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अर्धनग्न होकर रामनगर सड़क पर उतरे किसान, दादरी में अलर्ट हुई पुलिस
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अमर उजाला ब्यूरो
चरखी दादरी। एनएच-152 डी की मुआवजा राशि बढ़ाने की मांग को लेकर धरना दे रहे किसानों ने शुक्रवार को बिना पूर्व सूचना के अर्धनग्न होकर प्रदर्शन किया। ये किसान धरनास्थल से रामनगर गांव तक आए और इसके बाद लौट गए। वहीं, किसानों के धरनास्थल से चलने की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन अलर्ट हो गया। किसानों के लघु सचिवालय घेराव के लिए आने के अंदेशे पर शहर से बाहर ही रोकने के लिए नई अनाज मंडी में पुलिस फोर्स तैनात की गई। वहीं, किसानों के वापस धरनास्थल तक लौटने की सूचना आने तक डीएसपी यहां मौजूद रहे। किसान नेताओं का कहना है कि अब 17 गांवों के किसानों की नजर शनिवार को जिला प्रशासन के साथ होने वाली वार्ता पर टिकी है। अगर प्रशासन का शनिवार तक सकारात्मक जवाब नहीं मिला तो फिर धरनास्थल पर आकर आगामी कदम का ऐलान कर दिया जाएगा। किसान नेताओं का कहना है कि अपनी जायज मांगों को मनवाने के लिए किसान कड़े से कड़ा कदम उठा सकते हैं।
17 गांवों के किसानों का धरना शुक्रवार को गांव रामनगर और मौड़ी के बीच 11वें दिन भी जारी रहा। दिनभर धरने को समर्थन देने का दौर चला। शुक्रवार दोपहर करीब साढ़े 12 बजे धरनास्थल पर बैठे किसान अर्धनग्न होकर सड़क पर उतर आए। इन किसानों ने रामनगर की तरफ कूच किया। खुफिया विभाग के कर्मचारियों ने तुरंत इसकी सूचना उच्चाधिकारियों को दी जिसके बाद हाई अलर्ट जैसी स्थिति देखने को मिली। पुलिस विभाग ने तुरंत फोर्स को अलर्ट कर दिया और नई अनाज मंडी के समीप किसानों को रोकने के मंसूबे से भारी तादाद में पुलिस बल भेजा गया। दूसरी तरफ किसान गांव रामनगर तक आए और इसके बाद धरनास्थल की तरफ लौट गए। इस दौरान किसानों ने जिला प्रशासन और सरकार विरोधी नारे लगाए।
प्रतिनिधिमंडल के सदस्य विनोद मौड़ी ने कहा कि किसानों की मांगों के प्रति न तो प्रशासन गंभीर है और न सरकार। उपायुक्त एक तरफ वार्ता का निमंत्रण भेजते हैं तो वहां जाने पर मिलने से किनारा कर जाते हैं। किसानों के प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात एसडीएम से कराई गई और उन्हें इस मामले की जानकारी तक नहीं है। ऐसा करने का मकसद किसानों का समय बर्बाद कर मामले को लटकाना है। उन्होंने कहा कि प्रशासन का यह ढुलमुल रवैया किसान और अधिक सहन नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि वीरवार को हुई वार्ता में एसडीएम ने एक दिन का समय मांगकर शनिवार को दोबारा वार्ता के लिए बुलाया है। शनिवार तक अगर प्रशासन का सकारात्मक जवाब नहीं मिला तो फिर किसान कड़ा कदम उठाने को विवश होंगे और इस कदम का ऐलान शनिवार को धरनास्थल पर कर दिया जाएगा।
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प्रशासन ने दो जगह लगाए बेरिकेड्स, एसपी ने लिया जायजा
