हुए थे। इनमें से कई के खिलाफ सांपला पुलिस ने 15 फरवरी 2016 को विभिन्न आरोपों में केस दर्ज किए थे। कुछ लोगों के खिलाफ केस तो रद्द हो गए थे। लेकिन आठ लोगों के खिलाफ दो मुकदमे रोहतक कोर्ट में चल रहे हैं। इस बीच बीते शनिवार की रात सांपला थाने से एक एएसआई व एक हवलदार ने बहादुरगढ़ इलाके के इन आठों लोगों के घरों में पहुंच केस वापस लेने की दरखास्त पर हस्ताक्षर कराए। यह दरखास्त जिलाधीश रोहतक को देय है। दरखास्त में आवेदकों की ओर से कहा गया है कि उनके खिलाफ दर्ज केस झूठे हैं, इसलिए वापस लेने की कृपा करें। समझा जा रहा है कि मुकदमे वापसी की आनन-फानन में ये प्रक्रिया भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की जींद रैली को निर्विघ्न संपन्न कराने के लिए की जा रही है।
पुलिस इस कार्य में रातभर लगी रही। सबसे पहले पुलिस गांव आसौदा में आंदोलकारी अनिल प्रधान के घर पहुंची। पुलिस ने दरवाजा खटखटाया। लेकिन आंदोलन की दोबारा आहट में अपनी गिरफ्तारी की आशंका से अनिल ने दरवाजा नहीं खोला और बहादुरगढ़ रह रहे अपने साथी आंदोलकारी पप्पू दलाल को फोन किया। पप्पू ने कहा कि अगर पुलिस मेरे घर आएगी तब देखते हैं।
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सुबह 4 बजे पुलिस धर्मपुरा में पप्पू दलाल के घर पहुंची। पप्पू ने बाकी सभी साथियों को बताया और सभी ने पुलिस से सुबह करीब 9 बजे मांडोठी में सामूहिक रूप से बातचीत करने को कहा। मांडोठी में टैणी प्रधान के घर इकट्ठे हुए आठों व्यक्तियों ने करीब 9:30 बजे पुलिस द्वारा प्रस्तुत अलग-अलग दरखास्त पर हस्ताक्षर कर दिए। मुकदमा वापस लेने के लिए दरखास्त पर हस्ताक्षर करने वालों में अनिल प्रधान व पप्पू दलाल के अलावा रमेश दलाल, कैप्टन मान सिंह दलाल, संजय दलाल, बुल्लड़ पहलवान, टैणी प्रधान मांडोठी व अमित उर्फ चिंटू निवासी छारा शामिल हैं। इन सभी के नाम 14 फरवरी 2016 को दर्ज किए गए मुकदमा नंबर 66 व 68 में शामिल हैं। पप्पू दलाल और अनिल प्रधान ने कहा कि मुकदमे की वजह से उन्हें महीने में दो बार रोहतक कोर्ट जाना पड़ता है। पूरा दिन परेशानी होती है। अब मुकदमे वापस हुए तो राहत मिलेगी।
आरक्षण आंदोलन में जाटों पर दर्ज केसों को वापस लेने के लिए रातोंरात पुलिस की कवायद
-उन जाटों के घरों में पुलिस ने रातोंरात दी दस्तक जिन पर दर्ज हैं केस
-जिलाधीश के नाम दरखास्त पर पुलिस ने कराए हस्ताक्षर
-बहादुरगढ़ के आठ लोगों के खिलाफ रोहतक कोर्ट में चल रहे केस
-अमित शाह की जींद रैली को जाटों के व्यवधान से बचाने के लिए सरकार ने तेज किए प्रयास
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बहादुरगढ़।
पुलिस ने फरवरी 2016 में जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हिंसा फैलाने के आरोप में आंदोलनकारियों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने की कवायद शुरू कर दी है। रोहतक पुलिस ने शनिवार-रविवार की पूरी रात नामजद आंदोलनकारियों के घर जाकर मुलाकात की और जिलाधीश रोहतक के नाम केस वापसी के लिए दरखास्त पर दस्तखत कराए।
