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एक जनवरी से बिना लाइसेंस के खाद्य सामग्री बेचने वालों पर होगी कार्रवाई, छह माह कैद और पांच लाख जुर्माने का प्रावधान
Updated Mon, 17 Dec 2018 12:48 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
चरखी दादरी। अगर आपका सामग्री बेचने का कारोबार है और अब तक फूड सेफ्टी टीम से लाइसेंस नहीं लिया तो ध्यान देने की जरूरत है। एक जनवरी से बिना लाइसेंस लिए खाद्य सामग्री बेचने वालों पर टीम शिकंजा कसेगी। इससे पहले टीम ने कारोबारियों को 15 दिन की मोहलत लाइसेंस बनवाने के लिए दी है। खाद्य पदार्थ बेचने वाले कारोबारी एफएसएस एक्ट-2006 (फूड सेफ्टी एंड स्टेंटर्ड) के तह ऑन लाइन भी लाइसेंस के लिए आवेदन कर सकते हैं और इसकी फीस कैटेगरी वाइज निर्धारित है। फूड सेफ्टी टीम के आंकड़ों अनुसार अब तक किसी ने एफएसएस एक्ट के तहत लाइसेंस नहीं बनवाया है जबकि इस दायरे में चाय का खोखा लगाने वाला भी आता है।
खाद्य सामग्री में मिलावट कर बेचने की कई शिकायतें फूड सेफ्टी टीम को जिले से मिल चुका है। ऐसे में अब टीम शहर ही नहीं ग्रामीण क्षेत्रों पर भी फोकस किए गए हुए है। मोरवाला तो ऐसा गांव है जहां प्रतिदिन काफी तादाद में खोया और मिठाइयां तैयार होती हैं और यहीं से इनकी सप्लाई का भी कुछ कारोबारी काम करते हैं। ऐसे में मोरवाला गांव पर टीम की विशेष नजर है। यहां मिलावट खोरी के अंदेशा होने पर दीवाली के समय टीम सैंपल लेने भी गई थी लेकिन उससे पहले ही संचालक अपने प्रतिष्ठानों को ताला जड़कर फरार हो गए थे। यहीं हालात बौंदकलां मार्केट में भी देखने को मिले थे। मिलावट के कारोबार पर अंकुुश लगाने के लिए विभाग ने फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड एक्ट की अनुपालना कराने का खाका तैयार किया है। इसके तहत सीएमओ विरेंद्र यादव ने फूड सेफ्टी ऑफिसर को सभी खाद्य सामग्री बेचने वालों के लाइसेंस बनाने के निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत स्पष्ट हिदायत है कि कोई अगर चाय का खोखा लगाता है तो उसका भी लाइसेंस बनाया जाएगा। हालांकि रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पर 300 से 400 रुपये का ही खर्चा आएगा। अगर किसी की 12 लाख या इससे अधिक वार्षिक आमदनी होती है तो उससे कैटेगरी के मुताबिक दो हजार या इससे अधिक की फीस ली जाएगी। फूड सेफ्टी ऑफिसर की मानें तो एक जनवरी तक विभागीय टीम इंतजार करेगी और इस समयावधि में कोई लाइसेंस बनवाने पहुंचा तो ठीक वरना एक जनवरी से व्यापक पैमाने पर अभियान चलाया जाएगा। इस दौरान न तो लाइसेंस बनवाने का समय दिया जाएगा और न ही जुर्माना माफ होगा।
भिवानी, फतेहाबाद और चरखी दादरी से लिए 190 सैंपल
