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टीवी स्क्रीन पर बेटे को गिरता देखकर तीन घंटे तक नहीं बांटी मिठाई
Updated Sat, 25 Aug 2018 01:52 AM IST
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टीवी स्क्रीन पर बेटे को गिरता देखकर तीन घंटे तक नहीं बांटी मिठाई
झज्जर। बीमार होने के बावजूद नाव का चप्पू थाम कर कुलाना गांव के दुष्यंत चौहान ने साबित कर दिया कि फौजियों मेें देशभक्ति का जुनून किस कदर है। कांस्य पदक जीतने के बाद जब वह मेडल पहनने के लिए स्टेज की ओर बढ़ रहा था तो वह वहीं पर गिर गया। टीवी स्क्रीन पर आंखें गड़ाए बैठे गांव कुलाना के लोग अचानक हुए इस घटनाक्रम से परेशान हो गए। दुष्यंत की मां आशा तुरंत परिवार के साथ बाबा सैय्यद की मजार पर दिया जलाने पहुंच गईं। तीन घंटे तक जब बेटे से बात नहीं हो पाई तो परिजनों को चिंता सताने लगी। दुष्यंत की मां ने कोच को फोन लगाया, फिर बात नहीं हुई तो कोच की पत्नी को संदेश दिया। कोच की पत्नी ने संदेश किसी तरह कोच तक पहुंचाया तो तीन घंटे बाद दुष्यंत के कोच ने उसकी वीडियो कॉलिंग कर घर पर बात करवाई। जिसके बाद ही उनके परिवार व गांव के लोगों ने मिठाई बांटी।
अस्पताल में तीन घंटे तक रहा
रेस खत्म होने के बाद जब दुष्यंत नाव से उतरा तो वह गिर गया। जिस पर वहां मौजूद भारतीय दल के लोगों ने उसे वहां के अस्पताल में भर्ती करवाया। चिकित्सकों ने उच्च रक्तचाप की दिक्कत बताई। करीब तीन घंटे तक चिकित्सकों की देखरेख में चले इलाज के बाद उसे वहां से छुट्टी दे दी गई।
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झज्जर। बीमार होने के बावजूद नाव का चप्पू थाम कर कुलाना गांव के दुष्यंत चौहान ने साबित कर दिया कि फौजियों मेें देशभक्ति का जुनून किस कदर है। कांस्य पदक जीतने के बाद जब वह मेडल पहनने के लिए स्टेज की ओर बढ़ रहा था तो वह वहीं पर गिर गया। टीवी स्क्रीन पर आंखें गड़ाए बैठे गांव कुलाना के लोग अचानक हुए इस घटनाक्रम से परेशान हो गए। दुष्यंत की मां आशा तुरंत परिवार के साथ बाबा सैय्यद की मजार पर दिया जलाने पहुंच गईं। तीन घंटे तक जब बेटे से बात नहीं हो पाई तो परिजनों को चिंता सताने लगी। दुष्यंत की मां ने कोच को फोन लगाया, फिर बात नहीं हुई तो कोच की पत्नी को संदेश दिया। कोच की पत्नी ने संदेश किसी तरह कोच तक पहुंचाया तो तीन घंटे बाद दुष्यंत के कोच ने उसकी वीडियो कॉलिंग कर घर पर बात करवाई। जिसके बाद ही उनके परिवार व गांव के लोगों ने मिठाई बांटी।
अस्पताल में तीन घंटे तक रहा
रेस खत्म होने के बाद जब दुष्यंत नाव से उतरा तो वह गिर गया। जिस पर वहां मौजूद भारतीय दल के लोगों ने उसे वहां के अस्पताल में भर्ती करवाया। चिकित्सकों ने उच्च रक्तचाप की दिक्कत बताई। करीब तीन घंटे तक चिकित्सकों की देखरेख में चले इलाज के बाद उसे वहां से छुट्टी दे दी गई।
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