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आखिर क्यों नहीं आ रही ड्रेन की पैमाइश की रिपोर्ट सामने
Updated Fri, 18 Aug 2017 12:46 AM IST
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अमर अजाला ब्यूरो
बहादुरगढ़।
आखिर क्यों नहीं आ रही ड्रेन की पैमाइश की रिपोर्ट सामने! जी हां, ड्रेन की दोबारा से पैमाइश पूरे हुए दो सप्ताह से अधिक हो गए हैं। अभी तक रिपोर्ट प्रशासन की ओर से नगर परिषद को नहीं सौंपी गई है। इससे ड्रेन का प्रोजेक्ट काफी धीमी गति चल ररहा है जबकि इस प्रोजेक्ट के लिए शहरवासी प्रशासन का हर संभव सहयोग करने के लिए तैयार हैं। मगर प्रशासन की तरफ से ही इसमें ढिलाई बरती जा रही है। क्या प्रशासन राजनीतिक लोगों के दबाव में आकर तो यह काम ढीला नहीं छोड़ रहा है। इससे यह भी संभावना व्यक्त की जा रही है कि क्या ड्रेन का प्रोजेक्ट पूरा होगा या नहीं, इस पर भी संशय के बादल छाये हुए हैं।
दरअसल, सांखोल से लेकर सेक्टर-9 मोड़ तक वेस्ट जुआ ड्रेन पर सड़क बनाने की योजना है। इसके अलावा अन्य प्रोजेक्ट भी तैयार किया गया है। इस कार्य में 67 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। ड्रेन पर मैनुअल तरीके से पूर्व में की गई पैमाइश के दौरान करीब 350 कब्जे सामने आए थे। अब 15 दिन पहले इस ड्रेन की पैमाइश का कार्य दोबारा से करवाया गया। इसमें ड्रेन पर कब्जाधारियों की संख्या बढ़ने की संभावना है। साथ ही पैमाइश में भी सरकारी जमीन पर कब्जे का दायरा काफी बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
इस कारण हुई थी दोबारा से ड्रेन की पैमाइश
बता दें कि ड्रेन पर दोबारा पैमाइश का कारण पिछले दिनों पावर हाउस के नजदीक से नगर परिषद व प्रशासन ने पुलिस की मदद से कब्जों को तोड़ने की कार्रवाई शुरू की थी। यहां प्रशासन पर भेदभाव से काम करने का आरोप लगा था। एक पक्ष के लोगों ने भाजपा नेता एवं नगर परिषद के पूर्व वाइस चेयरमैन के अवैध कब्जों को न तोड़ने का आरोप नगर परिषद एमई रमेश शर्मा पर लगाया था। काफी बवाल हुआ। इसके बाद दोबारा से पैमाइश कराई गई। अबकी बार पैमाइश जीपीएस सब टोटल मशीन के माध्यम से कराई गई है। इसमें अवैध कब्जों का दायरा बढ़ने की संभावना है और कब्जाधारियों की संख्या भी बढ़ने की उम्मीद है। इस पैमाइश के बाद उन लोगों के होश उड़े हुए हैं जिन्होंने सरकारी जमीन पर कब्जा किया हुआ है और पहले के मुकाबले उनका कब्जा अधिक है।
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कहीं भाजपा नेताओं को लाभ देने के लिए तो नहीं की जा रही देरी
पैमाइश की रिपोर्ट दो सप्ताह में न आना भी लोगों के गले नहीं उतर रहा है। हर तरफ चर्चा है कि जब पैमाइश का काम चार दिनों में पूरा कर लिया गया था तो पैमाइश की रिपोर्ट आने में देरी क्यों की जा रही है। ऐसे में यह साफ पता चलता है कि यह सब भाजपा नेताओं को फायदा पहुंचाने के लिए किया जा रहा है। पैमाइश का काम पूरा हुए दो सप्ताह से अधिक समय बीत गया है। उधर नगर परिषद के अधिकारी यह कह रहे हैं कि जब तक उनके पास रिपोर्ट नहीं आती, उससे पहले वे कुछ नहीं कर सकते।
क्या कहते हैं नप एमई
