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प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों पर एचएसपीसीबी की टीम ने ही फेर दिया पानी

Rohtak Bureau

Rohtak Bureau

Updated Fri, 08 Dec 2017 12:58 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
बादली (बहादुरगढ़)।
दिल्ली एनसीआर के बहादुरगढ़ क्षेत्र में प्रदूषण नियंत्रण के प्रति प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी ही गंभीर नजर नहीं आ रहे। बोर्ड के स्थानीय अधिकारियों ने वीरवार को प्रदूषण नियंत्रण के लिए की गई स्थानीय प्रशासन की कवायद पर ही पानी फेर दिया। यह टीम एक भट्टे पर अन्य अधिकारियों से पहले ही पहुंच गई और ईंट भट्टा संचालकों की गलती के बावजूद औपचारिकता पूरी करके मामला निपटा दिया। प्रशासनिक अधिकारियों की टीम ने मामले को गोलमाल करने का आरोप लगाते हुए एसडीएम को बोर्ड टीम के खिलाफ शिकायत दी है।
एसटीएम ने बनाई टीम
प्रशासन को बादली क्षेत्र में ईंट भट्टों द्वारा प्रदूषण फैलाने की शिकायतें मिल रही थीं। इसलिए वीरवार को बादली के उपमंडल अधिकारी त्रिलोकचंद ने तहसीलदार कंवल सिंह यादव, खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के उप निरीक्षक सुमित कुमार व प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी अजय मलिक की एक टीम का गठन किया। उन्होंने कुछ स्पेशल ईंट भट्ठों के फोटो और विडियो टीम को दिखाते हुए कार्रवाई के आदेश दिए।
एसडीएम के निर्देश पर बोर्ड की टीम सबसे पहले दिल्ली सीमा पर बिना जिग जैग चल रहे डागर ईंट भट्टे पर पहुंची। यहां ईंधन के तौर पर प्रयोग करने के लिए प्लास्टिक की स्क्रैप बरामद हुई। इसके बाद टीम जेएस भट्टे पर पहुंची और भट्टा मालिक को नोटिस देकर कार्रवाई शुरू कर दी। इस भट्टे पर जिग जैग सिस्टम नहीं मिला और अन्य आवश्यक मापदंड भी पूरे नहीं पाए। दोनों भट्टों पर कार्रवाई करने के बाद बोर्ड की टीम ने एसडीएम को लिखित में जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि इस भट्टे पर जिस तरह से व्यवस्था कमजोर मिली, उससे साफ है कि प्रदूषण जरूर फैलता होगा।
कार्रवाई को लेकर दिखे अधिकारियों में मतभेद
अधिकारियों में तालमेल के अभाव में टीम में मतभेद सामने आया। पहले भट्टे पर जहां टीम के अधिकारी अलग-अलग पहुंचे। वहीं, दूसरे भट्टे पर कार्रवाई को लेकर टीमों में मतभेद रहा। प्रदूषण विभाग के अधिकारी मौके पर कार्रवाई करने से इंकार करते रहे। जबकि टीम के अन्य अधिकारी मौके पर पुलिस में एफआईआर दर्ज कराने पर अड़ गए। काफी बहस के बाद केवल विभागीय तौर पर कार्रवाई की गई। किसी भी भट्टा मालिक पर एफआईआर दर्ज नहीं की गई। निरीक्षण के दौरान अधिकारी आपस में एक-दूसरे की कार्रवाई से संतुष्ट दिखाई नहीं दिए।
टीम के साथ नहीं चले बोर्ड अधिकारी
टीम में शामिल तीनों अधिकारियों की सुरक्षा के लिए झज्जर और बहादुरगढ़ से पुलिस फोर्स बुलाई गई थी। मगर पूरी कार्रवाई पर उस समय पानी फिर गया। जब पुलिस के आने से पहले ही एसडीएम कार्यालय से प्रदूषण विभाग के अधिकारी चिह्नित किए दिल्ली सीमा के साथ स्थित डीसी ईंट भट्टे पर पहुंच गए। ईंट भट्टे पर पड़े प्लास्टिक स्क्रैप को देखकर प्रदूषण बोर्ड की टीम भट्टा मालिक को नोटिस देकर लौट आई। जिस पर तहसीलदार सहित अन्य अधिकारियों ने एसडीएम को बोर्ड टीम की शिकायत दी।
एसडीएम की फटकार
दूसरे विभागों के अधिकारियों और पुलिस सुरक्षा को छोड़कर पहले ही डीसी ईंट भट्ठे पर पहुंचने वाले बोर्ड के एसडीओ अजय मलिक को एसडीएम त्रिलोक चंद ने फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि बिना पुलिस सुरक्षा के ईंट भट्ठे पर कोई घटना होती तो इसका जिम्मेवार कौन होता। उन्होंने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए की गई प्रशासन की सारी कवायद भी फ्लॉप हो गई। हालांकि एसडीओ अजय कुमार का कहना है कि भट्टा मालिक को नोटिस दिया गया है।
ऐसे चली कार्रवाई
वीरवार सुबह ही एसडीएम त्रिलोकचंद और तहसीलदार कंवल सिंह यादव जहांगीरपुर में पिछले दिनों एक भट्टे पर लगाई सील का निरीक्षण करने पहुंचे। बाद में अन्य भट्टों के निरीक्षण के लिए एसडीएम ने टीम का गठन किया और तुरंत पुलिस फोर्स को भी कार्यालय में बुलाकर आवश्यक दिशा निर्देश जारी किए।
क्या है भट्टों की स्थिति
जिले में 453 ईंट भट्टा संचालकों के पास लाइसेंस हैं। राज्य सरकार के नए आदेशों के बाद ईंट भट्टों को जिग-जैग सिस्टम से चलाना अनिवार्य है। जबकि बिना जिग-जैग के भट्टों को आगामी आदेशों तक पूरी तरह से बंद किए जाने के निर्देश हैं। ऐसे में 126 ईंट भट्टों पर जिग-जैग प्रणाली अपनाई जा चुकी है और 76 भट्टों पर बदलने का काम जारी है। इनके अलावा कुछ भट्टे सरकार और एनजीटी के आदेशों को ताक पर रखकर चलाए जा रहे हैं, जिन पर अब प्रशासन सतर्क हो गया है।
जिग-जैग प्रणाली
अक्तूबर माह से सर्वोच्च न्यायालय ने दिल्ली एनसीआर में बिना जिग-जैग इंडयुक्ड ड्राफ्ट्स तकनीक व बिना लाइसेंस के ईंट भट्ठे चलाने पर रोक लगा दी थी। जिग-जैग तकनीक के ईंट भट्ठे वर्तमान भट्ठों से बिल्कुल विपरीत होते हैं। जिग-जैग तकनीक वाला ईंट भट्ठा चौरस होता है और इसकी दीवारें करीब 15 फुट मोटाई वाली होती हैं। जबकि पुरानी तकनीक वाला भट्ठा लंबा व गोलाकार होता है। पुरानी तकनीक वाला भट्टा काला धुआं छोड़ता है, जो खतरनाक होता है। जबकि जिग-जैग तकनीक वाला भट्टा सफेद धुआं छोड़ता है। यह धुआं काले धुएं के मुकाबले कम नुकसानदायक माना जाता है। लेकिन यह प्रणाली महंगी होने के कारण कुछ ईंट भट्टा संचालक इसको अपनाने से बचने की कोशिश कर रहे हैं।
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