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31 तक हो सकेगा फसलों का बीमा, बीमारियां नहीं होंगी कवर
ब्यूरो/अमर उजाला झज्जर
Updated Sun, 11 Dec 2016 11:58 PM IST
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झज्जर। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत रबी की 4 फसलों को इस बार बीमा योजना में शामिल करने का निर्णय लिया गया है। इसमें गेहूं, चना, सरसों के अलावा जो भी बीमा किया जाएगा। कृषि विभाग की ओर से बीमा करवाने के लिए 31 दिसंबर को अंतिम डेट घोषित किया गया है। प्रदेश में रबी सीजन के अंतर्गत फसलों को प्राकृतिक आपदा से होने वाले नुकसान से किसानों को बचाने के लिए बीमा किया जा रहा है। फसल का प्रीमियम जिला अनुसार रखा गया है।
ये रहेगी प्रीमियम दर
गेहूं की फसल के लिए पूरे प्रदेश के सभी जिलों में एक समान प्रीमियम दर 333.86 रुपये प्रति एकड़ रखी गई है। जबकि जौ एवं चना की फसल के लिए प्रदेश के अधिकांश जिलों में बीमा प्रीमियम राशि 151.75 रुपये प्रति एकड़ रखी गई है। सरसों की फसल के लिए किसानों को 166.33 रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से देने होंगे। सरकार की ओर से गेहूं के लिए 22 हजार रुपये प्रति एकड़, चना व जौ के लिए 10 हजार रुपये प्रति एकड़ तथा सरसों के लिए 11 हजार रुपये प्रति एकड़ बीमा राशि तय की गई है।
इन्हें नहीं कराना होगा बीमा
जिन किसानों ने फसली ऋण किस बैंक से लिया है, ऐसे किसानों को अलग से किसी बैंक से बीमा करवाने की जरूरत नहीं हैं, बल्कि जिस पर जमीन पर लोन लिया है, उसका भी प्रीमियम स्वत: ही बैंक के द्वारा काट लिया जाएगा। जिन किसानों ने फसली ऋण नहीं लिया हैं, उनके द्वारा फसलों का बीमा करवाना उनकी मर्जी पर निर्भर है। ऐसे किसानों को बीमा करवाने के लिए अपने नजदीक के बैंक से संपर्क करना होगा।
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ये नहीं बीमे में कवर
बीमा में स्थानीय आपदाओं में कीट और बीमारियों से होने वाले नुकसान को शामिल नहीं किया गया है। जबकि कम वर्षा अथवा विपरीत परिस्थितियों में बिजाई न होना, स्थानीय आपदाओं ओलावृष्टि, जलभराव एवं भूस्खलन से होने वाले नुकसान को बीमे में कवर किया गया है।
ऐसे होगी भरपाई
फसल कटाई के 14 दिन में खेत में पड़ी हुई फसल का चक्रवात, चक्रवातीय वर्षा एवं बेमौसमी बारिश से हुए नुकसान की भरपाई की जाएगी। गांव में किसी फसल की औसत पैदावार पूर्व निर्धारित औसत पैदावार से कम होने का जोखिम भी शामिल होगा। किसान को खड़ी फसल में ओलावृष्टि, जलभराव व भूस्खलन से हुए नुकसान की सूचना 48 घंटे के समय में उपनिदेशक कृषि कार्यालय में देनी होगी।
वर्जन
योजना का लाभ अधिक से अधिक किसानों को मिले, इसके लिए किसानों को प्रेरित किया जा रहा है। फसल बीमा योजना किसानों के लिए कम पैसे खर्च करने रिस्क कवर करने की अच्छी योजना है। इसमें किसानों को भाग लेना चाहिए। -रोहताश कुमार, डीडीए, झज्जर।
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ये रहेगी प्रीमियम दर
गेहूं की फसल के लिए पूरे प्रदेश के सभी जिलों में एक समान प्रीमियम दर 333.86 रुपये प्रति एकड़ रखी गई है। जबकि जौ एवं चना की फसल के लिए प्रदेश के अधिकांश जिलों में बीमा प्रीमियम राशि 151.75 रुपये प्रति एकड़ रखी गई है। सरसों की फसल के लिए किसानों को 166.33 रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से देने होंगे। सरकार की ओर से गेहूं के लिए 22 हजार रुपये प्रति एकड़, चना व जौ के लिए 10 हजार रुपये प्रति एकड़ तथा सरसों के लिए 11 हजार रुपये प्रति एकड़ बीमा राशि तय की गई है।
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इन्हें नहीं कराना होगा बीमा
जिन किसानों ने फसली ऋण किस बैंक से लिया है, ऐसे किसानों को अलग से किसी बैंक से बीमा करवाने की जरूरत नहीं हैं, बल्कि जिस पर जमीन पर लोन लिया है, उसका भी प्रीमियम स्वत: ही बैंक के द्वारा काट लिया जाएगा। जिन किसानों ने फसली ऋण नहीं लिया हैं, उनके द्वारा फसलों का बीमा करवाना उनकी मर्जी पर निर्भर है। ऐसे किसानों को बीमा करवाने के लिए अपने नजदीक के बैंक से संपर्क करना होगा।
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ये नहीं बीमे में कवर
बीमा में स्थानीय आपदाओं में कीट और बीमारियों से होने वाले नुकसान को शामिल नहीं किया गया है। जबकि कम वर्षा अथवा विपरीत परिस्थितियों में बिजाई न होना, स्थानीय आपदाओं ओलावृष्टि, जलभराव एवं भूस्खलन से होने वाले नुकसान को बीमे में कवर किया गया है।
ऐसे होगी भरपाई
फसल कटाई के 14 दिन में खेत में पड़ी हुई फसल का चक्रवात, चक्रवातीय वर्षा एवं बेमौसमी बारिश से हुए नुकसान की भरपाई की जाएगी। गांव में किसी फसल की औसत पैदावार पूर्व निर्धारित औसत पैदावार से कम होने का जोखिम भी शामिल होगा। किसान को खड़ी फसल में ओलावृष्टि, जलभराव व भूस्खलन से हुए नुकसान की सूचना 48 घंटे के समय में उपनिदेशक कृषि कार्यालय में देनी होगी।
वर्जन
योजना का लाभ अधिक से अधिक किसानों को मिले, इसके लिए किसानों को प्रेरित किया जा रहा है। फसल बीमा योजना किसानों के लिए कम पैसे खर्च करने रिस्क कवर करने की अच्छी योजना है। इसमें किसानों को भाग लेना चाहिए। -रोहताश कुमार, डीडीए, झज्जर।