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राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण केविरोध में उतरे कई गांवों के किसान
Updated Tue, 18 Sep 2018 01:24 AM IST
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चरखी दादरी। गांव टिकान कलां के ग्रामीणों ने इस्माइलाबाद-नारनौल राष्ट्रीय राजमार्ग-152डी के लिए अधिग्रहण की जा रही जमीन पर एतराज जताया है। इसे लेकर ग्रामीणों ने जिला राजस्व विभाग अधिकारी को ज्ञापन सौंपा हैै।
ज्ञापन में ग्रामीण श्रीभगवान, रामकरण, प्रेम कुमार, बनी सिंह, अत्तर सिंह, भूप सिंह, शीशपाल, सुशील व हरपाल ने बताया कि सरकार जो राष्ट्रीय राजमार्ग बनाने जा रही है वहां से जनस्वास्थ्य विभाग ने पाइप लाइन बिछा रखी है। यह पाइप लाइन पंचायती कुएं से जोहड़ तक है और अगर मार्ग का निर्माण कराया जाता हैतो यह पाइप लाइन टूटने का खतरा बढ़ जाएगा। इस पाइप लाइन पर 90 लाख रुपये का बजट खर्च हुआ है। ग्रामीणों ने कहा कि पाइप टूट जाने पर नुकसान की भरपाई होनी चाहिए। ग्रामीणों ने जल्द ही इस समस्या का समाधान करवाने की मांग की है।
वहीं गांव खातीवास के किसानों ने भी राष्ट्रीय राजमार्ग - 152 डी का विरोध किया है। किसानों ने जिला राजस्व विभाग अधिकारी को सौंपे ज्ञापन में बताया कि इस राजकीय मार्ग के बनने से गांव के अधिकतर किसान भूमिहीन हो जाएंगें। गांव में सभी कच्चे रास्ते बंद हो जाएंगे। किसानों ने ज्ञापन में बताया कि जिन किसानों की इस राजमार्ग के लिए जमीन का अधिग्रहण होगा उन्हें प्रति परिवार योग्यता के आधार पर सरकारी नौकरी मिलनी चाहिए। प्रति एकड़ किसान को दो करोड़ का मुआवजा मिलना चाहिए। यह मार्ग गुजरने से जिन किसानों की भूमि मार्ग के दोनो ओर दो टुकड़ों में बंट जाती है तो उसे विशेष मुआवजा मिलना चाहिए। केवल फोर लाइन जितनी ही जमीन का अधिग्रहण होना चाहिए। ज्ञापन सौंपने वालों में किसान धर्मबीर सिंह, अनूप सिंह, रवींद्र, कृष्ण कुमार, अनूप आदि शामिल हैं।
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कपूरी के ग्रामीणों ने प्रति एकड़ चार करोड़ मांगा मुआवजा
वहीं गांव कपूरी- रामनगर के ग्रामीणों ने भी राष्ट्रीय राजमार्ग के लिए जमीन का अधिग्रहण होने पर मुआवजा प्रति एकड़ चार करोड़ देने की मांग की है। ग्रामीणों ने ज्ञापन में बताया कि गांव रामनगर -कपूरी की जमीन शहर से सटती है ऐसे में इस जमीन की कीमत काफी ज्यादा है। ग्रामीणों ने सरकार से राजमार्ग निर्माण संबंधी सभी आवश्यक शर्ते व नियम किसानों को अवगत कराए जाने की भी मांग की है। किसानों ने ज्ञापन में बताया कि जिस भी किसान की जमीन का अधिग्रहण होगा उसके परिवार को सरकारी नौकरी देनी चाहिए। मुआवजा राशि का एकमुश्त भुगतान होना चाहिए। किसानों के सिंचाई के साधन, कुएं, ट्यूबवेल आदि का भी मुआवजा दिया जाना चाहिए। ज्ञापन सौंपने वालों में नंबरदार चरण सिंह, सतबीर सिंह, दीपक व रामकरण आदि मौजूद थे।
समसपुर के ग्रामीण भी उतरे विरोध में
गांव समसपुर के ग्रामीणों ने भी इस राजमार्ग का विरोध किया है। विरोध स्वरूप ग्रामीणों ने जिला राजस्व अधिकारी को ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में ग्रामीणों ने इस राजमार्ग निर्माण पर एतराज जताते हुए कहा कि इससे किसानों की काफी जमीन का अधिग्रहण हो जाएगा। ज्ञापन में ग्रामीणों ने सरकार से खेतों को जाने वाले रास्तों की व्यवस्था करने की मांग की है। ज्ञापन में बताया कि जिस किसान की भूमि मार्ग के दोनो ओर टुकड़ों मेें बंट जाएगी उसे विशेष मुआवजा मिलना चाहिए। ग्रामीणों ने ज्ञापन में बताया कि उनके गांव की जमीन बेहद कीमती है। शहर से सटती जमीन है ऐसे में शहरी जमीन की तर्ज पर जमीन के रेट तय होने चाहिए। ज्ञापन सौंपने वालों में अमरजीत, रामकुमार, अजीत, धर्मबीर, विनोद, राज सिंह, सुभाष, रवींद्र, रमेश, अत्तर सिंह, राम सिंह व कुलदीप आदि के नाम शामिल हैं।
