{"_id":"5c101c50bdec22414a2b0223","slug":"191544559696-jhajjar-bahadurgarh-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"19 दिन से न्याय के दर-दर भटक रहा कैंसर पीड़ित, नहीं हो रही सुनवाई","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
19 दिन से न्याय के दर-दर भटक रहा कैंसर पीड़ित, नहीं हो रही सुनवाई
Updated Wed, 12 Dec 2018 01:51 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
19 दिन से न्याय के भटक रहा कैंसर पीड़ित, नहीं हो रही सुनवाई
बहादुरगढ़। प्राइवेट बस चालकों और परिचालकों की मनमानी कोई आम बात नहीं है। आए दिन किसी न किसी यात्री से झगड़ा होना प्राइवेट बस परिचालकों से आम बात हो गई है। झज्जर से दिल्ली जाने के लिए बस में बैठे कैंसर पीड़ित को प्राइवेट परिचालक ने बीच रास्ते में उतार दिया था। मामला है 23 नवंबर का। परिचालक के बर्ताव से दुखी कैंसर पीड़ित ने इसकी शिकायत बहादुरगढ़ पहुंच कर एसएस की दी थी। कैंसर पीड़ित ने बताया कि उसने इस मामले की शिकायत एडीसी कार्यालय में भी की थी, लेकिन न तो वहां से कोई फोन आया न ही कोई कार्रवाई हुई। पीड़ित ने इस मामले की शिकायत सीएम विंडों में भी की है।
यह है मामला
झज्जर से दिल्ली जाने के लिए प्राइवेट बस नंबर एचआर 63 बी 6305 में बैठे गांव काकडौली निवासी कैंसर पीड़ित राजपाल पुत्र प्रताप सिंह परिचालक ने पहले तो किराया मांगा, तो पीड़ित ने कहा कि मैं कैंसर पीड़ित हूं और दिल्ली में एम्स दिखाने के लिए जाना है। मेरे पास कैंसर पीड़ित का पास है ये देखो। पास देखते ही परिचालक बोला कि मैं कोई पास नहीं मानता है अगर सफर करना है तो किराया देना ही पड़ेगा, नहीं यही उतार दूंगा। कैंसर पीड़ित ने किराया देने में असमर्थता जताई तो परिचालक ने रास्ते में पड़ने वाले गांव दुल्हेड़ा में उतार दिया। कैंसर पीड़ित ने बताया कि वह किसी अन्य साधन की मदद से बहादुरगढ़ पहुंचा और रोडवेज स्टैंड पर स्थित कर्मचारियों को पूरी बात बताई। बस स्टैंड पर मौजूद एसकेएस के प्रधान भगवान सिंह राठी ने कैंसर पीड़ित की बात सुनकर एसएस से मिलवाया। एसएस ने पीड़ित की पूरी बात सुनी और लिखित में शिकायत देने के लिए कहा। लिखित में शिकायत देने के बाद पीड़ित को आश्वासन दिया कि इस मामले में प्राइवेट परिचालक के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई के लिए उच्चाधिकारियों को भेज दिया जाएगा।
दलबीर ने कहा एडीसी से मिलो
कैंसर पीड़ित राजपाल ने बताया कि प्राइवेट बस परिचालक के खिलाफ हुई कार्रवाई की जानकारी के लिए रोडवेज के जीएम से मिलने गए तो वहां पर दलबीर नाम के एक कर्मचारी से मुलाकात हुई। उसने उनको पूरे मामले की जानकारी दी तो उन्होंने कहा कि यह मामला प्राइवेट बस का है प्राइवेट बस पर कार्रवाई के लिए एडीसी के पास जाओ, यहां पर हम लोग केवल रोडवेज बस चालक परिचालक के खिलाफ ही कार्रवाई कर सकते हैं। अगर सरकारी बस का मामला होता तो मैं आपकी जरूर मदद कर सकता था।
विज्ञापन
नहीं मिले एडीसी, कार्यालय में दी शिकायत
