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बंदर पकड़ो अभियान: नप के पिंजरे में फिर नहीं फंसा ठेकेदार
Updated Tue, 24 Oct 2017 12:19 AM IST
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बंदर पकड़ो अभियान: नप के पिंजरे में फिर नहीं फंसा ठेकेदार
चरखी दादरी। शहर में बंदर पकड़ो अभियान शुरू कराना नगर परिषद के लिए चुनौती बनता जा रहा है। अभियान शुरू कराने के लिए बार-बार टेंडर लगाने के बावजूद भी योजना सिरे नहीं चढ़ पा रही है। गत 10 अक्तूबर को टेंडर लगाने पर शहरवासियों को बंदरों से निजात मिलने की उम्मीद जगी थी लेकिन किसी भी एजेंसी के आवेदन नहीं करने से यह टेंडर प्रक्रिया भी फ्लॉप हो गई। नप अधिकारियों ने बंदर पकड़ने से लेकर इन्हें कालेसर जंगल में छोड़ने तक की प्लानिंग तैयार कर रखी थी लेकिन ठेकेदार न मिलने से यह धराशाही हो गई।
पिछले तीन साल से नगर परिषद बंदर पकड़ो अभियान चलाकर लोगों को राहत देने योजना बना रही है लेकिन किसी ठेकेदार के दिलचस्पी नहीं लेने से यह योजना सिरे नहीं चढ़ पा रही। इन तीन सालों में नगर परिषद ने छह-सात बार टेंडर लगाए लेकिन केवल एक बार ही 20 नवंबर 2015 को ओपन हुए टेंडर में उत्तर प्रदेश के एक ठेकेदार ने आवेदन कर 390 रुपये प्रति बंदर पकड़ने पर सहमति जताई थी। इस पर नप अधिकारियों ने टेंडर अलॉटमेंट कर शहर में अभियान शुरू कराया था। अभियान के तहत करीब 70 से 80 बंदर पकड़े भी गए थे लेकिन इसके बाद ठेकेदार कांट्रेक्ट को अधर में लटका कर चला गया। गत दिसंबर माह से लेकर अब तक नगर परिषद तीन बार टेंडर लगा चुकी है लेकिन अब तक नप के पिंजरे में कोई ठेकेदार नहीं फंसा है। नप सचिव ने बताया कि अगर कोई ठेकेदार आवेदन कर पिछले टेंडर से अधिक रेट प्रति बंदर पकड़ने पर लेता है तो वो डीसी विजय सिद्प्पा से अनुमति लेकर यह प्लानिंग सिरे चढ़ा देंगे।
नप अधिकारियों ने पहले चरण में 500 बंदर पकड़वाने की योजना तैयार करते हुए गत 10 अक्तूबर को टेंडर लगाए थे लेकिन इस बार टेंडर ओपन होने पर भी बात सिरे नहीं चढ़ पाई। वहीं, नप प्रधान संजय छपारिया ने पार्षदों की तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर बंदरों से निजात दिलाने की जिम्मेवारी सौंपी थी लेकिन यह कमेटी भी अभियान शुरू कराने में अब तक नाकाम रही है।
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ये टेंडर अब तक जा चुके हैं खाली
नगर परिषद सूत्रों ने बताया कि गत नौ दिसंबर को नगर परिषद ने 300 बंदर पकड़ने की योजना तैयार कर टेंडर लगाए थे। ये टेंडर गत 16 दिसंबर को ओपन हुए लेकिन किसी ठेकेदार ने आवेदन नहीं किया। इसके बाद नगर परिषद ने गत 17 दिसंबर हो ही दोबारा से टेंडर लगाए और ये टेंडर गत 27 दिसंबर को आपेन हुए थे लेकिन इस बार भी किसी ठेकेदार ने इसमें रुचि नहीं ली। हाल ही में नगर परिषद ने गत 10 अक्तूबर को तीसरी दफा टेंडर लगाए थे लेकिन इस बार भी स्थिति पहले जैसी ही रही।
हम तीन बार टेंडर लगा चुके हैं लेकिन एक ठेकेदार भी आवेदन नहीं कर रहा है। अगर कोई ठेकेदार प्लानिंग से ज्यादा रेट भी मांगता है तो डीसी से इसकी अनुमति लेकर अहम अभियान शुरू कराने का प्रयास करेंगे। जल्द ही एक बार और हम टेंडर लगाएंगें। वैसे भी ठेकेदार की तलाश हम कर रहे हैं।
