{"_id":"5a25a2d24f1c1b0d698bfecf","slug":"51512415954-jhajjar-bahadurgarh-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"स्टॉफ के अभाव में 7 गांवों में रोडवेज बस की रात्रि सेवा बंद, अब मुख्यालय से ही जाना होगा दिल्ली व चंडीगढ़","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
स्टॉफ के अभाव में 7 गांवों में रोडवेज बस की रात्रि सेवा बंद, अब मुख्यालय से ही जाना होगा दिल्ली व चंडीगढ़
Updated Tue, 05 Dec 2017 01:02 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
झज्जर।
रोडवेज विभाग के पास चालक और परिचालकों की भारी कमी चल रही है। इसके चलते झज्जर डिपो में रोजाना 20 बसें ऐसी खड़ी रहती हैं, जिन्हें किसी भी रूट पर नहीं भेजा जाता। इसके चलते जिला मुख्यालय को गांवों से जोड़ने वाले ग्रामीण रूट पूरी तरह से प्रभावित हो रहे हैं। काफी गांवों में रोडवेज विभाग द्वारा अपने फेरे कम कर दिए गए हैं। जिससे ग्रामीण आंचल से जिला मुख्यालय आने वाले लोगों को कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, रोडवेज विभाग ने ग्रामीण आंचल के सात गांवों की रात्रि सेवा भी बंद कर दी है। ऐसेे में अब लोगों को दिल्ली, चंडीगढ़ और अन्य कई बड़े शहरों में जाने के लिए उनके अपने गांव से ही बस नहीं मिल रही। अब इन लोगों को दिल्ली व चंडीगढ़ जाने के लिए पहले जिला मुख्यालय पहुंचना होगा। जहां आने के बाद ही ग्रामीणों को यह सुविधा मिल पाएगी।
- इन गांवों की बंद हुई रोडवेज बस की सर्विस
रोडवेज का रूट रात्रि ठहराव के गांव
सिवाना-दिल्ली-दादरी सिवाना
चिमनी-दिल्ली-दादरी चिमनी
सेहलंगा-दिल्ली-दादरी सेहलंगा
बहुझोलरी-चंडीगढ़ बहुझोलरी
माजरा-चंडीगढ़ माजरा
बाढ़सा-चंडीगढ़ चंडीगढ़
छोछी-जयपुर-रोहतक-झज्जर छोछी
- इतना कम है स्टाफ
रोडवेज विभाग के इस समय 42 चालकों व 22 परिचालकों की कमी चल रही है। जिसके चलते ये रूट प्रभावित हो रहे हैं। वहीं, डिपो के पास इस समय 105 बसें उपलब्ध हैं। जिनमें से हर रोज करीब 84 बसें रूटों के लिए रवाना होती हैं। जबकि 20 से 22 के बीच औसतन बसें रोडवेज की कर्मशाला में खड़ी रहती हैं। इसके चलते ये बसें भी बिना देखरेख के कंडम हो रही है। ऐसे में रोडवेज को तो चौतरफा नुकसान हो ही रहा है, साथ में ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को भी सुविधाएं नहीं मिल पा रही।
विभाग को राजस्व का नुकसान
बसों के डिपो में खड़ा रहने से झज्जर डिपो को राजस्व का भी नुकसान उठाना पड़ रहा है। डिपो अधिकारियों के अनुसार डिपो की एक बस रोजाना औसतन करीब 300 किलोमीटर का सफर करती है। वहीं, लंबे रूट की बसें रोजाना डिपो को करीब 15 हजार रुपये का मुनाफा देती हैं। इससे अनुमान लगाया जा सकता है कि डिपो को प्रतिमाह करीब एक करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। वहीं, बसें डिपो में खड़ी रहने की स्थिति में भी उनका टैक्स जमा करवाना पड़ता है।
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वर्जन
ग्रामीण रूटों पर सुविधाएं घटाकर सरकार निजीकरण की ओर कदम बढ़ा रही है। सरकार चाहती है कि लोग ये मानें कि रोडवेज सुविधा नहीं दे सकती। ताकि प्राईवेट परमिट देने का रास्ता साफ हो जाए। लेकिन इस सब के विरोध में वे 22 दिसंबर को आंदोलन करने जा रहे हैं। ग्रामीण रूटों को किसी भी सूरत में बंद नहीं होने दिया जाएगा।
- रामबीर, डिपो प्रधान, बीएमएस।
वर्जन
