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पीएएमवाई योजना के नाम पर आवेदकों के साथ हो रहा %खेल%!
Updated Tue, 30 Jan 2018 01:04 AM IST
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पीएएमवाई योजना के 1000 फार्मों में लगे ऑब्जेक्शन, आवेदकों ने काटा बवाल
चरखी दादरी।
पीएएमवाई (प्रधानमंत्री आवास योजना) के 1000 फार्मों पर लगाए आब्जेक्शनों पर आवेदकों ने जमकर बवाल काटा। आवेदकों का आरोप है कि उनके फार्मों में अनावश्यक त्रुटियां निकालकर ऑब्जेक्शन लगा दिए गए हैं और इन्हें दुरुस्त कराने के लिए महज 24 घंटे का ही समय दिया गया है। ये त्रुटियां नगर परिषद अधिकारियों के हस्ताक्षर और अन्य दस्तावेजाें से संबंधित है। जबकि 30 जनवरी त्रुटियां दुरुस्त करवाकर फार्म जमा कराने की अंतिम तिथि है। वहीं, आवेदकों का कहना है कि याशी सर्वे कंपनी के अधिकारी असस्मेंट फार्म पर नप सचिव के डिजिटल हस्ताक्षरों को भी मानने से इंकार कर रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि इस पर नप की मुहर या सचिव के मैन्युअली हस्ताक्षर होने जरूरी हैं। सोमवार को आवेदकों नप अधिकारियों व सर्वे कंपनी पर उन्हें नाजायज परेशान करने का आरोप भी लगाया। इसके चलते करीब एक घंटे तक हंगामे की स्थिति रही और फार्म की त्रुटियों को दुरुस्त कराकर जमा कराने की मंशा से पहुंचे लोग मायूस होकर वापस लौट गए।
करीब छह माह पहले याशी कंस्लटेंसी सर्वे कंपनी आवेदन फार्म जमा करने और सर्वे कर आवेदक द्वारा दी गई जानकारी की पुष्टि कर पात्र आवेदकों के फार्म आगे भेजने के लिए दादरी पहुंची थी। इस संबंध में कंपनी कर्मियों ने वार्ड पार्षदों के साथ मीटिंग कर उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना की जानकारी दी थी। शुरुआत में ही नगर परिषद अधिकारी और सर्वे कंपनी में तू-तड़ाक हो गई थी और मामला पुलिस तक जा पहुंचा था। इस दौरान नप चेयरमैन संजय छपारिया ने कंपनी के कर्मचारियों पर निशुल्क दिए जाने वाले फार्म पर दस रुपये तक आवेदक से ऐंठने का आरोप लगाया था। सर्वे कंपनी कर्मचारियों की मानें तो शहर के सभी 21 वार्डों से करीब 2100 आवेदन आए थे। सोमवार को ऑब्जेक्शन की पहली लिस्ट जारी की गई और इसमें 1000 आवेदकों के फार्म पर ऑब्जेक्शन लगाए गए। पार्षदों से सूचना पाकर आवेदक सुबह करीब साढ़े नौ बजे नप कार्यालय पहुंचे और उन्होंने आवेदनों पर लगाए ऑब्जेक्शन के संबंध में पूछताछ की तो सर्वे कंपनी के कर्मियों ने असस्मेंट फार्म पर नप सचिव संजय यादव के डिजिटल हस्ताक्षर की बजाय मैन्युअल हस्ताक्षर कराने की बात कही। जब लोग सचिव के कार्यालय में पहुंचे तो वे वहां नहीं मिले। नप कर्मचारियों ने बताया कि उनके पास लोहारू का एडिशनल चार्ज है और सोमवार को वे लोहारू नगर पालिका में गए हुए हैं। इसे बाद जब आवेदक दोबारा से सर्वे कंपनी कर्मचारियों के पास पहुंचे तो उन्होंने बताया कि 30 जनवरी त्रुटियां दुरुस्त कराकर फार्म जमा कराने की अंतिम तिथि है और अगर मैन्युअली हस्ताक्षर नहीं करवाए तो उनके फार्म रद्द हो जाएंगे। ये सुनकर आवेदकों भड़क उठे और उन्होंने नारेबाजी कर अपना रोष जताया। वहीं, कुछ आवेदक तो पीएएमवाई योजना केेे महज खिलवाड़ बताते हुए अपने दस्तावेज लेकर वापस लौट गए।
