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मातन लिंक ड्रेन ने फिर किया खेतों को पानी ही पानी
Updated Fri, 03 Nov 2017 12:54 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
बहादुरगढ़।
गांव छुड़ानी में धान के बाद अब गेहूं की बिजाई पर भी संकट आ गया है। गांव की सीमा पर खुली छोड़ी मातन लिंक ड्रेन में बुधवार वीरवार को फिर पानी आ गया। बारिश के सीजन में भी ड्रेन में पानी के कारण सैकड़ों एकड़ धान की फसल बर्बाद हो गई थी।
मातन ड्रेन छुड़ानी में हर साल धान की फसल के लिए संकट साबित पैदा करती है। लेकिन इस बार गेहूं की फसल पर भी इस ड्रेन की मार पड़ गई है। बारिश के सीजन में खेतों में आया ड्रेन का पानी अभी पूरी तरह सूख भी नहीं पाया था कि अब दोबारा वही हालात हो गए हैं। इस समय गेहूं की बिजाई का सीजन चल रहा है। अजीत सिंह, लाला, अनिल, धर्मपाल, बेलसिंह, कृष्ण व रणधीर आदि किासानों ने बताया कि उन्हें उम्मीद थी कि कुछ दिनों में पानी सूख जाएगा और खेतों की जुताई के बाद गेहूं की बिजाई कर देंगे। इसके के लिए गेहूं का बीज खरीदकर भी रख लिया।
किसानों ने बताया कि गांव के डहरी क्षेत्र में धान की फसल तो डूब ही गई थी। उम्मीद गेहूं की फसल से लगाई जा रही थी लेकिन अब जिस तरीके से पानी दोबारा आ रहा है उससे तो उनकी उम्मीदें टूट गई हैं। किसानों ने प्रशासन पर छुड़ानी गांव के किसानों के साथ भेदभाव और अनदेखी के आरोप लगाए हैं। किसानों ने प्रशासन और सरकार से मातन लिंक ड्रेन से होने वाली तबाही से छुटकारा दिलाने की मांग की है। उन्होंनेे बताया कि कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ से भी कई बार लिंक ड्रेन को केसीबी में मिलवाने की मांग की गई लेकिन उन्होंने भी समाधान नहीं कराया। हालांकि सिंचाई विभाग ने खेतों से पानी निकालकर केसीबी में डालने के लिए मोटर पंप भी लगा रखे हैं लेकिन आज तक वो पंप सेट चले ही नहीं क्योंकि विभाग ने बिजली का कनेक्शन ही नहीं करवाया। गांव के सरपंच सत्ते ने बताया कि पंचायत ने प्रस्ताव पास कर भी सरकार से लिंक ड्रेन का समाधान करने के लिए गांव के हर किसान की सहमति की लिखित अनुशंसा भी कर रखी है पर कोई सुनवाई नहीं हो रही।
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मातन लिंक ड्रेन आसपास के गांवों से बरसाती पानी निकालने के लिए करीब 40 साल पहले बनाई गई थी। छुड़ानी के डहरी क्षेत्र के पास लिंक ड्रेन को केसीबी ड्रेन में मिलाया जाना था। लेकिन सिंचाई विभाग ने लिंक ड्रेन को केसीबी में मिलाने के बजाय गांव की सीमा पर खुला छोड़ दिया। इसके कारण बरसात के दिनों में लिंक ड्रेन में आना वाला पानी किसान के खेतों में खुला बहता है और हर साल खरीफ की फसल डूब जाती है जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। लिंक ड्रेन को केसीबी में मिलाने के लिए किसानों ने चौटाला सरकार से लेकर हुड्डा सरकार और अब मनोहर सरकार से भी फरियाद की लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ है।
ग्राम पंचायत ने प्रस्ताव पास करके बीडीपीओ के मार्फत भी सरकार को भेज चुकी है। इस प्रस्ताव के जरिये किसानों ने सरकार को क्लेक्टर रेट पर 20 प्रतिशत ज्यादा मुआवजा देने की सरकार की नीति के तहत जमीन देने की बात भी कही है ताकि किसी भी तरीके से कोई समाधान निकल सके। कई बार उपमंडल प्रशासनिक अधिकारी मौके का मुआयना भी कर चुके हैं। हर बार एक फाइल बनती है और फिर वो फाइल दूसरी फाइलों के ढेर के नीचे दबकर बंद हो जाती है। उधर, एसडीएम जगनिवास ने कहा कि मामले की जांच की जाएगी। किसानों की समस्या के समाधान का प्रयास किया जाएगा।
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मातन लिंक ड्रेन ने फिर किया खेतों को पानी से लबालब
-धान के बाद अब गेहूं की बिजाई पर भी छाया संकट
-छुड़ानी गांव के डहरी क्षेत्र में सैकड़ों बीघे में भर गया पानी
-हर साल बारिश के दिनों में लिंक ड्रेन के पानी से बर्बाद हो जाती है धान की फसल
-करीब 40 सालों से किसान झेल रहे हैं पानी की मार
---फोटो 6 : मातन डे्रन से पानी आनेे के कारण खेतों में डूबी फसल।
