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बहादुरगढ़ की प्यास बुझाने में असमर्थ है वाटर चैनल
Updated Thu, 26 Apr 2018 02:04 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
बहादुरगढ़।
वाटर सर्विस चैनल बहादुरगढ़ अपनी खस्ता हालत के कारण शहर को जरूरत के मुताबिक पेयजल उपलब्ध नहीं करा पा रही। नहर की खस्ता हालत को सुधारने के लिए नहर विभाग ने योजना तो बनाई है, मगर पैसे के अभाव में यह कार्य सिरे नहीं चढ़ पा रहा। विभाग ने हुडा और जनस्वास्थ्य विभाग को 40 करोड़ रुपये के एस्टीमेट बनाकर भेजे हैं। यदि यह राशि विभाग को मिल जाए तो इस नहर का पुनर्निर्माण शुरू हो जाए। मगर दोनों विभाग दिलचस्पी नहीं ले रहे।
यूं हो गई बदहाल
बहादुरगढ़ वाटर सर्विस चैनल पर दो लाख से अधिक लोगों की प्यास बुझाने की जिम्मेवारी है। इस नहर का निर्माण जनस्वास्थ्य विभाग और हुडा के जलघरों को पानी उपलब्ध कराने के लिए 1995 में हुआ था। गांव आसौदा से बहादुरगढ़ तक यह नहर पक्की कराई गई थी। 23 साल पुरानी हो जाने के कारण अब इसकी हालत खराब हो गई है। खास बात ये कि जिस वक्त नहर का निर्माण हुआ उस वक्त हुडा ने मरम्मत के दौरान पानी न रोकने की डिमांड की थी। तब से आज तक इस नहर में पानी को पूरी तरह से रोका नहीं गया। मरम्मत कार्य के दौरान भी थोड़े-थोड़े पानी की सप्लाई जारी रहती है। यही कारण है कि मरम्मत कार्य ढंग से नहीं हो पाता और नहर कमजोर होती चली गई।
जरूरत 43 की, दिया जा रहा 25 क्यूसेक
नहर जब शुरू हुई तो दोनों विभागों की 35 क्यूसेक (हुडा-20 और जनस्वास्थ्य विभाग 15) पानी की डिमांड थी। हुडा की डिमांड तो बढ़ी नहीं, मगर जनस्वास्थ्य विभाग की डिमांड 15 से बढ़कर 23 क्यूसेक तक पहुंच गई। यानी फिलहाल दोनों विभागों की इस नहर से 43 क्यूसेक पानी की डिमांड है, मगर नहर में केवल 25 क्यूसेक पानी ही छोड़ा जाता है। इसकी असल वजह नहर की खस्ता हालत है। अधिकारियों की मानें तो नहर इतनी कमजोर हो चुकी है कि 25 क्यूसेक पानी छोडने से भी इसके टूटने का आशंका रहती है। यदि इससे ज्यादा छोड़ा जाए तो नहर टूटने का खतरा बढ़ जाता है। मंगलवार की शाम को भी जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने हैड पर जाकर पानी बढ़वाया था, जिस कारण नहर टूट गई।
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40 करोड़ में होगा पुनर्निर्माण
आगामी 2030 तक पानी की डिमांड 100 क्यूसेक तक पहुंच जाएगी। उससे पहले नहर का पुनर्निर्माण बेहद जरूरी है। विभाग ने नहर को नए सिरे से बनाने की योजना बनाई है। नहर को आरसीसी से बाक्सेज में बनाया जाएगा। इस पर 40 करोड़ रुपये की लागत आनी है, जिसके एस्टीमेट बनाकर दोनों विभागों को भेजे जा चुके हैं। मगर अब तक नहर विभाग को यह राशि नहीं मिल पाई, इसी कारण इस योजना पर काम शुरू नहीं हो पा रहा।
पुनर्निर्माण की सख्त जरूरत
नह र लगभग डैमेज हो चुकी है। भविष्य को देखते हुए सुधार बेहद जरूरी है। पिछले पांच वर्षों में कई बार दोनों विभागों को कहा जा चुका है। जन स्वास्थ्य विभाग और हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण को मरम्मत राशि (40 करोड़ रुपये) के एस्टीमेट बनाकर भेजे गए हैं। यदि बजट राशि मिलेगी तो नहर का नए सिरे से सुधारीकरण कर दिया जाएगा।
-परमजीत सिहाग, एसई, नहर विभाग।
मेरे नॉलेज में नहीं
हो सकता है नहर विभाग ने एस्टीमेट भेजे हों, लेकिन मुझे इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है। जब तक सरकार पुनर्निर्माण का पैसा मंजूर नहीं करती तब तक नहर विभाग को फिलहाल मरम्मत तो करनी ही चाहिए ताकि जनता को पर्याप्त पानी मिल सके।
-एसके दहिया, एक्सईएन, जनस्वास्थ्य विभाग
हुडा को भी नहीं पता
मैं पिछले काफी समय से यहां कार्यरत हूं। मुझे तो कोई एस्टीमेट संबंधी लेटर या नोटिस मिला नहीं। यदि मिलता है तो मैं जरूर सिफारिश करूंगा।