फूड सेफ्टी अधिकारी सुरेंद्र पूनिया ने बताया कि उनके पास चरखी दादरी, भिवानी व फतेहाबाद तीन जिलों का चार्ज है। इन तीनों जिलों से 190 सैंपल लिए गए थे जिनमें से फरीदाबाद और भिवानी की रिपोर्ट आ चुकी है। उन्होंने बताया कि फतेहाबाद में 40 सैंपल फेल पाए गए तो वहीं, भिवानी के 24 सैंपलों में से चार फेल मिले। उन्होंने बताया कि चरखी दादरी से लिए गए 12 सैंपलों की रिपोर्ट अभी नहीं आई है। गत दिनों भी फूड सेफ्टी टीम ने शहर में छापामारी कर खाद्य सामग्री के सैंपल लिए थे। जब टीम पनीर और घी तैयार करने के एक गोदाम पर पहुंची तो संचालक के पास लाइसेंस ही नहीं मिला। उक्त संचालक ने बताया था कि उनका परिवार 30 साल से ये कारोबार कर रहा है और इसके लिए लाइसेंस भी चाहिए इसकी जानकारी उन्हें किसी ने नहीं दी। पूरे जिले की बातें करें तो ऐसा 200 से अधिक मामले हैं जो बिना लाइसेंस के ही खाद्य सामग्री तैयार करते हैं।
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रजिस्ट्रेशन करने से पहले मौका देखेगी टीम
फूड सेफ्टी अधिकारी सुरेंद्र पूनिया ने बताया कि लाइसेंस के लिए उनके पास कोई आवेदन आया तो वो उक्त फर्म का मुआयना करेंगे। इस दौरान आवेदनकर्ता को कुछ सामान्य शर्तें पूरी करनी पड़ेंगी जिसमें प्रतिष्ठान पर साफ-सफाई व मक्खी-मच्छरों से बचाव के प्रबंध अहम रहेंगे। इस दौरान अगर सब कुछ दुरुस्त मिला तो उक्त फर्म संचालक को लाइसेंस के लिए हरी झंडी दे दी जाएगी।
एफएसएस एक्ट-2006 के तहत खाद्य सामग्री तैयार करने या बेचने के लिए लाइसेंस बनवाना अनिवार्य है। एक जनवरी तक लाइसेंस बनाए जाएंगे और इसके बाद फूड सेफ्टी टीम कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ न हो इसके लिए कभी भी किसी दुकान से सैंपल लिए जा सकते हैं।
विरेंद्र यादव, सीएमओ, चरखी दादरी
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चरखी दादरी। अगर आपका सामग्री बेचने का कारोबार है और अब तक फूड सेफ्टी टीम से लाइसेंस नहीं लिया तो ध्यान देने की जरूरत है। एक जनवरी से बिना लाइसेंस लिए खाद्य सामग्री बेचने वालों पर टीम शिकंजा कसेगी। इससे पहले टीम ने कारोबारियों को 15 दिन की मोहलत लाइसेंस बनवाने के लिए दी है। खाद्य पदार्थ बेचने वाले कारोबारी एफएसएस एक्ट-2006 (फूड सेफ्टी एंड स्टेंटर्ड) के तह ऑन लाइन भी लाइसेंस के लिए आवेदन कर सकते हैं और इसकी फीस कैटेगरी वाइज निर्धारित है। फूड सेफ्टी टीम के आंकड़ों अनुसार अब तक किसी ने एफएसएस एक्ट के तहत लाइसेंस नहीं बनवाया है जबकि इस दायरे में चाय का खोखा लगाने वाला भी आता है।
खाद्य सामग्री में मिलावट कर बेचने की कई शिकायतें फूड सेफ्टी टीम को जिले से मिल चुका है। ऐसे में अब टीम शहर ही नहीं ग्रामीण क्षेत्रों पर भी फोकस किए गए हुए है। मोरवाला तो ऐसा गांव है जहां प्रतिदिन काफी तादाद में खोया और मिठाइयां तैयार होती हैं और यहीं से इनकी सप्लाई का भी कुछ कारोबारी काम करते हैं। ऐसे में मोरवाला गांव पर टीम की विशेष नजर है। यहां मिलावट खोरी के अंदेशा होने पर दीवाली के समय टीम सैंपल लेने भी गई थी लेकिन उससे पहले ही संचालक अपने प्रतिष्ठानों को ताला जड़कर फरार हो गए थे। यहीं हालात बौंदकलां मार्केट में भी देखने को मिले