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ज्ञापन में ग्रामीण श्रीभगवान, रामकरण, प्रेम कुमार, बनी सिंह, अत्तर सिंह, भूप सिंह, शीशपाल, सुशील व हरपाल ने बताया कि सरकार जो राष्ट्रीय राजमार्ग बनाने जा रही है वहां से जनस्वास्थ्य विभाग ने पाइप लाइन बिछा रखी है। यह पाइप लाइन पंचायती कुएं से जोहड़ तक है और अगर मार्ग का निर्माण कराया जाता हैतो यह पाइप लाइन टूटने का खतरा बढ़ जाएगा। इस पाइप लाइन पर 90 लाख रुपये का बजट खर्च हुआ है। ग्रामीणों ने कहा कि पाइप टूट जाने पर नुकसान की भरपाई होनी चाहिए। ग्रामीणों ने जल्द ही इस समस्या का समाधान करवाने की मांग की है।
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वहीं गांव खातीवास के किसानों ने भी राष्ट्रीय राजमार्ग - 152 डी का विरोध किया है। किसानों ने जिला राजस्व विभाग अधिकारी को सौंपे ज्ञापन में बताया कि इस राजकीय मार्ग के बनने से गांव के अधिकतर किसान भूमिहीन हो जाएंगें। गांव में सभी कच्चे रास्ते बंद हो जाएंगे। किसानों ने ज्ञापन में बताया कि जिन किसानों की इस राजमार्ग के लिए जमीन का अधिग्रहण होगा उन्हें प्रति परिवार योग्यता के आधार पर सरकारी नौकरी मिलनी चाहिए। प्रति एकड़ किसान को दो करोड़ का मुआवजा मिलना चाहिए। यह मार्ग गुजरने से जिन किसानों की भूमि मार्ग के दोनो ओर दो टुकड़ों में बंट जाती है तो उसे विशेष मुआवजा मिलना चाहिए। केवल फोर लाइन जितनी ही जमीन का अधिग्रहण होना चाहिए। ज्ञापन सौंपने वालों में किसान धर्मबीर सिंह, अनूप सिंह, रवींद्र, कृष्ण कुमार, अनूप आदि शामिल हैं।
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कपूरी के ग्रामीणों ने प्रति एकड़ चार करोड़ मांगा मुआवजा
वहीं गांव कपूरी- रामनगर के ग्रामीणों ने भी राष्ट्रीय राजमार्ग के लिए जमीन का अधिग्रहण होने पर मुआवजा प्रति एकड़ चार करोड़ देने की मांग की है। ग्रामीणों ने ज्ञापन में बताया कि गांव रामनगर -कपूरी की जमीन शहर से सटती है ऐसे में इस जमीन की कीमत काफी ज्यादा है। ग्रामीणों ने सरकार से राजमार्ग निर्माण संबंधी सभी आवश्यक शर्ते व नियम किसानों को अवगत कराए जाने की भी मांग की है। किसानों ने ज्ञापन में बताया कि जिस भी किसान की जमीन का अधिग्रहण होगा उसके परिवार को सरकारी नौकरी देनी चाहिए। मुआवजा राशि का एकमुश्त भुगतान होना चाहिए। किसानों के सिंचाई के साधन, कुएं, ट्यूबवेल आदि का भी मुआवजा दिया जाना चाहिए। ज्ञापन सौंपने वालों में नंबरदार चरण सिंह, सतबीर सिंह, दीपक व रामकरण आदि मौजूद थे।
समसपुर के ग्रामीण भी उतरे विरोध में
गांव समसपुर के ग्रामीणों ने भी इस राजमार्ग का विरोध किया है। विरोध स्वरूप ग्रामीणों ने जिला राजस्व अधिकारी को ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में ग्रामीणों ने इस राजमार्ग निर्माण पर एतराज जताते हुए कहा कि इससे किसानों की काफी जमीन का अधिग्रहण हो जाएगा। ज्ञापन में ग्रामीणों ने सरकार से खेतों को जाने वाले रास्तों की व्यवस्था करने की मांग की है। ज्ञापन में बताया कि जिस किसान की भूमि मार्ग के दोनो ओर टुकड़ों मेें बंट जाएगी उसे विशेष मुआवजा मिलना चाहिए। ग्रामीणों ने ज्ञापन में बताया कि उनके गांव की जमीन बेहद कीमती है। शहर से सटती जमीन है ऐसे में शहरी जमीन की तर्ज पर जमीन के रेट तय होने चाहिए। ज्ञापन सौंपने वालों में अमरजीत, रामकुमार, अजीत, धर्मबीर, विनोद, राज सिंह, सुभाष, रवींद्र, रमेश, अत्तर सिंह, राम सिंह व कुलदीप आदि के नाम शामिल हैं।