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नंदीशाला में गोवंश को नहीं रखने पर गोभक्तों ने किया हंगामा

Wed, 11 Oct 2017 12:07 AM IST
Updated Wed, 11 Oct 2017 12:07 AM IST
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नंदीशाला में गोवंश को नहीं रखने पर गोभक्तों ने किया हंगामा
नंदीशाला में गोवंश को नहीं रखने पर गोभक्तों ने किया हंगामा
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चरखी दादरी। अग्रसेन धर्मशाला के सामने नगर परिषद द्वारा बनाई गई नंदीशाला में मंगलवार सुबह सांड छोड़ने को लेकर हाईटेक ड्रामा हुआ। नप कर्मचारियों ने गांव से पकड़कर शहर में सांड लाने का तर्क देते हुए नंदीशाला में रखने से इनकार कर दिया। इसके बाद तो स्थिति तनावपूर्ण हो गई और गोभक्तों और नप कर्मचारियों में जमकर बहस हुई। करीब डेढ़ घंटे तक चले ड्रामे के बाद आखिरकार नप अधिकारियों ने सांड को नंदीशाला में एंट्री दी। इससे पहले अभियान में सहयोग करने वाले गोभक्तों ने नप कर्मियों के रवैये से खफा होकर जमकर नारेबाजी भी की।
सोमवार रात कुछ गोभक्त लावारिस सांड़ों को पकड़कर नंदीशाला में छोड़ने के लिए लाए थे लेकिन यहां तैनात कर्मचारियों ने इन्हें नंदीशाला में लेने से इनकार कर दिया। इसके बाद मंगलवार सुबह कुछ गोभक्त दोबारा से लावारिस सांडों को पकड़कर नंदीशाला पहुंचे। सुबह करीब साढ़े सात बजे ज्यों की गोभक्तों ने नंदीशाला में इन सांडों के लेने की बात कही, वहां तैनात कर्मचारियों ने मना कर दिया। जब लोगों ने इसका कारण पूछा तो उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र के पशुओं को नंदीशाला में न रखने के आदेश डीसी विजय कुमार सिद्प्पा ने जारी कर रखे हैं। अगर इन सांडों को यहां रखवाना है तो इसके लिए डीसी से अनुमति लेकर देनी होगी। नप कर्मियों के इस तर्क से गोभक्तों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने नंदीशाला के सामने ही बवाल काटना शुरू कर दिया। गोभक्तों के नारेबाजी शुरू करते ही नप कर्मियों ने इसकी सूचना उच्चाधिकारियों को दी। इसके तुुरंत बाद सेनेटरी इंस्पेक्टर विजय शर्मा मौके पर पहुंचे और उन्होंने बातचीत के बाद पकड़े गए सांडों को नंदीशाला में एंट्री दे दी। इसके बाद जाकर मामला शांत हुआ और गोभक्त वापस लौट गए।
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डेडलाइन समाप्त फिर भी सड़कों पर घूम रहे लावारिस पशु
जिला उपायुक्त द्वारा नंदीशाला में चारा-पानी का प्रबंध करने की ड्यूटियां लगाने के बाद अब कुछ विभाग अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं। सूत्रों की मानें तो मार्केटिंग बोर्ड के अधिकारियों की जितना पशुचारा पहुंचाने की डीसी ने जिम्मेदारी लगाई थी उससे आधा चारा ही नंदीशाला में पहुंच रहा है। डीसी विजय कुमार सिद्प्पा पशु पालन विभाग और नगर परिषद को बार-बार आदेश देने के बाद भी शहर पूर्णतया कैटल फ्री नहीं हो पाया है। जिला उपायुक्त अधिकारियों को तीन दफा डेडलाइन दे चुके हैं। अंतिम डेडलाइन 28 सितंबर दी जिसे पूरी हुए करीब दो सप्ताह का समय बीत चुका है लेकिन अभी भी शहर की सड़कों पर लावारिस गोवंश घूम रहे हैं।
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डीसी के पास सरकार के स्पष्ट आदेश आए हैं कि अगर कोई कर्मचारी या अधिकारी इसमें ढिलाई बरतता है तो उसके खिलाफ तुरंत प्रभाव से कार्रवाई अमल में लाई जाए। इसके बावजूद नप अधिकारी व पशु पालन विभाग अधिकारी शहर को पूर्णतया कैटल फ्री बनाने में अब तक कामयाब नहीं हो पाए हैं।
टैग लगे पशु नंदीशाला से निकल रहे बाहर
शहर में बनाई गई एकमात्र नंदीशाला में अब तक 450 से अधिक लावारिस पकड़कर छोड़े जा चुके हैं। इन पशुओं की टैगिंग का काम भी पशु पालन विभाग साथ-साथ कर रहा है। ताजा आंकड़ों के अनुसार 450 में से करीब 380 पशुओं की टैगिंग की जा चुकी है। इतने बड़े पैमाने पर अभियान चलाने के बावजूद टैग लगे पशु सड़कों पर घूमते नजर आ रहे हैं।
जिले में पकड़े गए हैं 4612 लावारिस गोवंश
डीसी ने जिले को कैटल फ्री बनाने के लिए करीब डेढ़ माह पूर्व पशु पालन विभाग, पंचायत विभाग व नगर परिषद अधिकारियों की बैठक ली थी। बैठक में पशु पालन विभाग ने बताया था कि शहर में लावारिस गोवंश की तादाद में 4200 से अधिक है। इसके बाद चलाए गए अभियान के दौरान अब तक जिले में 3612 पशु पकड़े गए हैं। गत 28 सितंबर की डेडलाइन तक अटेला नंदीशाला में 350, शीशवाला नंदीशाला में 120, कलियाणा नंदीशाला में 170 पशु पकड़कर छोड़े जा चुके हैं। वहीं, शहर स्थित एकमात्र नंदीशाला में अब तक 450 लावारिस गोवंश पकड़े गए हैं।
नंदीशाला में कम पहुंच रहा चारा
डीसी ने नंदीशाला में प्रतिदिन एक ट्राली चारा पहुंचाने की जिम्मेदारी मार्केटिंग बोर्ड अधिकारियों को सौंपी थी। अब अगर नप सूत्रों की मानें तो कुछ दिन तो मार्केटिंग बोर्ड अधिकारियों ने प्रतिदिन 10 क्विंटल चारा नंदीशाला में पहुंचाया लेकिन पिछले पांच रोज से महज पांच क्विंटल चारा ही पहुंचाया जा रहा है। इससे गोवंशों के लिए सही मात्रा में चारा का प्रबंध नहीं हो पा रहा है।