नगर परिषद के एमई रमेश शर्मा का कहना है कि अभी तक उनके पास प्रशासन की तरफ से पैमाइश की रिपोर्ट नहंी भेजी गई है। पैमाइश की रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई शुरू होगी। शुरूआत में यह पता लगाया जाएगा कि पैमाइश में कोई नया नाम तो नहीं आया है या फिर पैमाइश का दायरा बढ़ा तो नहीं है। यदि कोई नया नाम होगा या फिर पैमाइश का दायरा बढ़ेगा तो नगर परि षद की तरफ से उन लोगों को नोटिस दिए जाएंगे। जोकि सात दिन के होंगे। नोटिस के माध्यम से लोगों को स्वयं अपने कब्जे तोड़ने के लिए कहा जाएगा। यदि लोग सरकारी जमीन से कब्जा नहीं हटाते हैं तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। इसके बाद पुलिस प्रशासन की मदद से लोगों के कब्जे तोड़ने का काम शुरू कर दिया जाएगा।
क्या कहते हैं एसडीएम
एसडीएम जगनिवास का इस संबंध में कहना है कि रिपोर्ट तैयार करने में समय किस कारण लग रहा है। इस बारे में कनिष्ठ अधिकारियों से जानकारी मांगी जाएगी। साथ ही पैमाइश की रिपोर्ट आने के बाद प्रशासन की तरफ से अवैध कब्जों को तोड़ा जाएगा। इसमें प्रशासन की तरफ से किसी तरह का कोई भेदभाव नहीं किया जाएगा।
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---फोटो 1 : शहर के बीचोंबीच से गुजर रही ड्रेन।
ड्रेन की पैमाइश रिपोर्ट नहीं आने से प्रशासन पर सवालिया निशान
-कहीं प्रशासन भाजपा नेताओं को लाभ देने के तो ऐसा नहीं कर रहे
-चार दिनों में पैमाइश का काम हुआ था पूरा, रिपोर्ट आने में क्यों लग रहा है इतना समय
-क्या ड्रेन का प्रोजेक्ट पूरा होगा या नहीं, इस पर छाये हैं संशय के बादल
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बहादुरगढ़।
आखिर क्यों नहीं आ रही ड्रेन की पैमाइश की रिपोर्ट सामने! जी हां, ड्रेन की दोबारा से पैमाइश पूरे हुए दो सप्ताह से अधिक हो गए हैं। अभी तक रिपोर्ट प्रशासन की ओर से नगर परिषद को नहीं सौंपी गई है। इससे ड्रेन का प्रोजेक्ट काफी धीमी गति चल ररहा है जबकि इस प्रोजेक्ट के लिए शहरवासी प्रशासन का हर संभव सहयोग करने के लिए तैयार हैं। मगर प्रशासन की तरफ से ही इसमें ढिलाई बरती जा रही है। क्या प्रशासन राजनीतिक लोगों के दबाव में आकर तो यह काम ढीला नहीं छोड़ रहा है। इससे यह भी संभावना व्यक्त की जा रही है कि क्या ड्रेन का प्रोजेक्ट पूरा होगा या नहीं, इस पर भी संशय के बादल छाये हुए हैं।
दरअसल, सांखोल से लेकर सेक्टर-9 मोड़ तक वेस्ट जुआ ड्रेन पर सड़क बनाने की योजना है। इसके अलावा अन्य प्रोजेक्ट भी तैयार किया गया है। इस कार्य में 67 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। ड्रेन पर मैनुअल तरीके से पूर्व में की गई पैमाइश के दौरान करीब 350 कब्जे सामने आए थे। अब 15 दिन पहले इस ड्रेन की पैमाइश का कार्य दोबारा से करवाया गया। इसमें ड्रेन पर कब्जाधारियों की संख्या बढ़ने की संभावना है। साथ ही पैमाइश में भी सरकारी जमीन पर कब्जे का दायरा काफी बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
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इस कारण हुई थी दोबारा से ड्रेन की पैमाइश
