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एचएच-152 डी के लिए अधिग्रहित जमीन का किसानों ने प्रति एकड़ मांगा साढ़े तीन करोड़ मुआवजा

Thu, 24 Jan 2019 01:03 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 24 Jan 2019 01:03 AM IST
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एचएच-152 डी के लिए अधिग्रहित जमीन का किसानों ने प्रति एकड़ मांगा साढ़े तीन करोड़ मुआवजा
अमर उजाला ब्यूरो
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चरखी दादरी। एनएचएआई द्वारा राष्ट्रीय राजमार्ग 152-डी बनाने के लिए अधिगृहीत की गई जमीन का खतीवास गांव के किसानों ने प्रति एकड़ साढ़े तीन करोड़ रुपये मुआवजा मांगा है। बुधवार को इस मांग पर एडीसी मनोज कुमार से मिले और इस संबंध में ज्ञापन भी सौंपा।

लघु सचिवालय पहुंचे गांव खातीवास के ग्रामीण अनूप सिंह, धर्मपाल, प्रदीप, युद्धवीर, उदयवीर, भूपसिंह, राजेश, ओमबीर, जयपाल, राजपाल, बलजीत, साधुराम, रमेश, जयपाल, रामभगत, उमेद, जगदीश, सत्यपाल, प्रीतम सिंह और राजपाल ने बताया कि भारत सरकार नारनौल से गंगहेड़ी तक राष्ट्रीय राजमार्ग का निर्माण करा रही है। इसके तहत गांव खातीवास के ग्रामीणों की जमीन भी अधिगृहीत की जा रही है। उन्होंने बताया कि अभी तक कोई भी किसान अपनी जमीन बेचने के लिए तैयार नहीं हैं लेकिन देश के विकास को ध्यान में रखकर किसान अपनी जमीन देने के लिए तैयार हैं। किसानों ने बताया कि गांव में अधिकतर बासमती धान की खेती की जाती हैं। उन्होने बताया कि गांव की जो जमीन सरकार ने राष्ट्रीय राजमार्ग के लिए अधिगृहीत की है उस पर धान की अच्छी पैदावार होती है। उन्होंने कहा कि आज के समय इस जमीन की कीमत 3.5 करोड़ रुपये बनती हैं इसलिए मुआवजा राशि को जीपी की तर्ज पर निर्धारित किया जाए और जिन किसानों की जमीन के दो हिस्से हो गए उन्हें अधिक मुआवजा दिया जाए। इस संबंध में किसानों ने एडीसी को ज्ञापन सौंपा है। इस दौरान एडीसी मनोज कुमार ने बताया कि जमीन का जो रेट डीआरओ और एनएचआई के अधिकारी निर्धारित करेंगे अगर उसके बाद कोई समस्या आए तो किसान दोबारा मिल सकते हैं।
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