मैंने इस विषय में सेनेटरी इंस्पेक्टर से पूछताछ की तो उसने बताया कि यह पशु शहर के बाहर से पकड़कर लाए गए थे। नगर परिषद अपने अधीनस्थ क्षेत्र के ही पशु नंदीशाला में रखेगी। चारे के प्रबंध में कुछ समस्याएं हमें आ रही हैं और हम इनके समाधान के लिए प्रयासरत है। अगर नंदीशाला से गोवंश बाहर निकल रहे हैं तो मामले की जांच करेंगे और जिस कर्मचारी की लापरवाही सामने आई उस पर कार्रवाई करेंगे।


संजय यादव, सचिव नगर परिषद
सोमवार रात करीब एक बजे लावारिस गोवंश को नंदीशाला में गोभक्त छोड़ने गए थे लेकिन वहां तैनात कर्मचारियों ने इन्हें लेने से इनकार कर दिया। मंगलवार सुबह करीब साढ़े सात बजे जब दोबारा से इन्हें छोड़ने पहुंचे तो भी नगर परिषद कर्मचारियों ने ये ही तर्क दिया। इससे खफा होकर ही गोभक्तों ने नारेबाजी की। नप कर्मचारी ही नंदीशाला से मौका पाकर पशुओं को बाहर निकाल रहे हैं।
रिंपी फौगाट, गोसेवक
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