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आयकर सीमा न बढने से नौकरी पेशा लोग निराश
Updated Fri, 02 Feb 2018 01:24 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
बहादुरगढ़।
केंद्रीय वित्त मंत्री द्वारा वीरवार को संसद में पेश किए गए बजट पर आम आदमी ने भी अपनी राय व्यक्त की है। करमुक्त आय की सीमा नहीं बढ़ाने पर लोगों ने निराशा जताई है तो स्वास्थ्य सेवाओं के लिए किए प्रावधानों को सही ठहराया है।
- बीटेक के लिए वजीफे के प्रावधान को सराहा
सुशिक्षित युवती खुशबू गुप्ता ने कहा कि युवाओं को 70 लाख रोजगार देने का लक्ष्य भाजपा कैसे पूरा करेगी इस बारे में बजट में कोई स्पष्ट नीति नहीं दर्शाई गई। वो भी तब जब नोटबंदी और जीएसटी से लागू होने के बाद हमारे जैसे युवाओं का रोजगार छीन गया है। युवा कल्याण के लिए बजट में कुछ खास नहीं है। खुशबू ने बीटेक के एक लाख छात्रों को स्कॉलरशिप देने के लिए बजट में की घोषणा को सराहा।
- आयकर दाताओं के लिए बताया निराशाजनक
एडवोकेट नीरज शर्मा ने आम आदमी के लिए बजट को निराशाजनक बताया। उन्होंने कहा कि आयकर सीमा 250000 और 50000 से बढ़कर 300000 और 50000 होने की उम्मीद थी। लेकिन बजट ने सभी आयकर दाताओं को निराश किया है। लगता है सरकार सभी क्षेत्रों में विफल है। किसी एक आधार वस्तु के दाम बढ़ने से सब कुछ महंगा होता है। जबकि सरकार महंगाई घटाने की कोशिश ही नहीं कर रही।
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- स्वास्थ्य सेवाओं के लिए बताया सही
दिव्या बंसल ने सभी देश वासियों को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए बजट में प्रयासों की सराहना की है। टीबी आमतौर पर गरीबों को शिकार बनाती है और सरकार ने टीबी के मरीज को 500 रुपये प्रतिमाह देने का सही फैसला लिया है। हर तीन संसदीय क्षेत्र में एक मेडिकल कॉलेज खोलने और देश की काफी बड़ी आबादी का स्वास्थ्य बीमा कराने की घोषणा बहुत अच्छी बात है।
- कर मुक्त आय नहीं बढ़ाने को कहा गलत
कर्मचारी नवीन गोयल ने केंद्रीय बजट को आम आदमी के लिए निराशाजनक बताया। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार पिछले तीन वर्षों से हम आम लोगों पर टैक्सों को बोझ थोपती आ रही है, अब उससे इनकम टैक्स में राहत की उम्मीद थी। लेकिन जेटली ने कुछ नहीं किया। हम बहुत सीमित आमदनी वालों को गुजारा करना मुश्किल हो रहा है। परोपकारी सरकार के भाजपा के दावे की पोल खुल गई।
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बहादुरगढ़।
केंद्रीय वित्त मंत्री द्वारा वीरवार को संसद में पेश किए गए बजट पर आम आदमी ने भी अपनी राय व्यक्त की है। करमुक्त आय की सीमा नहीं बढ़ाने पर लोगों ने निराशा जताई है तो स्वास्थ्य सेवाओं के लिए किए प्रावधानों को सही ठहराया है।
- बीटेक के लिए वजीफे के प्रावधान को सराहा
सुशिक्षित युवती खुशबू गुप्ता ने कहा कि युवाओं को 70 लाख रोजगार देने का लक्ष्य भाजपा कैसे पूरा करेगी इस बारे में बजट में कोई स्पष्ट नीति नहीं दर्शाई गई। वो भी तब जब नोटबंदी और जीएसटी से लागू होने के बाद हमारे जैसे युवाओं का रोजगार छीन गया है। युवा कल्याण के लिए बजट में कुछ खास नहीं है। खुशबू ने बीटेक के एक लाख छात्रों को स्कॉलरशिप देने के लिए बजट में की घोषणा को सराहा।
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- आयकर दाताओं के लिए बताया निराशाजनक
एडवोकेट नीरज शर्मा ने आम आदमी के लिए बजट को निराशाजनक बताया। उन्होंने कहा कि आयकर सीमा 250000 और 50000 से बढ़कर 300000 और 50000 होने की उम्मीद थी। लेकिन बजट ने सभी आयकर दाताओं को निराश किया है। लगता है सरकार सभी क्षेत्रों में विफल है। किसी एक आधार वस्तु के दाम बढ़ने से सब कुछ महंगा होता है। जबकि सरकार महंगाई घटाने की कोशिश ही नहीं कर रही।
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- स्वास्थ्य सेवाओं के लिए बताया सही
दिव्या बंसल ने सभी देश वासियों को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए बजट में प्रयासों की सराहना की है। टीबी आमतौर पर गरीबों को शिकार बनाती है और सरकार ने टीबी के मरीज को 500 रुपये प्रतिमाह देने का सही फैसला लिया है। हर तीन संसदीय क्षेत्र में एक मेडिकल कॉलेज खोलने और देश की काफी बड़ी आबादी का स्वास्थ्य बीमा कराने की घोषणा बहुत अच्छी बात है।
- कर मुक्त आय नहीं बढ़ाने को कहा गलत
कर्मचारी नवीन गोयल ने केंद्रीय बजट को आम आदमी के लिए निराशाजनक बताया। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार पिछले तीन वर्षों से हम आम लोगों पर टैक्सों को बोझ थोपती आ रही है, अब उससे इनकम टैक्स में राहत की उम्मीद थी। लेकिन जेटली ने कुछ नहीं किया। हम बहुत सीमित आमदनी वालों को गुजारा करना मुश्किल हो रहा है। परोपकारी सरकार के भाजपा के दावे की पोल खुल गई।