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नारी को लेखन में उचित मान-सम्मान देने की जरूरत : प्रोफेसर कैरोलिन

Sun, 11 Mar 2018 01:28 AM IST
Updated Sun, 11 Mar 2018 01:28 AM IST
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नारी को लेखन में उचित मान-सम्मान देने की जरूरत : प्रोफेसर कैरोलिन
अमर उजाला ब्यूरो
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बहादुरगढ़।
लोवा विश्वविद्यालय अमेरिका की प्रोफेसर डॉ. कैरोलिन ने कहा कि ऐसे देश को महिला सशक्तीकरण की जरूरत नहीं है। जहां मां सरस्वती, लक्ष्मी, दुर्गा, मां काली व गोमाता के रूप में स्त्री शक्ति विराजमान हो। जरूरत है उस शक्ति को पहचानकर उसे समाज व लेखन में उसे उचित मान-सम्मान व स्थान देने की।
कैरोलिन बहादुरगढ़ के वैश्य कालेज में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी में वक्ताओं और छात्राओं को संबोधित कर रही थी। वैश्य आर्य कन्या महाविद्यालय में अंग्रेेजी विभाग द्वारा शनिवार को समकालीन भारतीय महिला लेखन: एक आलोचनात्मक विवेचन विषय पर एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में पांच सत्रों में करीब 200 शोधार्थियों ने अपने शोध पत्र पर प्रस्तुत किए। महाविद्यालय की प्राचार्या डा. राजवंती शर्मा ने सब से पहले सभी का परिचय करवाकर उनका अभिनन्दन किया। प्रात: कालीन सत्र में मुख्य अतिथि म्युनसिपल कारपोरेशन रोहतक के कमिश्नर प्रदीप कुमार ने कहा कि औरत समाज की धुरी है। वह पढ़कर अपनी सोच व दृष्टिकोण को विकसित कर समाज में भेदभाव को खत्म कर रही है। गेस्ट आफ आनर व मुख्य वक्ता लोआ विश्वविद्यालय अमेरिका की प्रोफे सर डा. कैरोलिन ने कहा कि जिस देश में वेद जैसे ग्रंथ, संस्कृत जैसी महान भाषा और योग जैसी अद्भुत शक्ति का निवास हो वहां की संस्कृति विश्व की अद्भुत धरोहर है।
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मुख्य वक्ता डा. जयवीर हुड्डा (एमडीयू रोहतक) ने समकालीन महिला लेखन के माध्यम से सामाजिक दृष्टिकोण को वर्णित किया। उन्होंने अलग -अलग साहित्यकारों के माध्यम से तत्कालीन परिस्थितियों और साहित्य दोनों का उदाहरण देते हुए अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने महिला लेखन में प्रचलित लोकगीत के माध्यम से साहित्यिक छवि का वर्णन किया। संगोष्ठी के समापन पर डा. जितेंद्र भारद्वाज रजिस्ट्रार (एमडीयू) ने कहा कि महिला समाज का केंद्र बिंदु है। उसकी समाज में भूमिका असाधारण है। वह आज समाज के हर क्षेत्र में अपने परचम लहरा रही है। हमे स्वस्थ राज्य व स्वस्थ समाज के निर्माण हेतु महिलाओं को और मजबूत स्वावलंबी व सक्षम बनाना होगा। सायंकालीन सत्र में मुख्य वक्ता प्रो. रणदीप राणा ने समकालीन महिला लेखन में बदलती सामाजिक परिस्थितियों व उनके प्रति बढ़ रहे अपराधिक माहौल पर लेखन कार्य करने पर जोर दिया। सत्र के दूसरे मुख्य वक्ता प्रो. उमेद सिंह ने विभिन्न उदाहरणों द्वारा समकालीन महिला लेखन को वर्णित किया। मंच संचालन अंग्रेजी विभाग की प्रवक्ता प्रवेश दहिया और नेहा ढुल ने किया। इस मौके पर रामधन गुप्ता, प्रेमचंद बंसल, जयपाल शर्मा आदि भी उपस्थित थे।
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