फरवरी 2016 में हुए जाट आरक्षण आंदोलन में बहादुरगढ़ के भी अनेक लोगों ने भाग लिया था। इनमें सैकड़ों लोग सांपला धरने में भी शामिल हुए थे। इनमें से कई के खिलाफ सांपला पुलिस ने 15 फरवरी 2016 को विभिन्न आरोपों में केस दर्ज किए थे। कुछ लोगों के खिलाफ केस तो रद्द हो गए थे। लेकिन आठ लोगों के खिलाफ दो मुकदमे रोहतक कोर्ट में चल रहे हैं। इस बीच बीते शनिवार की रात सांपला थाने से एक एएसआई व एक हवलदार ने बहादुरगढ़ इलाके के इन आठों लोगों के घरों में पहुंच केस वापस लेने की दरखास्त पर हस्ताक्षर कराए। यह दरखास्त जिलाधीश रोहतक को देय है। दरखास्त में आवेदकों की ओर से कहा गया है कि उनके खिलाफ दर्ज केस झूठे हैं, इसलिए वापस लेने की कृपा करें। समझा जा रहा है कि मुकदमे वापसी की आनन-फानन में ये प्रक्रिया भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की जींद रैली को निर्विघ्न संपन्न कराने के लिए की जा रही है।
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पुलिस इस कार्य में रातभर लगी रही। सबसे पहले पुलिस गांव आसौदा में आंदोलकारी अनिल प्रधान के घर पहुंची। पुलिस ने दरवाजा खटखटाया। लेकिन आंदोलन की दोबारा आहट में अपनी गिरफ्तारी की आशंका से अनिल ने दरवाजा नहीं खोला और बहादुरगढ़ रह रहे अपने साथी आंदोलकारी पप्पू दलाल को फोन किया। पप्पू ने कहा कि अगर पुलिस मेरे घर आएगी तब देखते हैं।
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सुबह 4 बजे पुलिस धर्मपुरा में पप्पू दलाल के घर पहुंची। पप्पू ने बाकी सभी साथियों को बताया और सभी ने पुलिस से सुबह करीब 9 बजे मांडोठी में सामूहिक रूप से बातचीत करने को कहा। मांडोठी में टैणी प्रधान के घर इकट्ठे हुए आठों व्यक्तियों ने करीब 9:30 बजे पुलिस द्वारा प्रस्तुत अलग-अलग दरखास्त पर हस्ताक्षर कर दिए। मुकदमा वापस लेने के लिए दरखास्त पर हस्ताक्षर करने वालों में अनिल प्रधान व पप्पू दलाल के अलावा रमेश दलाल, कैप्टन मान सिंह दलाल, संजय दलाल, बुल्लड़ पहलवान, टैणी प्रधान मांडोठी व अमित उर्फ चिंटू निवासी छारा शामिल हैं। इन सभी के नाम 14 फरवरी 2016 को दर्ज किए गए मुकदमा नंबर 66 व 68 में शामिल हैं। पप्पू दलाल और अनिल प्रधान ने कहा कि मुकदमे की वजह से उन्हें महीने में दो बार रोहतक कोर्ट जाना पड़ता है। पूरा दिन परेशानी होती है। अब मुकदमे वापस हुए तो राहत मिलेगी।
आरक्षण आंदोलन में जाटों पर दर्ज केसों को वापस लेने के लिए रातोंरात पुलिस की कवायद
-उन जाटों के घरों में पुलिस ने रातोंरात दी दस्तक जिन पर दर्ज हैं केस
-जिलाधीश के नाम दरखास्त पर पुलिस ने कराए हस्ताक्षर
-बहादुरगढ़ के आठ लोगों के खिलाफ रोहतक कोर्ट में चल रहे केस
-अमित शाह की जींद रैली को जाटों के व्यवधान से बचाने के लिए सरकार ने तेज किए प्रयास