बता दें कि ड्रेन पर दोबारा पैमाइश का कारण पिछले दिनों पावर हाउस के नजदीक से नगर परिषद व प्रशासन ने पुलिस की मदद से कब्जों को तोड़ने की कार्रवाई शुरू की थी। यहां प्रशासन पर भेदभाव से काम करने का आरोप लगा था। एक पक्ष के लोगों ने भाजपा नेता एवं नगर परिषद के पूर्व वाइस चेयरमैन के अवैध कब्जों को न तोड़ने का आरोप नगर परिषद एमई रमेश शर्मा पर लगाया था। काफी बवाल हुआ। इसके बाद दोबारा से पैमाइश कराई गई। अबकी बार पैमाइश जीपीएस सब टोटल मशीन के माध्यम से कराई गई है। इसमें अवैध कब्जों का दायरा बढ़ने की संभावना है और कब्जाधारियों की संख्या भी बढ़ने की उम्मीद है। इस पैमाइश के बाद उन लोगों के होश उड़े हुए हैं जिन्होंने सरकारी जमीन पर कब्जा किया हुआ है और पहले के मुकाबले उनका कब्जा अधिक है।
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कहीं भाजपा नेताओं को लाभ देने के लिए तो नहीं की जा रही देरी
पैमाइश की रिपोर्ट दो सप्ताह में न आना भी लोगों के गले नहीं उतर रहा है। हर तरफ चर्चा है कि जब पैमाइश का काम चार दिनों में पूरा कर लिया गया था तो पैमाइश की रिपोर्ट आने में देरी क्यों की जा रही है। ऐसे में यह साफ पता चलता है कि यह सब भाजपा नेताओं को फायदा पहुंचाने के लिए किया जा रहा है। पैमाइश का काम पूरा हुए दो सप्ताह से अधिक समय बीत गया है। उधर नगर परिषद के अधिकारी यह कह रहे हैं कि जब तक उनके पास रिपोर्ट नहीं आती, उससे पहले वे कुछ नहीं कर सकते।
क्या कहते हैं नप एमई
नगर परिषद के एमई रमेश शर्मा का कहना है कि अभी तक उनके पास प्रशासन की तरफ से पैमाइश की रिपोर्ट नहंी भेजी गई है। पैमाइश की रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई शुरू होगी। शुरूआत में यह पता लगाया जाएगा कि पैमाइश में कोई नया नाम तो नहीं आया है या फिर पैमाइश का दायरा बढ़ा तो नहीं है। यदि कोई नया नाम होगा या फिर पैमाइश का दायरा बढ़ेगा तो नगर परि षद की तरफ से उन लोगों को नोटिस दिए जाएंगे। जोकि सात दिन के होंगे। नोटिस के माध्यम से लोगों को स्वयं अपने कब्जे तोड़ने के लिए कहा जाएगा। यदि लोग सरकारी जमीन से कब्जा नहीं हटाते हैं तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। इसके बाद पुलिस प्रशासन की मदद से लोगों के कब्जे तोड़ने का काम शुरू कर दिया जाएगा।
क्या कहते हैं एसडीएम
एसडीएम जगनिवास का इस संबंध में कहना है कि रिपोर्ट तैयार करने में समय किस कारण लग रहा है। इस बारे में कनिष्ठ अधिकारियों से जानकारी मांगी जाएगी। साथ ही पैमाइश की रिपोर्ट आने के बाद प्रशासन की तरफ से अवैध कब्जों को तोड़ा जाएगा। इसमें प्रशासन की तरफ से किसी तरह का कोई भेदभाव नहीं किया जाएगा।
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---फोटो 1 : शहर के बीचोंबीच से गुजर रही ड्रेन।
ड्रेन की पैमाइश रिपोर्ट नहीं आने से प्रशासन पर सवालिया निशान
-कहीं प्रशासन भाजपा नेताओं को लाभ देने के तो ऐसा नहीं कर रहे
-चार दिनों में पैमाइश का काम हुआ था पूरा, रिपोर्ट आने में क्यों लग रहा है इतना समय
-क्या ड्रेन का प्रोजेक्ट पूरा होगा या नहीं, इस पर छाये हैं संशय के बादल