-केके श्योकंद, एक्सईएन, हुडा।
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बहादुरगढ़।
वाटर सर्विस चैनल बहादुरगढ़ अपनी खस्ता हालत के कारण शहर को जरूरत के मुताबिक पेयजल उपलब्ध नहीं करा पा रही। नहर की खस्ता हालत को सुधारने के लिए नहर विभाग ने योजना तो बनाई है, मगर पैसे के अभाव में यह कार्य सिरे नहीं चढ़ पा रहा। विभाग ने हुडा और जनस्वास्थ्य विभाग को 40 करोड़ रुपये के एस्टीमेट बनाकर भेजे हैं। यदि यह राशि विभाग को मिल जाए तो इस नहर का पुनर्निर्माण शुरू हो जाए। मगर दोनों विभाग दिलचस्पी नहीं ले रहे।
यूं हो गई बदहाल
बहादुरगढ़ वाटर सर्विस चैनल पर दो लाख से अधिक लोगों की प्यास बुझाने की जिम्मेवारी है। इस नहर का निर्माण जनस्वास्थ्य विभाग और हुडा के जलघरों को पानी उपलब्ध कराने के लिए 1995 में हुआ था। गांव आसौदा से बहादुरगढ़ तक यह नहर पक्की कराई गई थी। 23 साल पुरानी हो जाने के कारण अब इसकी हालत खराब हो गई है। खास बात ये कि जिस वक्त नहर का निर्माण हुआ उस वक्त हुडा ने मरम्मत के दौरान पानी न रोकने की डिमांड की थी। तब से आज तक इस नहर में पानी को पूरी तरह से रोका नहीं गया। मरम्मत कार्य के दौरान भी थोड़े-थोड़े पानी की सप्लाई जारी रहती है। यही कारण है कि मरम्मत कार्य ढंग से नहीं हो पाता और नहर कमजोर होती चली गई।
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जरूरत 43 की, दिया जा रहा 25 क्यूसेक
नहर जब शुरू हुई तो दोनों विभागों की 35 क्यूसेक (हुडा-20 और जनस्वास्थ्य विभाग 15) पानी की डिमांड थी। हुडा की डिमांड तो बढ़ी नहीं, मगर जनस्वास्थ्य विभाग की डिमांड 15 से बढ़कर 23 क्यूसेक तक पहुंच गई। यानी फिलहाल दोनों विभागों की इस नहर से 43 क्यूसेक पानी की डिमांड है, मगर नहर में केवल 25 क्यूसेक पानी ही छोड़ा जाता है। इसकी असल वजह नहर की खस्ता हालत है। अधिकारियों की मानें तो नहर इतनी कमजोर हो चुकी है कि 25 क्यूसेक पानी छोडने से भी इसके टूटने का आशंका रहती है। यदि इससे ज्यादा छोड़ा जाए तो नहर टूटने का खतरा बढ़ जाता है। मंगलवार की शाम को भी जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने हैड पर जाकर पानी बढ़वाया था, जिस कारण नहर टूट गई।
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40 करोड़ में होगा पुनर्निर्माण
आगामी 2030 तक पानी की डिमांड 100 क्यूसेक तक पहुंच जाएगी। उससे पहले नहर का पुनर्निर्माण बेहद जरूरी है। विभाग ने नहर को नए सिरे से बनाने की योजना बनाई है। नहर को आरसीसी से बाक्सेज में बनाया जाएगा। इस पर 40 करोड़ रुपये की लागत आनी है, जिसके एस्टीमेट बनाकर दोनों विभागों को भेजे जा चुके हैं। मगर अब तक नहर विभाग को यह राशि नहीं मिल पाई, इसी कारण इस योजना पर काम शुरू नहीं हो पा रहा।
पुनर्निर्माण की सख्त जरूरत
नह र लगभग डैमेज हो चुकी है। भविष्य को देखते हुए सुधार बेहद जरूरी है। पिछले पांच वर्षों में कई बार दोनों विभागों को कहा जा चुका है। जन स्वास्थ्य विभाग और हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण को मरम्मत राशि (40 करोड़ रुपये) के एस्टीमेट बनाकर भेजे गए हैं। यदि बजट राशि मिलेगी तो नहर का नए सिरे से सुधारीकरण कर दिया जाएगा।
-परमजीत सिहाग, एसई, नहर विभाग।
मेरे नॉलेज में नहीं
हो सकता है नहर विभाग ने एस्टीमेट भेजे हों, लेकिन मुझे इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है। जब तक सरकार पुनर्निर्माण का पैसा मंजूर नहीं करती तब तक नहर विभाग को फिलहाल मरम्मत तो करनी ही चाहिए ताकि जनता को पर्याप्त पानी मिल सके।
-एसके दहिया, एक्सईएन, जनस्वास्थ्य विभाग
हुडा को भी नहीं पता
मैं पिछले काफी समय से यहां कार्यरत हूं। मुझे तो कोई एस्टीमेट संबंधी लेटर या नोटिस मिला नहीं। यदि मिलता है तो मैं जरूर सिफारिश करूंगा।
-केके श्योकंद, एक्सईएन, हुडा।