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यूसी के फेर में अटकी 326 परिवारों के टॉयलेट की दूसरी किस्त, डेढ साल बाद भी नपा अधिकारी चंडीगढ़ से नहीं ले पाए बजट
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अमर उजाला ब्यूरो
झज्जर। शहर को ओडीएफ घोषित करवाने की चाहत में नगरपालिका अधिकारियों ने वर्ष 2017 में घर-घर जाकर टॉयलेट बनाने के लिए ग्रांट बांटी। लेकिन जैसे ही शहर ओडीएफ घोषित हुआ तो अधिकारियों ने पलट कर नहीं देखा कि टॉयलेट की दूसरी किस्त कितने परिवारों तक अभी नहीं पहुुंची है। ओडीएफ की चाहत में जो रकम खर्च किया गया था, निदेशालय ने उससे संबंधित यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट मांगा है। जिसे नपा द्वारा काफी लेट जमा करवाया गया। इसके कारण यह ग्रांट अटकी हुई है। इसके बाद नगरपालिका के अधिकारी इस ग्रांट के लिए निदेशालय से संपर्क करना ही भूल गए हैं।
वहीं, डेढ़ साल से शहर के 326 परिवारों को दूसरी किस्त का इंतजार है। इनमें से कुछ परिवारों की माली हालत तो बहुत खराब है। परिवारों में कुछ ने तो अपना टॉयलेट का निर्माण कर्ज लेकर पूरा किया है। मजदूरी करने वाले इन परिवारों के सिर से अब ये सात हजार रुपये का कर्ज नहीं उतर रहा, जिसके जिम्मेदार ये लोग नगरपालिका को ठहरा रहे हैं।
वार्डों में परिवारों की संख्या
वार्ड संख्या
1. 14
2. 21
3. 29
4. 21
5. 28
6. 17
7. 14
8. 8
9. 10
10. 13
11. 28
12. 23
13. 34
14. 37
15. 55
16. 12
17. 06
18. 02
19. 00
कुल 326
14 हजार रुपये मिलती है सहायता राशि
टॉयलेट बनाने के लिए शहर के आमजन को 14 हजार रुपये की सहायता राशि उपलब्ध करवाई जाती है। नपा के द्वारा पहली किस्त एडवांस में तथा दूसरी किस्त टॉयलेट बनने के बाद उपलब्ध करवाई जाती है। दोनों ही किस्त के तौर पर नपा सात-सात हजार रुपये देता है। शहर में 326 लोगों के नपा के पास 22 लाख 82 हजार रुपये पेंडिंग हैं।
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ये बोले पीड़ित पारिवार
2. लोकनाथ ने बताया कि डेढ़ साल पूर्व नपा ने पहली किस्त जारी की थी। टॉयलेट निर्माण पांच दिन में हो गया था लेकिन नपा दूसरी किस्त के लिए अब तक चक्कर कटवा रहा है। मजदूरी करने जाते हैं, ऐसे में नपा के चक्कर नहीं काट पाते। अधिकारी बता भी नहीं रहे कि पैसा कब मिलेगा।
2. नीलम ने बताया कि टॉयलेट की छत तक वो नहीं लगवा सकी है। उसे किसी ने पैसे नहीं दिए तो वो कहां से लेकर आती। अगर दूसरी किस्त मिल जाती तो इसकी छत भी लगवा लेती।
मंगलवार को निदेशालय में मीटिंग है, वहां पर इस संदर्भ में अधिकारियों से बात करेंगे। यूसी मांगा गया था, जिसे काफी समय पूर्व ही भेज दिया गया है।
नरेंद्र सैनी, नपा सचिव, झज्जर।
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झज्जर। शहर को ओडीएफ घोषित करवाने की चाहत में नगरपालिका अधिकारियों ने वर्ष 2017 में घर-घर जाकर टॉयलेट बनाने के लिए ग्रांट बांटी। लेकिन जैसे ही शहर ओडीएफ घोषित हुआ तो अधिकारियों ने पलट कर नहीं देखा कि टॉयलेट की दूसरी किस्त कितने परिवारों तक अभी नहीं पहुुंची है। ओडीएफ की चाहत में जो रकम खर्च किया गया था, निदेशालय ने उससे संबंधित यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट मांगा है। जिसे नपा द्वारा काफी लेट जमा करवाया गया। इसके कारण यह ग्रांट अटकी हुई है। इसके बाद नगरपालिका के अधिकारी इस ग्रांट के लिए निदेशालय से संपर्क करना ही भूल गए हैं।
वहीं, डेढ़ साल से शहर के 326 परिवारों को दूसरी किस्त का इंतजार है। इनमें से कुछ परिवारों की माली हालत तो बहुत खराब है। परिवारों में कुछ ने तो अपना टॉयलेट का निर्माण कर्ज लेकर पूरा किया है। मजदूरी करने वाले इन परिवारों के सिर से अब ये सात हजार रुपये का कर्ज नहीं उतर रहा, जिसके जिम्मेदार ये लोग नगरपालिका को ठहरा रहे हैं।
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वार्डों में परिवारों की संख्या
वार्ड संख्या
1. 14
2. 21
3. 29
4. 21
5. 28
6. 17
7. 14
8. 8
9. 10
10. 13
11. 28
12. 23
13. 34
14. 37
15. 55
16. 12
17. 06
18. 02
19. 00
कुल 326
14 हजार रुपये मिलती है सहायता राशि
टॉयलेट बनाने के लिए शहर के आमजन को 14 हजार रुपये की सहायता राशि उपलब्ध करवाई जाती है। नपा के द्वारा पहली किस्त एडवांस में तथा दूसरी किस्त टॉयलेट बनने के बाद उपलब्ध करवाई जाती है। दोनों ही किस्त के तौर पर नपा सात-सात हजार रुपये देता है। शहर में 326 लोगों के नपा के पास 22 लाख 82 हजार रुपये पेंडिंग हैं।
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ये बोले पीड़ित पारिवार
2. लोकनाथ ने बताया कि डेढ़ साल पूर्व नपा ने पहली किस्त जारी की थी। टॉयलेट निर्माण पांच दिन में हो गया था लेकिन नपा दूसरी किस्त के लिए अब तक चक्कर कटवा रहा है। मजदूरी करने जाते हैं, ऐसे में नपा के चक्कर नहीं काट पाते। अधिकारी बता भी नहीं रहे कि पैसा कब मिलेगा।
2. नीलम ने बताया कि टॉयलेट की छत तक वो नहीं लगवा सकी है। उसे किसी ने पैसे नहीं दिए तो वो कहां से लेकर आती। अगर दूसरी किस्त मिल जाती तो इसकी छत भी लगवा लेती।
मंगलवार को निदेशालय में मीटिंग है, वहां पर इस संदर्भ में अधिकारियों से बात करेंगे। यूसी मांगा गया था, जिसे काफी समय पूर्व ही भेज दिया गया है।
नरेंद्र सैनी, नपा सचिव, झज्जर।