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खाप पंचायतों का राजनीतिकरण दोधारी तलवार: डोहकी
Updated Mon, 11 Dec 2017 12:46 AM IST
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खाप पंचायतों का राजनीतिकरण दोधारी तलवार: डोहकी
अमर उजाला ब्यूरो
चरखी दादरी।
खाप पंचायतें इंसाफ के क्षेत्र में सदियों से योगदान करती आ रही हैं। इनकी बहुमूल्य मान्यताओं को प्रसिद्ध दार्शनिक अरस्तू ने भी सराहा है। जारी बयान में सांगवान खाप के पूर्व प्रवक्ता राजेंद्र सिंह डोहकी ने कहा कि खाप पंचायतें अंग्रेजी और मुगल काल में राजनीति से दूर रहीं हैं। विदेशी शासकों ने भी खाप पंचायतों की मान्यताओं में हस्तक्षेप नहीं किया है। स्वतंत्र भारत में 1956 में हिंदू मैरिज एक्ट और हिंदू उच्चाधिकारी एक्ट के बनने पर खाप पंचायतों की बहुमूल्य मान्यताओं पर गहरी चोट लगी। सबसे ज्यादा हरियाणा की जाट जाति पर इन दोनों एक्ट का दुष्प्रभाव पड़ा। इन्हीं एक्ट के कारण जाट समाज में दहेज प्रथा, भ्रूण हत्या, आनर कीलिंग, भाई- बहन के झगड़े समेत कई विकार पैदा हुए हैं। खाप अधिकारियों को भी चाहिए कि वे खाप पदाधिकारी का पद या किसी राजनैतिक दल में सक्रिय सदस्यता दोनों में से एक को ही अपनाएं।
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अमर उजाला ब्यूरो
चरखी दादरी।
खाप पंचायतें इंसाफ के क्षेत्र में सदियों से योगदान करती आ रही हैं। इनकी बहुमूल्य मान्यताओं को प्रसिद्ध दार्शनिक अरस्तू ने भी सराहा है। जारी बयान में सांगवान खाप के पूर्व प्रवक्ता राजेंद्र सिंह डोहकी ने कहा कि खाप पंचायतें अंग्रेजी और मुगल काल में राजनीति से दूर रहीं हैं। विदेशी शासकों ने भी खाप पंचायतों की मान्यताओं में हस्तक्षेप नहीं किया है। स्वतंत्र भारत में 1956 में हिंदू मैरिज एक्ट और हिंदू उच्चाधिकारी एक्ट के बनने पर खाप पंचायतों की बहुमूल्य मान्यताओं पर गहरी चोट लगी। सबसे ज्यादा हरियाणा की जाट जाति पर इन दोनों एक्ट का दुष्प्रभाव पड़ा। इन्हीं एक्ट के कारण जाट समाज में दहेज प्रथा, भ्रूण हत्या, आनर कीलिंग, भाई- बहन के झगड़े समेत कई विकार पैदा हुए हैं। खाप अधिकारियों को भी चाहिए कि वे खाप पदाधिकारी का पद या किसी राजनैतिक दल में सक्रिय सदस्यता दोनों में से एक को ही अपनाएं।