किसानों के धरनास्थल से कूच करते ही पुलिस अमला हरकत में आ गया। पुलिस विभाग ने चिड़िया मोड़ और नई अनाज मंडी के सामने बेरिकेड्स लगा दिए। यहां दोनों डीएसपी सहित करीब 80 पुलिस कर्मचारी तैनात रहे। पुलिस सूत्रों की मानें तो एसपी स्मिति चौधरी ने भी यहां प्रबंधों का जायजा लिया। किसानों के धरनास्थल पर जाने की सूचना आने के बाद ही यहां से पुलिस कर्मचारी वापस गए।
ग्रीन कॉरिडोर मामले का जल्द निकलेगा हल, शांति बनाए रखें किसान : उपायुक्त
चरखी दादरी। उपायुक्त अजय सिंह तोमर ने कहा है कि ग्रीन कॉरिडोर का मामला राज्य सरकार की बजाय केंद्र सरकार से संबंधित है। इस मामले में जिला प्रशासन निरंतर सरकार के संपर्क में है और जल्द ही मामले का समाधान होने की उम्मीद है। ग्रामीणों की मांग को सरकार तक पहुंचा दिया गया है। अजय सिंह तोमर ने कहा कि धरने पर बैठे ग्रामीण धैर्य व शांति बनाए रखे, जिला प्रशासन उनके साथ है। किसी के बहकावे में आकर कोई गलत कदम न उठाए। उपायुक्त ने कहा कि यह मामला भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण से संबधित है। यह विभाग केंद्र सरकार के सड़क एवं परिवहन मंत्रालय का है। समाचार पत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सांसद धर्मबीर सिंह इस मामले में आंदोलनरत ग्रामीणों के साथ 11 मार्च को एनएचएआई के अधिकारी युद्घवीर मलिक से मिलेंगे। इस बैठक में उम्मीद है कि एक सर्वमान्य हल निकल कर सामने आएगा। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार जो भी फैसला करेगी, जिला प्रशासन उसे तत्काल लागू करेगा। उपायुक्त अजय सिंह तोमर ने कहा कि किसान आत्महत्या की अनुमति मांगने जैसा कोई कदम न उठाएं। ग्रामीणों की मांगों से सरकार और प्रशासन पूरी तरह वाकिफ है।
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चरखी दादरी। एनएच-152 डी की मुआवजा राशि बढ़ाने की मांग को लेकर धरना दे रहे किसानों ने शुक्रवार को बिना पूर्व सूचना के अर्धनग्न होकर प्रदर्शन किया। ये किसान धरनास्थल से रामनगर गांव तक आए और इसके बाद लौट गए। वहीं, किसानों के धरनास्थल से चलने की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन अलर्ट हो गया। किसानों के लघु सचिवालय घेराव के लिए आने के अंदेशे पर शहर से बाहर ही रोकने के लिए नई अनाज मंडी में पुलिस फोर्स तैनात की गई। वहीं, किसानों के वापस धरनास्थल तक लौटने की सूचना आने तक डीएसपी यहां मौजूद रहे। किसान नेताओं का कहना है कि अब 17 गांवों के किसानों की नजर शनिवार को जिला प्रशासन के साथ होने वाली वार्ता पर टिकी है। अगर प्रशासन का शनिवार तक सकारात्मक जवाब नहीं मिला तो फिर धरनास्थल पर आकर आगामी कदम का ऐलान कर दिया जाएगा। किसान नेताओं का कहना है कि अपनी जायज मांगों को मनवाने के लिए किसान कड़े से कड़ा कदम उठा सकते हैं।
17 गांवों के किसानों का धरना शुक्रवार को गांव रामनगर और मौड़ी के बीच 11वें दिन भी जारी रहा। दिनभर धरने को समर्थन देने का दौर चला। शुक्रवार दोपहर करीब साढ़े 12 बजे धरनास्थल पर बैठे किसान अर्धनग्न होकर सड़क पर उतर आए। इन किसानों ने रामनगर की तरफ कूच किया। खुफिया विभाग के कर्मचारियों ने तुरंत इसकी सूचना उच्चाधिकारियों को दी जिसके बाद हाई अलर्ट जैसी स्थिति देखने को मिली। पुलिस विभाग ने तुरंत फोर्स को अलर्ट कर दिया और नई अनाज मंडी के समीप किसानों को रोकने के मंसूबे से भारी तादाद में पुलिस बल भेजा गया। दूसरी तरफ किसान गांव रामनगर तक आए और इसके बाद धरनास्थल की तरफ लौट गए। इस दौरान किसानों ने जिला प्रशासन और सरकार विरोधी नारे लगाए।