बाक्स: ये तीन कदम उपभोक्ताओं के लिए बने गले की फांस
1 अंतिम तिथि से महज एक दिन पहले लगाई लिस्ट
नप अधिकारियों की मानें तो 30 जनवरी फार्मों में लगे ऑब्जेक्शन को रिमूव कराने की अंतिम तिथि है। बिना पढ़े और जांचे वो ऑब्जेक्शन युक्त फार्मों पर हस्ताक्षर नहीं कर सकते। सोमवार को पहली ऑब्जेक्शन लिस्ट जारी हुई है और इससे पहले सर्वे कंपनी के कर्मचारियों ने उन्हें सूचना ही नहीं दी। नप सचिव ने बताया कि कंपनी को यह सूची गत 24 जनवरी को ही जारी करनी चाहिए थी ताकि लोगों को ऑब्जेक्शन रिमूव कराने के लिए पांच-छह दिन का समय मिल जाता। खुद नप अधिकारी मान रहे हैं कि इस योजना के तहत बरती गई ढिलाई से काफी आवेदकों के फार्म रद्द हो जाएंगें और इसका कारण सर्वे कंपनी के कर्मियों की लापरवाही है।
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2 प्रधानमंत्री की योजना में डिजिटलाइजेशन प्रक्रिया को मानने से इंकार
पीएएमवाई योजना में करीब 1000 आवेदनों पर ऑब्जेक्शन लगाए गए हैं। इसका कारण दस्तावेजों की कमियां बताया गया है। वहीं, ऑब्जेक्शन लगने का एक प्रमुख कारण सर्वे कंपनी के कर्मचारी असस्मेंट फार्म पर सचिव के मैन्युअल की बजाय डिजीटल हस्ताक्षर बता रहे हैं। अगर ये बात है तो फिर प्रधानमंत्री की डिजीटलाइजेशन को बढ़ावा देने के दावे प्रधानमंत्री आवास योजना से मेल खाते नजर नहीं आ रहे। नप अधिकारियों का कहना है कि अगर सर्वे कंपनी डिजीटल हस्ताक्षर पर आपत्ति जता रही है तो इस संबंध में उन्हें लिखित में दें।
3 आवेदकों से वसूली के सर्वे कंपनी कर्मियों पर आरोप
सर्वे कंपनी के कर्मचारियों और नगर परिषद अधिकारियों में शुरुआत से लेकर अब तक तालमेल नहीं बन पाया है। कई दफा चेयरमैन के साथ सर्वे कंपनी कर्मियों की झड़प भी हो चुुकी है। यहां तक कि इनका विवाद पुलिस थाने भी पहुंच चुका है। इस दौरान चेयरमैन संजय छपारिया ने कंपनी कर्मचारियों पर निशुल्क दिए जाने वाले फार्मों की एवज में दस रुपये तक वसूली करने के आरोप लगाते हुए शिकायत उच्चाधिकारियों को भी भेजी है।
आर्थिक सहायता के नाम पर आवेदकों को मिल रही मानसिक परेशानियां
--आज सुबह ही पता चला कि मेरे फार्म पर ऑब्जेक्शन लगाए गए हैं। ऑब्जेक्शन का कारण सचिव के डिजिटल कंप्यूटर हस्ताक्षर बताया है। दो घंटे से खड़ा हूं लेकिन समाधान नहीं हो रहा।
जसवंत, पीएएमवाई आवेदक
--पार्षद ने बताया कि फार्म पर ऑब्जेक्शन लगे हुए हैं। यहां आकर पता किया तो 30 जनवरी अंतिम तिथि बताई। तय समयावधि में अगर त्रुटियां ठीक कर फार्म जमा नहीं कराया तो रद्द हो जाएगा।
दीवान सिंह, पीएएमवाई आवेदक
