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राजकीय अुनसूचित जाति अध्यापक संघ ने भी दी सरकार को चेतावनी
Updated Sun, 21 Oct 2018 12:37 AM IST
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चरखी दादरी। रोडवेज कर्मचारियों की हड़ताल के समर्थन में आए हरियाणा अनुसूचित जाति राजकीय अध्यापक संघ प्रदेश सह कोषाध्यक्ष जसवंत कलियाणा ने कहा कि हरियाणा सरकार कर्मचारियों से बातचीत का रास्ता न अपना कर दमनकारी नीतियों पर चल रही है।
रोडवेज को उद्योगपतियों के हाथों में सौंपने के कदम से प्रदेश सरकार ने फिर साबित कर दिया है कि सरकार की नीतियां पिछले चार वर्षों में अनुसूचित जाति वर्ग विरोधी, कर्मचारी विरोधी और निजीकरण पर आधारित रही हैं। हरियाणा सरकार कर्मचारियों के हितों की बात न कर जायज मांगों के लिए किए आंदोलन को कुचलकर गैर लोकतांत्रिक हथकंडे अपना रही है। सरकार निजीकरण के माध्यम से आरक्षित वर्ग के हितों के साथ भी कुठाराघात कर रही है। जसवंत ने कहा कि आज परिवहन विभाग तो कल स्वास्थ्य विभाग का और शिक्षा विभाग का भी निजीकरण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अनुसूचित अध्यापक संघ सरकार की निजीकरण, व्यापारीकरण व कर्मचारियों की दमनकारी नीतियों की घोर निंदा करता है। जसवंत कलियाणा ने कहा कि सरकार को कर्मचारियों से बातचीत का रास्ता अपनाना चाहिए। कर्मी नेताओं पर बनाए असंवैधानिक मुकदमे वापस लेने चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर इन मांगों पर अमल नहीं किया गया तो प्रदेश के सभी विभागों के कर्मचारी वर्ग, यूनियन, संघ, संगठन, संस्थाएं एकजुट होकर सरकार की नीतियों का विरोध करेंगे। सरकार को अपनी हठधर्मिता व तानाशाही रवैये का खामियाजा आने वाले चुनाव में भुगतना पड़ेगा।
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रोडवेज को उद्योगपतियों के हाथों में सौंपने के कदम से प्रदेश सरकार ने फिर साबित कर दिया है कि सरकार की नीतियां पिछले चार वर्षों में अनुसूचित जाति वर्ग विरोधी, कर्मचारी विरोधी और निजीकरण पर आधारित रही हैं। हरियाणा सरकार कर्मचारियों के हितों की बात न कर जायज मांगों के लिए किए आंदोलन को कुचलकर गैर लोकतांत्रिक हथकंडे अपना रही है। सरकार निजीकरण के माध्यम से आरक्षित वर्ग के हितों के साथ भी कुठाराघात कर रही है। जसवंत ने कहा कि आज परिवहन विभाग तो कल स्वास्थ्य विभाग का और शिक्षा विभाग का भी निजीकरण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अनुसूचित अध्यापक संघ सरकार की निजीकरण, व्यापारीकरण व कर्मचारियों की दमनकारी नीतियों की घोर निंदा करता है। जसवंत कलियाणा ने कहा कि सरकार को कर्मचारियों से बातचीत का रास्ता अपनाना चाहिए। कर्मी नेताओं पर बनाए असंवैधानिक मुकदमे वापस लेने चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर इन मांगों पर अमल नहीं किया गया तो प्रदेश के सभी विभागों के कर्मचारी वर्ग, यूनियन, संघ, संगठन, संस्थाएं एकजुट होकर सरकार की नीतियों का विरोध करेंगे। सरकार को अपनी हठधर्मिता व तानाशाही रवैये का खामियाजा आने वाले चुनाव में भुगतना पड़ेगा।
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