- संजय यादव, सचिव नगर परिषद
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चरखी दादरी। शहर में बंदर पकड़ो अभियान शुरू कराना नगर परिषद के लिए चुनौती बनता जा रहा है। अभियान शुरू कराने के लिए बार-बार टेंडर लगाने के बावजूद भी योजना सिरे नहीं चढ़ पा रही है। गत 10 अक्तूबर को टेंडर लगाने पर शहरवासियों को बंदरों से निजात मिलने की उम्मीद जगी थी लेकिन किसी भी एजेंसी के आवेदन नहीं करने से यह टेंडर प्रक्रिया भी फ्लॉप हो गई। नप अधिकारियों ने बंदर पकड़ने से लेकर इन्हें कालेसर जंगल में छोड़ने तक की प्लानिंग तैयार कर रखी थी लेकिन ठेकेदार न मिलने से यह धराशाही हो गई।
पिछले तीन साल से नगर परिषद बंदर पकड़ो अभियान चलाकर लोगों को राहत देने योजना बना रही है लेकिन किसी ठेकेदार के दिलचस्पी नहीं लेने से यह योजना सिरे नहीं चढ़ पा रही। इन तीन सालों में नगर परिषद ने छह-सात बार टेंडर लगाए लेकिन केवल एक बार ही 20 नवंबर 2015 को ओपन हुए टेंडर में उत्तर प्रदेश के एक ठेकेदार ने आवेदन कर 390 रुपये प्रति बंदर पकड़ने पर सहमति जताई थी। इस पर नप अधिकारियों ने टेंडर अलॉटमेंट कर शहर में अभियान शुरू कराया था। अभियान के तहत करीब 70 से 80 बंदर पकड़े भी गए थे लेकिन इसके बाद ठेकेदार कांट्रेक्ट को अधर में लटका कर चला गया। गत दिसंबर माह से लेकर अब तक नगर परिषद तीन बार टेंडर लगा चुकी है लेकिन अब तक नप के पिंजरे में कोई ठेकेदार नहीं फंसा है। नप सचिव ने बताया कि अगर कोई ठेकेदार आवेदन कर पिछले टेंडर से अधिक रेट प्रति बंदर पकड़ने पर लेता है तो वो डीसी विजय सिद्प्पा से अनुमति लेकर यह प्लानिंग सिरे चढ़ा देंगे।
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नप अधिकारियों ने पहले चरण में 500 बंदर पकड़वाने की योजना तैयार करते हुए गत 10 अक्तूबर को टेंडर लगाए थे लेकिन इस बार टेंडर ओपन होने पर भी बात सिरे नहीं चढ़ पाई। वहीं, नप प्रधान संजय छपारिया ने पार्षदों की तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर बंदरों से निजात दिलाने की जिम्मेवारी सौंपी थी लेकिन यह कमेटी भी अभियान शुरू कराने में अब तक नाकाम रही है।
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ये टेंडर अब तक जा चुके हैं खाली
नगर परिषद सूत्रों ने बताया कि गत नौ दिसंबर को नगर परिषद ने 300 बंदर पकड़ने की योजना तैयार कर टेंडर लगाए थे। ये टेंडर गत 16 दिसंबर को ओपन हुए लेकिन किसी ठेकेदार ने आवेदन नहीं किया। इसके बाद नगर परिषद ने गत 17 दिसंबर हो ही दोबारा से टेंडर लगाए और ये टेंडर गत 27 दिसंबर को आपेन हुए थे लेकिन इस बार भी किसी ठेकेदार ने इसमें रुचि नहीं ली। हाल ही में नगर परिषद ने गत 10 अक्तूबर को तीसरी दफा टेंडर लगाए थे लेकिन इस बार भी स्थिति पहले जैसी ही रही।
हम तीन बार टेंडर लगा चुके हैं लेकिन एक ठेकेदार भी आवेदन नहीं कर रहा है। अगर कोई ठेकेदार प्लानिंग से ज्यादा रेट भी मांगता है तो डीसी से इसकी अनुमति लेकर अहम अभियान शुरू कराने का प्रयास करेंगे। जल्द ही एक बार और हम टेंडर लगाएंगें। वैसे भी ठेकेदार की तलाश हम कर रहे हैं।
- संजय यादव, सचिव नगर परिषद