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प्रतिनिधिमंडल के सदस्य विनोद मौड़ी ने कहा कि किसानों की मांगों के प्रति न तो प्रशासन गंभीर है और न सरकार। उपायुक्त एक तरफ वार्ता का निमंत्रण भेजते हैं तो वहां जाने पर मिलने से किनारा कर जाते हैं। किसानों के प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात एसडीएम से कराई गई और उन्हें इस मामले की जानकारी तक नहीं है। ऐसा करने का मकसद किसानों का समय बर्बाद कर मामले को लटकाना है। उन्होंने कहा कि प्रशासन का यह ढुलमुल रवैया किसान और अधिक सहन नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि वीरवार को हुई वार्ता में एसडीएम ने एक दिन का समय मांगकर शनिवार को दोबारा वार्ता के लिए बुलाया है। शनिवार तक अगर प्रशासन का सकारात्मक जवाब नहीं मिला तो फिर किसान कड़ा कदम उठाने को विवश होंगे और इस कदम का ऐलान शनिवार को धरनास्थल पर कर दिया जाएगा।
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प्रशासन ने दो जगह लगाए बेरिकेड्स, एसपी ने लिया जायजा
किसानों के धरनास्थल से कूच करते ही पुलिस अमला हरकत में आ गया। पुलिस विभाग ने चिड़िया मोड़ और नई अनाज मंडी के सामने बेरिकेड्स लगा दिए। यहां दोनों डीएसपी सहित करीब 80 पुलिस कर्मचारी तैनात रहे। पुलिस सूत्रों की मानें तो एसपी स्मिति चौधरी ने भी यहां प्रबंधों का जायजा लिया। किसानों के धरनास्थल पर जाने की सूचना आने के बाद ही यहां से पुलिस कर्मचारी वापस गए।
ग्रीन कॉरिडोर मामले का जल्द निकलेगा हल, शांति बनाए रखें किसान : उपायुक्त
चरखी दादरी। उपायुक्त अजय सिंह तोमर ने कहा है कि ग्रीन कॉरिडोर का मामला राज्य सरकार की बजाय केंद्र सरकार से संबंधित है। इस मामले में जिला प्रशासन निरंतर सरकार के संपर्क में है और जल्द ही मामले का समाधान होने की उम्मीद है। ग्रामीणों की मांग को सरकार तक पहुंचा दिया गया है। अजय सिंह तोमर ने कहा कि धरने पर बैठे ग्रामीण धैर्य व शांति बनाए रखे, जिला प्रशासन उनके साथ है। किसी के बहकावे में आकर कोई गलत कदम न उठाए। उपायुक्त ने कहा कि यह मामला भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण से संबधित है। यह विभाग केंद्र सरकार के सड़क एवं परिवहन मंत्रालय का है। समाचार पत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सांसद धर्मबीर सिंह इस मामले में आंदोलनरत ग्रामीणों के साथ 11 मार्च को एनएचएआई के अधिकारी युद्घवीर मलिक से मिलेंगे। इस बैठक में उम्मीद है कि एक सर्वमान्य हल निकल कर सामने आएगा। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार जो भी फैसला करेगी, जिला प्रशासन उसे तत्काल लागू करेगा। उपायुक्त अजय सिंह तोमर ने कहा कि किसान आत्महत्या की अनुमति मांगने जैसा कोई कदम न उठाएं। ग्रामीणों की मांगों से सरकार और प्रशासन पूरी तरह वाकिफ है।