कैंसर पीड़ित ने कहा कि जब वह अपनी शिकायत लेकर एडीसी कार्यालय पहुंचे तो वहां पर एडीसी साहब नहीं मिले थे। वहां मौजूद कर्मचारी ने मेरी शिकायत ले ली थी और कहा था कि साहब के आने पर उनको दे दी जाएगी। लेकिन अभी तक न तो उस पर कोई कार्रवाई की गई है और न ही मेरे पास कोई फोन आया है। मामले की जानकारी के लिए जब एडीसी से फोन पर संपर्क करने की कोशिश की गई तो उनका फोन मिला। व्हाट्सएप कॉल करने पर उन्होंने फोन कट कर दिया।
विज्ञापन
बहादुरगढ़। प्राइवेट बस चालकों और परिचालकों की मनमानी कोई आम बात नहीं है। आए दिन किसी न किसी यात्री से झगड़ा होना प्राइवेट बस परिचालकों से आम बात हो गई है। झज्जर से दिल्ली जाने के लिए बस में बैठे कैंसर पीड़ित को प्राइवेट परिचालक ने बीच रास्ते में उतार दिया था। मामला है 23 नवंबर का। परिचालक के बर्ताव से दुखी कैंसर पीड़ित ने इसकी शिकायत बहादुरगढ़ पहुंच कर एसएस की दी थी। कैंसर पीड़ित ने बताया कि उसने इस मामले की शिकायत एडीसी कार्यालय में भी की थी, लेकिन न तो वहां से कोई फोन आया न ही कोई कार्रवाई हुई। पीड़ित ने इस मामले की शिकायत सीएम विंडों में भी की है।
यह है मामला
झज्जर से दिल्ली जाने के लिए प्राइवेट बस नंबर एचआर 63 बी 6305 में बैठे गांव काकडौली निवासी कैंसर पीड़ित राजपाल पुत्र प्रताप सिंह परिचालक ने पहले तो किराया मांगा, तो पीड़ित ने कहा कि मैं कैंसर पीड़ित हूं और दिल्ली में एम्स दिखाने के लिए जाना है। मेरे पास कैंसर पीड़ित का पास है ये देखो। पास देखते ही परिचालक बोला कि मैं कोई पास नहीं मानता है अगर सफर करना है तो किराया देना ही पड़ेगा, नहीं यही उतार दूंगा। कैंसर पीड़ित ने किराया देने में असमर्थता जताई तो परिचालक ने रास्ते में पड़ने वाले गांव दुल्हेड़ा में उतार दिया। कैंसर पीड़ित ने बताया कि वह किसी अन्य साधन की मदद से बहादुरगढ़ पहुंचा और रोडवेज स्टैंड पर स्थित कर्मचारियों को पूरी बात बताई। बस स्टैंड पर मौजूद एसकेएस के प्रधान भगवान सिंह राठी ने कैंसर पीड़ित की बात सुनकर एसएस से मिलवाया। एसएस ने पीड़ित की पूरी बात सुनी और लिखित में शिकायत देने के लिए कहा। लिखित में शिकायत देने के बाद पीड़ित को आश्वासन दिया कि इस मामले में प्राइवेट परिचालक के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई के लिए उच्चाधिकारियों को भेज दिया जाएगा।
विज्ञापन
दलबीर ने कहा एडीसी से मिलो
कैंसर पीड़ित राजपाल ने बताया कि प्राइवेट बस परिचालक के खिलाफ हुई कार्रवाई की जानकारी के लिए रोडवेज के जीएम से मिलने गए तो वहां पर दलबीर नाम के एक कर्मचारी से मुलाकात हुई। उसने उनको पूरे मामले की जानकारी दी तो उन्होंने कहा कि यह मामला प्राइवेट बस का है प्राइवेट बस पर कार्रवाई के लिए एडीसी के पास जाओ, यहां पर हम लोग केवल रोडवेज बस चालक परिचालक के खिलाफ ही कार्रवाई कर सकते हैं। अगर सरकारी बस का मामला होता तो मैं आपकी जरूर मदद कर सकता था।
विज्ञापन
नहीं मिले एडीसी, कार्यालय में दी शिकायत
कैंसर पीड़ित ने कहा कि जब वह अपनी शिकायत लेकर एडीसी कार्यालय पहुंचे तो वहां पर एडीसी साहब नहीं मिले थे। वहां मौजूद कर्मचारी ने मेरी शिकायत ले ली थी और कहा था कि साहब के आने पर उनको दे दी जाएगी। लेकिन अभी तक न तो उस पर कोई कार्रवाई की गई है और न ही मेरे पास कोई फोन आया है। मामले की जानकारी के लिए जब एडीसी से फोन पर संपर्क करने की कोशिश की गई तो उनका फोन मिला। व्हाट्सएप कॉल करने पर उन्होंने फोन कट कर दिया।