स्टाफ के अभाव की वजह से रूट प्रभावित हो रहे हैं। 20 बसों के लिए चालक-परिचालक स्टाफ का अभाव है। ऐसे में रूटों का प्रभावित होना लाजिमी है। गांवों से दिल्ली-चंडीगढ़ की सर्विस हटाकर डिपो मुख्यालय से करने के बारे में विभाग के निदेशालय से पत्र आया है। जिसके चलते ही ऐसा किया गया है।
- लेखराज, जीएम, झज्जर डिपो।
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झज्जर।
रोडवेज विभाग के पास चालक और परिचालकों की भारी कमी चल रही है। इसके चलते झज्जर डिपो में रोजाना 20 बसें ऐसी खड़ी रहती हैं, जिन्हें किसी भी रूट पर नहीं भेजा जाता। इसके चलते जिला मुख्यालय को गांवों से जोड़ने वाले ग्रामीण रूट पूरी तरह से प्रभावित हो रहे हैं। काफी गांवों में रोडवेज विभाग द्वारा अपने फेरे कम कर दिए गए हैं। जिससे ग्रामीण आंचल से जिला मुख्यालय आने वाले लोगों को कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, रोडवेज विभाग ने ग्रामीण आंचल के सात गांवों की रात्रि सेवा भी बंद कर दी है। ऐसेे में अब लोगों को दिल्ली, चंडीगढ़ और अन्य कई बड़े शहरों में जाने के लिए उनके अपने गांव से ही बस नहीं मिल रही। अब इन लोगों को दिल्ली व चंडीगढ़ जाने के लिए पहले जिला मुख्यालय पहुंचना होगा। जहां आने के बाद ही ग्रामीणों को यह सुविधा मिल पाएगी।
- इन गांवों की बंद हुई रोडवेज बस की सर्विस
रोडवेज का रूट रात्रि ठहराव के गांव
सिवाना-दिल्ली-दादरी सिवाना
चिमनी-दिल्ली-दादरी चिमनी
सेहलंगा-दिल्ली-दादरी सेहलंगा
बहुझोलरी-चंडीगढ़ बहुझोलरी
माजरा-चंडीगढ़ माजरा
बाढ़सा-चंडीगढ़ चंडीगढ़
छोछी-जयपुर-रोहतक-झज्जर छोछी
- इतना कम है स्टाफ
रोडवेज विभाग के इस समय 42 चालकों व 22 परिचालकों की कमी चल रही है। जिसके चलते ये रूट प्रभावित हो रहे हैं। वहीं, डिपो के पास इस समय 105 बसें उपलब्ध हैं। जिनमें से हर रोज करीब 84 बसें रूटों के लिए रवाना होती हैं। जबकि 20 से 22 के बीच औसतन बसें रोडवेज की कर्मशाला में खड़ी रहती हैं। इसके चलते ये बसें भी बिना देखरेख के कंडम हो रही है। ऐसे में रोडवेज को तो चौतरफा नुकसान हो ही रहा है, साथ में ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को भी सुविधाएं नहीं मिल पा रही।
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विभाग को राजस्व का नुकसान
बसों के डिपो में खड़ा रहने से झज्जर डिपो को राजस्व का भी नुकसान उठाना पड़ रहा है। डिपो अधिकारियों के अनुसार डिपो की एक बस रोजाना औसतन करीब 300 किलोमीटर का सफर करती है। वहीं, लंबे रूट की बसें रोजाना डिपो को करीब 15 हजार रुपये का मुनाफा देती हैं। इससे अनुमान लगाया जा सकता है कि डिपो को प्रतिमाह करीब एक करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। वहीं, बसें डिपो में खड़ी रहने की स्थिति में भी उनका टैक्स जमा करवाना पड़ता है।
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ग्रामीण रूटों पर सुविधाएं घटाकर सरकार निजीकरण की ओर कदम बढ़ा रही है। सरकार चाहती है कि लोग ये मानें कि रोडवेज सुविधा नहीं दे सकती। ताकि प्राईवेट परमिट देने का रास्ता साफ हो जाए। लेकिन इस सब के विरोध में वे 22 दिसंबर को आंदोलन करने जा रहे हैं। ग्रामीण रूटों को किसी भी सूरत में बंद नहीं होने दिया जाएगा।
- रामबीर, डिपो प्रधान, बीएमएस।
वर्जन
स्टाफ के अभाव की वजह से रूट प्रभावित हो रहे हैं। 20 बसों के लिए चालक-परिचालक स्टाफ का अभाव है। ऐसे में रूटों का प्रभावित होना लाजिमी है। गांवों से दिल्ली-चंडीगढ़ की सर्विस हटाकर डिपो मुख्यालय से करने के बारे में विभाग के निदेशालय से पत्र आया है। जिसके चलते ही ऐसा किया गया है।
- लेखराज, जीएम, झज्जर डिपो।