--प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आर्थिक सहायता मिलने की उम्मीद थी। एक दिन पहले ही हमें ऑब्जेक्शन के बारे में बताया गया जोकि अधिकारी नहीं होने से रिमूव होने मुश्किल है।
सुनील, आवेदक
--प्रधानमंत्री डिजीटलाइजेशन को बढ़ावा दे रहे हैं वहीं उनके नाम से शुरू योजना में डिजीटल हस्ताक्षरों को मानने से इंकार किया जा रहा है। आवेदक परेशान हैं लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है।
प्रवीन, आवेदक
--सुबह दस बजे नगर परिषद कार्यालय आई थी और अब साढ़े 12 बज चुके हैं लेकिन काम नहीं बन पाया है। ऑब्जेक्शन तो मुझे बता दिए गए लेकिन इन्हें कैसे दूर करवाऊं इसकी जानकारी किसी ने नहीं दी।
कृष्णा, आवेदक
-- मेरे फार्म में त्रुटियां दिखाई गई हैं जबकि ये दस्तावेजों अधिकारियों व पार्षद को दिखाकर ही जमा कराए थे। त्रुटियों को दुरुस्त करने के लिए अधिकारी अपनी सीट पर ही नहीं है। क्या करे कुछ समझ नहीं आ रहा।
गीता, आवेदक
वर्जन::
अगर मेरे डिजिटल हस्ताक्षर मान्य नहीं है तो सर्वे कंपनी हमें लिखित में दे दें। एक हजार आवेदनों पर जो ऑब्जेक्शन लगाए गए हैं वो एक दिन में दुरुस्त कराना असंभव है। दस्तावेजों को पढ़ने व जांच करने में समय लग जाता है। ये लिस्ट 24 या 25 जनवरी को जारी करनी चाहिए थी।
संजय यादव, सचिव नगर परिषद
वर्जन::
करीब 2100 आवेदन हमारे पास आए थे जिनमें से करीब एक हजार पर ऑब्जेक्शन लगाए गए हैं। इसका कारण दस्तावेजों में कमी होना है। नगर परिषद का कोई भी अधिकारी मोहर मारकर आवेदक को दे सकता है।
विजय जोशी, याशी कंस्लटेंसी सर्वे कंपनी
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चरखी दादरी।
पीएएमवाई (प्रधानमंत्री आवास योजना) के 1000 फार्मों पर लगाए आब्जेक्शनों पर आवेदकों ने जमकर बवाल काटा। आवेदकों का आरोप है कि उनके फार्मों में अनावश्यक त्रुटियां निकालकर ऑब्जेक्शन लगा दिए गए हैं और इन्हें दुरुस्त कराने के लिए महज 24 घंटे का ही समय दिया गया है। ये त्रुटियां नगर परिषद अधिकारियों के हस्ताक्षर और अन्य दस्तावेजाें से संबंधित है। जबकि 30 जनवरी त्रुटियां दुरुस्त करवाकर फार्म जमा कराने की अंतिम तिथि है। वहीं, आवेदकों का कहना है कि याशी सर्वे कंपनी के अधिकारी असस्मेंट फार्म पर नप सचिव के डिजिटल हस्ताक्षरों को भी मानने से इंकार कर रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि इस पर नप की मुहर या सचिव के मैन्युअली हस्ताक्षर होने जरूरी हैं। सोमवार को आवेदकों नप अधिकारियों व सर्वे कंपनी पर उन्हें नाजायज परेशान करने का आरोप भी लगाया। इसके चलते करीब एक घंटे तक हंगामे की स्थिति रही और फार्म की त्रुटियों को दुरुस्त कराकर जमा कराने की मंशा से पहुंचे लोग मायूस होकर वापस लौट गए।
