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एसडीओ सहित 37 एनीमल अंटेंडेंट व आठ पशु चिकित्सकों के पद रिक्त ...पशृ स्वास्यि सेवा चरमराई
Updated Thu, 02 Aug 2018 12:53 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
चरखी दादरी। पशुपालन विभाग में एसडीओ सहित 37 एनीमल अटेेंडेंट औरआठ पशु चिकित्सकों के पद लंबे समय से खाली होने की वजह से पशुपालकों को समय पर पशुओं का उपचार नहीं मिल पा रहा है। पांच पशु चिकित्सकों और आठ वीएलडीए के पद भी खाली पड़े हैं। जिले में कुल 2.66 लाख पशु हैं।
जिले का राजकीय पशु अस्पताल 1960 में बना था, तब से अस्पताल उसी व्यवस्था में चला आ रहा है। अस्पताल में सुविधाओं के विस्तार पर काई ध्यान नहीं दिया गया है जबकि लोगों की आबादी बढ़ने के साथ-साथ पशुओं की संख्या भी बढ़ी है। सभी प्रकार के पशुओं की संख्या के आधार पर ही विभाग प्लानिंग तैयार करता है। सभी सरकारी स्कीमों की प्लान पशु संख्या के अनुसार ही तैयार की जाती हैं। इस प्लान के तहत पहले पशुओं का पूरा डाटा तैयार करना होता है ताकि उसी के अनुरूप नए पशु अस्पताल खोले जाते हैं। दवाओं की उपलब्धता में भी विस्तार किया जाता है। पशु चिकित्सकों की भर्ती भी पशु संख्या के अनुपात में ही की जाती है ताकि सभी पशुओं की बीमारियों पर भी साथ-साथ अंकुश लगाया जा सके।
बढ़ रहीं बीमारियां
चरखी दादरी में इस समय गाय, भैंस, भेड़, बकरी, घोड़ा, बछड़े और कटड़ों समेत दो लाख 66 हजार 418 पशु हैं। आजकल पशुओं में नए रोग बढ़ रहे हैं, लेकिन पशु उपचार का दायरा न बढ़ने की वजह से पशुपालकों को समय-समय पर काफी दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं।
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यह पद भी खाली
जिले में विभाग के 83 छोटे और बड़े पशु चिकित्सा अस्पताल व डिस्पेंसरी हैं। विभाग में इस समय 37 एनीमल अटेंडेंट की कमी है। एनिमल अटेंडेंट के 84 पद स्वीकृत हैं लेकिन इनमें से 37 पद रिक्त पड़े हैं। पशु चिकित्सक जब पशु का उपचार करता है तो एनीमल अटेंडेंट उसकी मदद करते हैं ताकि चोट आदि नहीं लगने पाए। इनकी कमी की वजह से चिकित्सक भी पशुओं का उपचार करने में कतराते हैं।
डिप्टी सुपरिंटेंडेंट और क्लर्कों की भी कमी
विभाग कार्यालय में डिप्टी सुपरिंटेंडेंट और क्लर्कों की भी कमी है, जिससे कार्यालयी कामकाज काफी हद तक प्रभावित हो रहा है। सुपरिंटेंडेंट की देखरेख में ही मिनिस्ट्रियल स्टॉफ का कामकाज पूरा होता है। कार्यालय की रूटीन की कागज कार्रवाई, ई-मेल और डाक आदि का काम भी बाधित हो रहा है। कार्यालय में इस समय क्लर्क के चार पद खाली पड़े हैं। चपरासी के भी कई पद खाली है।
जिला पशु लैब की सुविधा भी शुरू नहीं
जिला बन जाने के बाद पशुओं के रोगों की जांच के लिए जिला लैब भी नहीं बनी है। पशु अस्पताल में सामान्य बीमारियों का ही उपचार संभव है। सीरियस मामला आने पर भिवानी या हिसार भेज दिया जाता है। लैब में रोग की जांच करवाने के लिए पशु पालक को अपना पशु भिवानी या हिसार ले जाना पड़ता है जिससे उसे काफी आर्थिक व मानसिक परेशानी झेलनी पड़ती है। जिला स्तर पर पॉलीक्लिनिक होता है लेकिन अब तक यह सुविधा भी यहां शुरू नहीं हो सकी है। पॉलीक्लिनिक में सभी प्रकार के पशुओं के ऑपरेशन किए जाने की सुविधा होती है। पशुओं की ज्यादा संख्या को देखते हुए चरखी दादरी में इसकी सख्त जरूरत बनी हुई है।
हर माह रिक्त पदों की डिटेल हेड ऑफिस भेजी जाती है। एनिमल अटेंडेंट के पद तो लंबे समय से खाली हैं लेकिन पशुपालकों को समय पर पशु चिकित्सा उपलब्ध करवाई जा रही है।