---फोटो 7 : मातन लिंक डे्रन।
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बहादुरगढ़।
गांव छुड़ानी में धान के बाद अब गेहूं की बिजाई पर भी संकट आ गया है। गांव की सीमा पर खुली छोड़ी मातन लिंक ड्रेन में बुधवार वीरवार को फिर पानी आ गया। बारिश के सीजन में भी ड्रेन में पानी के कारण सैकड़ों एकड़ धान की फसल बर्बाद हो गई थी।
मातन ड्रेन छुड़ानी में हर साल धान की फसल के लिए संकट साबित पैदा करती है। लेकिन इस बार गेहूं की फसल पर भी इस ड्रेन की मार पड़ गई है। बारिश के सीजन में खेतों में आया ड्रेन का पानी अभी पूरी तरह सूख भी नहीं पाया था कि अब दोबारा वही हालात हो गए हैं। इस समय गेहूं की बिजाई का सीजन चल रहा है। अजीत सिंह, लाला, अनिल, धर्मपाल, बेलसिंह, कृष्ण व रणधीर आदि किासानों ने बताया कि उन्हें उम्मीद थी कि कुछ दिनों में पानी सूख जाएगा और खेतों की जुताई के बाद गेहूं की बिजाई कर देंगे। इसके के लिए गेहूं का बीज खरीदकर भी रख लिया।
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किसानों ने बताया कि गांव के डहरी क्षेत्र में धान की फसल तो डूब ही गई थी। उम्मीद गेहूं की फसल से लगाई जा रही थी लेकिन अब जिस तरीके से पानी दोबारा आ रहा है उससे तो उनकी उम्मीदें टूट गई हैं। किसानों ने प्रशासन पर छुड़ानी गांव के किसानों के साथ भेदभाव और अनदेखी के आरोप लगाए हैं। किसानों ने प्रशासन और सरकार से मातन लिंक ड्रेन से होने वाली तबाही से छुटकारा दिलाने की मांग की है। उन्होंनेे बताया कि कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ से भी कई बार लिंक ड्रेन को केसीबी में मिलवाने की मांग की गई लेकिन उन्होंने भी समाधान नहीं कराया। हालांकि सिंचाई विभाग ने खेतों से पानी निकालकर केसीबी में डालने के लिए मोटर पंप भी लगा रखे हैं लेकिन आज तक वो पंप सेट चले ही नहीं क्योंकि विभाग ने बिजली का कनेक्शन ही नहीं करवाया। गांव के सरपंच सत्ते ने बताया कि पंचायत ने प्रस्ताव पास कर भी सरकार से लिंक ड्रेन का समाधान करने के लिए गांव के हर किसान की सहमति की लिखित अनुशंसा भी कर रखी है पर कोई सुनवाई नहीं हो रही।
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मातन लिंक ड्रेन आसपास के गांवों से बरसाती पानी निकालने के लिए करीब 40 साल पहले बनाई गई थी। छुड़ानी के डहरी क्षेत्र के पास लिंक ड्रेन को केसीबी ड्रेन में मिलाया जाना था। लेकिन सिंचाई विभाग ने लिंक ड्रेन को केसीबी में मिलाने के बजाय गांव की सीमा पर खुला छोड़ दिया। इसके कारण बरसात के दिनों में लिंक ड्रेन में आना वाला पानी किसान के खेतों में खुला बहता है और हर साल खरीफ की फसल डूब जाती है जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। लिंक ड्रेन को केसीबी में मिलाने के लिए किसानों ने चौटाला सरकार से लेकर हुड्डा सरकार और अब मनोहर सरकार से भी फरियाद की लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ है।
ग्राम पंचायत ने प्रस्ताव पास करके बीडीपीओ के मार्फत भी सरकार को भेज चुकी है। इस प्रस्ताव के जरिये किसानों ने सरकार को क्लेक्टर रेट पर 20 प्रतिशत ज्यादा मुआवजा देने की सरकार की नीति के तहत जमीन देने की बात भी कही है ताकि किसी भी तरीके से कोई समाधान निकल सके। कई बार उपमंडल प्रशासनिक अधिकारी मौके का मुआयना भी कर चुके हैं। हर बार एक फाइल बनती है और फिर वो फाइल दूसरी फाइलों के ढेर के नीचे दबकर बंद हो जाती है। उधर, एसडीएम जगनिवास ने कहा कि मामले की जांच की जाएगी। किसानों की समस्या के समाधान का प्रयास किया जाएगा।
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मातन लिंक ड्रेन ने फिर किया खेतों को पानी से लबालब
-धान के बाद अब गेहूं की बिजाई पर भी छाया संकट
-छुड़ानी गांव के डहरी क्षेत्र में सैकड़ों बीघे में भर गया पानी
-हर साल बारिश के दिनों में लिंक ड्रेन के पानी से बर्बाद हो जाती है धान की फसल
-करीब 40 सालों से किसान झेल रहे हैं पानी की मार
---फोटो 6 : मातन डे्रन से पानी आनेे के कारण खेतों में डूबी फसल।
---फोटो 7 : मातन लिंक डे्रन।
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