करीब छह माह पहले याशी कंस्लटेंसी सर्वे कंपनी आवेदन फार्म जमा करने और सर्वे कर आवेदक द्वारा दी गई जानकारी की पुष्टि कर पात्र आवेदकों के फार्म आगे भेजने के लिए दादरी पहुंची थी। इस संबंध में कंपनी कर्मियों ने वार्ड पार्षदों के साथ मीटिंग कर उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना की जानकारी दी थी। शुरुआत में ही नगर परिषद अधिकारी और सर्वे कंपनी में तू-तड़ाक हो गई थी और मामला पुलिस तक जा पहुंचा था। इस दौरान नप चेयरमैन संजय छपारिया ने कंपनी के कर्मचारियों पर निशुल्क दिए जाने वाले फार्म पर दस रुपये तक आवेदक से ऐंठने का आरोप लगाया था। सर्वे कंपनी कर्मचारियों की मानें तो शहर के सभी 21 वार्डों से करीब 2100 आवेदन आए थे। सोमवार को ऑब्जेक्शन की पहली लिस्ट जारी की गई और इसमें 1000 आवेदकों के फार्म पर ऑब्जेक्शन लगाए गए। पार्षदों से सूचना पाकर आवेदक सुबह करीब साढ़े नौ बजे नप कार्यालय पहुंचे और उन्होंने आवेदनों पर लगाए ऑब्जेक्शन के संबंध में पूछताछ की तो सर्वे कंपनी के कर्मियों ने असस्मेंट फार्म पर नप सचिव संजय यादव के डिजिटल हस्ताक्षर की बजाय मैन्युअल हस्ताक्षर कराने की बात कही। जब लोग सचिव के कार्यालय में पहुंचे तो वे वहां नहीं मिले। नप कर्मचारियों ने बताया कि उनके पास लोहारू का एडिशनल चार्ज है और सोमवार को वे लोहारू नगर पालिका में गए हुए हैं। इसे बाद जब आवेदक दोबारा से सर्वे कंपनी कर्मचारियों के पास पहुंचे तो उन्होंने बताया कि 30 जनवरी त्रुटियां दुरुस्त कराकर फार्म जमा कराने की अंतिम तिथि है और अगर मैन्युअली हस्ताक्षर नहीं करवाए तो उनके फार्म रद्द हो जाएंगे। ये सुनकर आवेदकों भड़क उठे और उन्होंने नारेबाजी कर अपना रोष जताया। वहीं, कुछ आवेदक तो पीएएमवाई योजना केेे महज खिलवाड़ बताते हुए अपने दस्तावेज लेकर वापस लौट गए।
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1 अंतिम तिथि से महज एक दिन पहले लगाई लिस्ट
नप अधिकारियों की मानें तो 30 जनवरी फार्मों में लगे ऑब्जेक्शन को रिमूव कराने की अंतिम तिथि है। बिना पढ़े और जांचे वो ऑब्जेक्शन युक्त फार्मों पर हस्ताक्षर नहीं कर सकते। सोमवार को पहली ऑब्जेक्शन लिस्ट जारी हुई है और इससे पहले सर्वे कंपनी के कर्मचारियों ने उन्हें सूचना ही नहीं दी। नप सचिव ने बताया कि कंपनी को यह सूची गत 24 जनवरी को ही जारी करनी चाहिए थी ताकि लोगों को ऑब्जेक्शन रिमूव कराने के लिए पांच-छह दिन का समय मिल जाता। खुद नप अधिकारी मान रहे हैं कि इस योजना के तहत बरती गई ढिलाई से काफी आवेदकों के फार्म रद्द हो जाएंगें और इसका कारण सर्वे कंपनी के कर्मियों की लापरवाही है।
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पीएएमवाई योजना में करीब 1000 आवेदनों पर ऑब्जेक्शन लगाए गए हैं। इसका कारण दस्तावेजों की कमियां बताया गया है। वहीं, ऑब्जेक्शन लगने का एक प्रमुख कारण सर्वे कंपनी के कर्मचारी असस्मेंट फार्म पर सचिव के मैन्युअल की बजाय डिजीटल हस्ताक्षर बता रहे हैं। अगर ये बात है तो फिर प्रधानमंत्री की डिजीटलाइजेशन को बढ़ावा देने के दावे प्रधानमंत्री आवास योजना से मेल खाते नजर नहीं आ रहे। नप अधिकारियों का कहना है कि अगर सर्वे कंपनी डिजीटल हस्ताक्षर पर आपत्ति जता रही है तो इस संबंध में उन्हें लिखित में दें।