- डिप्टी डायरेक्टर, पशुपालन विभाग, चरखी दादरी
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चरखी दादरी। पशुपालन विभाग में एसडीओ सहित 37 एनीमल अटेेंडेंट औरआठ पशु चिकित्सकों के पद लंबे समय से खाली होने की वजह से पशुपालकों को समय पर पशुओं का उपचार नहीं मिल पा रहा है। पांच पशु चिकित्सकों और आठ वीएलडीए के पद भी खाली पड़े हैं। जिले में कुल 2.66 लाख पशु हैं।
जिले का राजकीय पशु अस्पताल 1960 में बना था, तब से अस्पताल उसी व्यवस्था में चला आ रहा है। अस्पताल में सुविधाओं के विस्तार पर काई ध्यान नहीं दिया गया है जबकि लोगों की आबादी बढ़ने के साथ-साथ पशुओं की संख्या भी बढ़ी है। सभी प्रकार के पशुओं की संख्या के आधार पर ही विभाग प्लानिंग तैयार करता है। सभी सरकारी स्कीमों की प्लान पशु संख्या के अनुसार ही तैयार की जाती हैं। इस प्लान के तहत पहले पशुओं का पूरा डाटा तैयार करना होता है ताकि उसी के अनुरूप नए पशु अस्पताल खोले जाते हैं। दवाओं की उपलब्धता में भी विस्तार किया जाता है। पशु चिकित्सकों की भर्ती भी पशु संख्या के अनुपात में ही की जाती है ताकि सभी पशुओं की बीमारियों पर भी साथ-साथ अंकुश लगाया जा सके।
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बढ़ रहीं बीमारियां
चरखी दादरी में इस समय गाय, भैंस, भेड़, बकरी, घोड़ा, बछड़े और कटड़ों समेत दो लाख 66 हजार 418 पशु हैं। आजकल पशुओं में नए रोग बढ़ रहे हैं, लेकिन पशु उपचार का दायरा न बढ़ने की वजह से पशुपालकों को समय-समय पर काफी दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं।
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यह पद भी खाली
जिले में विभाग के 83 छोटे और बड़े पशु चिकित्सा अस्पताल व डिस्पेंसरी हैं। विभाग में इस समय 37 एनीमल अटेंडेंट की कमी है। एनिमल अटेंडेंट के 84 पद स्वीकृत हैं लेकिन इनमें से 37 पद रिक्त पड़े हैं। पशु चिकित्सक जब पशु का उपचार करता है तो एनीमल अटेंडेंट उसकी मदद करते हैं ताकि चोट आदि नहीं लगने पाए। इनकी कमी की वजह से चिकित्सक भी पशुओं का उपचार करने में कतराते हैं।
डिप्टी सुपरिंटेंडेंट और क्लर्कों की भी कमी
विभाग कार्यालय में डिप्टी सुपरिंटेंडेंट और क्लर्कों की भी कमी है, जिससे कार्यालयी कामकाज काफी हद तक प्रभावित हो रहा है। सुपरिंटेंडेंट की देखरेख में ही मिनिस्ट्रियल स्टॉफ का कामकाज पूरा होता है। कार्यालय की रूटीन की कागज कार्रवाई, ई-मेल और डाक आदि का काम भी बाधित हो रहा है। कार्यालय में इस समय क्लर्क के चार पद खाली पड़े हैं। चपरासी के भी कई पद खाली है।
जिला पशु लैब की सुविधा भी शुरू नहीं
जिला बन जाने के बाद पशुओं के रोगों की जांच के लिए जिला लैब भी नहीं बनी है। पशु अस्पताल में सामान्य बीमारियों का ही उपचार संभव है। सीरियस मामला आने पर भिवानी या हिसार भेज दिया जाता है। लैब में रोग की जांच करवाने के लिए पशु पालक को अपना पशु भिवानी या हिसार ले जाना पड़ता है जिससे उसे काफी आर्थिक व मानसिक परेशानी झेलनी पड़ती है। जिला स्तर पर पॉलीक्लिनिक होता है लेकिन अब तक यह सुविधा भी यहां शुरू नहीं हो सकी है। पॉलीक्लिनिक में सभी प्रकार के पशुओं के ऑपरेशन किए जाने की सुविधा होती है। पशुओं की ज्यादा संख्या को देखते हुए चरखी दादरी में इसकी सख्त जरूरत बनी हुई है।
हर माह रिक्त पदों की डिटेल हेड ऑफिस भेजी जाती है। एनिमल अटेंडेंट के पद तो लंबे समय से खाली हैं लेकिन पशुपालकों को समय पर पशु चिकित्सा उपलब्ध करवाई जा रही है।
- डिप्टी डायरेक्टर, पशुपालन विभाग, चरखी दादरी