थे। मिलावट के कारोबार पर अंकुुश लगाने के लिए विभाग ने फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड एक्ट की अनुपालना कराने का खाका तैयार किया है। इसके तहत सीएमओ विरेंद्र यादव ने फूड सेफ्टी ऑफिसर को सभी खाद्य सामग्री बेचने वालों के लाइसेंस बनाने के निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत स्पष्ट हिदायत है कि कोई अगर चाय का खोखा लगाता है तो उसका भी लाइसेंस बनाया जाएगा। हालांकि रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पर 300 से 400 रुपये का ही खर्चा आएगा। अगर किसी की 12 लाख या इससे अधिक वार्षिक आमदनी होती है तो उससे कैटेगरी के मुताबिक दो हजार या इससे अधिक की फीस ली जाएगी। फूड सेफ्टी ऑफिसर की मानें तो एक जनवरी तक विभागीय टीम इंतजार करेगी और इस समयावधि में कोई लाइसेंस बनवाने पहुंचा तो ठीक वरना एक जनवरी से व्यापक पैमाने पर अभियान चलाया जाएगा। इस दौरान न तो लाइसेंस बनवाने का समय दिया जाएगा और न ही जुर्माना माफ होगा।
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भिवानी, फतेहाबाद और चरखी दादरी से लिए 190 सैंपल
फूड सेफ्टी अधिकारी सुरेंद्र पूनिया ने बताया कि उनके पास चरखी दादरी, भिवानी व फतेहाबाद तीन जिलों का चार्ज है। इन तीनों जिलों से 190 सैंपल लिए गए थे जिनमें से फरीदाबाद और भिवानी की रिपोर्ट आ चुकी है। उन्होंने बताया कि फतेहाबाद में 40 सैंपल फेल पाए गए तो वहीं, भिवानी के 24 सैंपलों में से चार फेल मिले। उन्होंने बताया कि चरखी दादरी से लिए गए 12 सैंपलों की रिपोर्ट अभी नहीं आई है। गत दिनों भी फूड सेफ्टी टीम ने शहर में छापामारी कर खाद्य सामग्री के सैंपल लिए थे। जब टीम पनीर और घी तैयार करने के एक गोदाम पर पहुंची तो संचालक के पास लाइसेंस ही नहीं मिला। उक्त संचालक ने बताया था कि उनका परिवार 30 साल से ये कारोबार कर रहा है और इसके लिए लाइसेंस भी चाहिए इसकी जानकारी उन्हें किसी ने नहीं दी। पूरे जिले की बातें करें तो ऐसा 200 से अधिक मामले हैं जो बिना लाइसेंस के ही खाद्य सामग्री तैयार करते हैं।
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रजिस्ट्रेशन करने से पहले मौका देखेगी टीम
फूड सेफ्टी अधिकारी सुरेंद्र पूनिया ने बताया कि लाइसेंस के लिए उनके पास कोई आवेदन आया तो वो उक्त फर्म का मुआयना करेंगे। इस दौरान आवेदनकर्ता को कुछ सामान्य शर्तें पूरी करनी पड़ेंगी जिसमें प्रतिष्ठान पर साफ-सफाई व मक्खी-मच्छरों से बचाव के प्रबंध अहम रहेंगे। इस दौरान अगर सब कुछ दुरुस्त मिला तो उक्त फर्म संचालक को लाइसेंस के लिए हरी झंडी दे दी जाएगी।
एफएसएस एक्ट-2006 के तहत खाद्य सामग्री तैयार करने या बेचने के लिए लाइसेंस बनवाना अनिवार्य है। एक जनवरी तक लाइसेंस बनाए जाएंगे और इसके बाद फूड सेफ्टी टीम कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ न हो इसके लिए कभी भी किसी दुकान से सैंपल लिए जा सकते हैं।
विरेंद्र यादव, सीएमओ, चरखी दादरी