3 आवेदकों से वसूली के सर्वे कंपनी कर्मियों पर आरोप
सर्वे कंपनी के कर्मचारियों और नगर परिषद अधिकारियों में शुरुआत से लेकर अब तक तालमेल नहीं बन पाया है। कई दफा चेयरमैन के साथ सर्वे कंपनी कर्मियों की झड़प भी हो चुुकी है। यहां तक कि इनका विवाद पुलिस थाने भी पहुंच चुका है। इस दौरान चेयरमैन संजय छपारिया ने कंपनी कर्मचारियों पर निशुल्क दिए जाने वाले फार्मों की एवज में दस रुपये तक वसूली करने के आरोप लगाते हुए शिकायत उच्चाधिकारियों को भी भेजी है।
आर्थिक सहायता के नाम पर आवेदकों को मिल रही मानसिक परेशानियां
--आज सुबह ही पता चला कि मेरे फार्म पर ऑब्जेक्शन लगाए गए हैं। ऑब्जेक्शन का कारण सचिव के डिजिटल कंप्यूटर हस्ताक्षर बताया है। दो घंटे से खड़ा हूं लेकिन समाधान नहीं हो रहा।
जसवंत, पीएएमवाई आवेदक
--पार्षद ने बताया कि फार्म पर ऑब्जेक्शन लगे हुए हैं। यहां आकर पता किया तो 30 जनवरी अंतिम तिथि बताई। तय समयावधि में अगर त्रुटियां ठीक कर फार्म जमा नहीं कराया तो रद्द हो जाएगा।
दीवान सिंह, पीएएमवाई आवेदक
--प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आर्थिक सहायता मिलने की उम्मीद थी। एक दिन पहले ही हमें ऑब्जेक्शन के बारे में बताया गया जोकि अधिकारी नहीं होने से रिमूव होने मुश्किल है।
सुनील, आवेदक
--प्रधानमंत्री डिजीटलाइजेशन को बढ़ावा दे रहे हैं वहीं उनके नाम से शुरू योजना में डिजीटल हस्ताक्षरों को मानने से इंकार किया जा रहा है। आवेदक परेशान हैं लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है।
प्रवीन, आवेदक
--सुबह दस बजे नगर परिषद कार्यालय आई थी और अब साढ़े 12 बज चुके हैं लेकिन काम नहीं बन पाया है। ऑब्जेक्शन तो मुझे बता दिए गए लेकिन इन्हें कैसे दूर करवाऊं इसकी जानकारी किसी ने नहीं दी।
कृष्णा, आवेदक
-- मेरे फार्म में त्रुटियां दिखाई गई हैं जबकि ये दस्तावेजों अधिकारियों व पार्षद को दिखाकर ही जमा कराए थे। त्रुटियों को दुरुस्त करने के लिए अधिकारी अपनी सीट पर ही नहीं है। क्या करे कुछ समझ नहीं आ रहा।
गीता, आवेदक
वर्जन::
अगर मेरे डिजिटल हस्ताक्षर मान्य नहीं है तो सर्वे कंपनी हमें लिखित में दे दें। एक हजार आवेदनों पर जो ऑब्जेक्शन लगाए गए हैं वो एक दिन में दुरुस्त कराना असंभव है। दस्तावेजों को पढ़ने व जांच करने में समय लग जाता है। ये लिस्ट 24 या 25 जनवरी को जारी करनी चाहिए थी।
संजय यादव, सचिव नगर परिषद
वर्जन::
करीब 2100 आवेदन हमारे पास आए थे जिनमें से करीब एक हजार पर ऑब्जेक्शन लगाए गए हैं। इसका कारण दस्तावेजों में कमी होना है। नगर परिषद का कोई भी अधिकारी मोहर मारकर आवेदक को दे सकता है।
विजय जोशी, याशी कंस्लटेंसी सर्वे कंपनी