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खेड़का गोशाला में गायों की हालत दयनीय

Fri, 05 Jan 2018 01:29 AM IST
Updated Fri, 05 Jan 2018 01:29 AM IST
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खेड़का गोशाला में गायों की हालत दयनीय
अमर उजाला ब्यूरो
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बादली।
जिला प्रशासन की ओर से चलाया गया कैटल फ्री अभियान श्रीराम कृष्ण गोशाला पर भारी पड़ गया। गोशाला में भेजी गई सैकड़ों गायों से बजट बिगड़ गया, जिसका खामियाजा प्रबंधक को आर्थिक हालत कमजोर होने के चलते भुगतना पड़ रहा है। गाय देखरेख और चिकित्सा सुविधा के अभाव में दम तोड़ रही हैं।
वीरवार को अमर उजाला की टीम ने 2 घंटे गोशाला में गायों की हालत और सुविधाओं का जायजा लिया जिसमें अनेक खामियां सामने आई। वहीं गोशाला प्रबंधक ने भी बिगड़े आर्थिक हालात को खामियों का प्रमुख कारण बताया। दोपहर एक से 3 बजे तक गोशाला में देखने को मिला कि क्षेत्र की एकमात्र गोशाला में इन दिनों गाय दयनीय हालात में हैं। हालत ये हो गए हैं कि जन्म से ही उनकी असुविधाओं का सामना करना पड़ता है। जहां बछड़े को जन्म के साथ ही सर्दी का सामना करना पड़ता है वहीं मौत होने पर दफनाने के लिए साधन और जगह भी पर्याप्त नहीं है। ऐसे में गोशाला प्रबंधन आर्थिक हालात कमजोर होने की बात कहकर पल्ला झाड़ रहा है।
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गोशाला में वर्तमान समय में ढाई हजार गोवंश हैं। 10 एकड़ जमीन में फैली गोशाला में 5 शैड और एक बड़ी बैरक बनाई गई है। पीने के पानी के लिए टंकी छोटी-छोटी हैं। इतनी बड़ी संख्या में गायों के रखरखाव और देखरेख के लिए करीब 20 एकड़ जमीन की जरूरत है। मृत गायों को दफनाने के लिए उनके पास सिर्फ 2 एकड़ जमीन है जबकि आवश्यकतानुसार उन्हें 5 एकड़ जमीन चाहिए। हालांकि गोशाला प्रबंधक ने जिला उपायुक्त से जमीन की मांग भी भेजी है।
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कैटल फ्री ने बिगाड़ा बजट
पिछले दिनों झज्जर जिले में प्रशासन की ओर से चलाया गया कैटल फ्री अभियान भी गोशाला पर भारी पड़ गया। गोशाला में बहादुरगढ़ और झज्जर शहर से 1000 नंदी खेड़का गुर्जर गोशाला में भेजे गए। ऐसे में प्रबंधन का कहना है कि प्रशासन को चाहिए था कि वह पहले सुविधाएं मुहैया करवाए और बाद में गोवंश को गोशाला में छोड़ें। अधिकतर नंदी बीमार हैं।
नहीं हैं पर्याप्त कर्मचारी
करीब ढाई हजार गोवंश की देखरेख के लिए मात्र 25 कर्मचारी ही गोशाला में काम कर रहे हैं जो पर्याप्त नहीं हैं। ऐसे में एक कर्मचारी 200 गायों की देखभाल कर रहा है। प्रबंधक के अनुसार 6000 प्रतिमाह प्रति कर्मचारी को दिए जा रहे हैं। ढाई लाख रुपये कर्मचारियों को प्रतिमाह वेतन के तौर पर दिया जा रहा है।
मृत गोवंश को दफनाने के लिए जेसीबी मशीन नहीं
मृत गायों को दफनाने के लिए गोशाला के पास कोई जेसीबी मशीन भी नहीं है। जो मशीन है वह भी खराब है, जिसके चलते बाहर से मशीनें मंगवा कर प्रतिदिन मृत गायों को दफनाना पड़ता है। ऐसे में मृत गायों को दफनाने में परेशानी झेलनी पड़ रही है जबकि कई बार तो मृत गायों को कई-कई दिन तक दफनाया नहीं जाता है।
पीने के पानी का अभाव
गोशाला में पीने के पानी का अभाव भी साफ झलक रहा है। एक ट्यूबवेल लगवाया गया है, मगर वह पर्याप्त नहीं है। गोशाला से थोड़ी दूरी से ही गुजर रही एनसीआर माइनर से पाईप लाइन देखकर पानी की सुविधा उपलब्ध करवाई जाए।
नहीं है सरकारी चिकित्सा सुविधा
गोशाला में गोवंश की सेवा में जुटे पूर्व सैनिक सतपाल का कहना है कि प्रबंधक के पास सरकारी तौर पर कोई चिकित्सक सुविधा भी नहीं है। ऐसे में आए दिन गाय बीमार हो रही हैं। दवाइयों का खर्च भी प्रबंधक को उठाना पड़ रहा है। गोशाला में निजी चिकित्सक है मगर स्थयी डॉक्टर न होने से गाय मौत का अकाल शिकार हो रही हैं। सर्दियों में संख्या ज्यादा बढ़ जाती है।
चारे के लिए प्रतिदिन का एक लाख का खर्च
बांका प्रधान दुल्हेड़ा का कहना है कि प्रति गाय का खान-पान का हिसाब लगाया जाए तो उन्हें 12 से 15 किलोग्राम चारा प्रतिदिन मिलता है। इसके अतिरिक्त आटा, दलिया और हरा-चारा अलग से होता है। एक अनुमान के अनुसार प्रतिदिन 5 एकड़ जमीन का चारा गायों को खिलाने की आवश्यकता होती है। इसके अनुसार 10 ट्रॉली सूखा भूसा प्रतिदिन गायों को दिया जाता है। प्रबंधक की बात मानी जाए तो एक लाख रुपये का चारा प्रतिदिन गायों के खाने पीने पर खर्च होता है।

गोशाला में आने वाले चंदे पर रहते हैं निर्भर
गोशाला प्रबंधक कमेटी के प्रधान सतपाल का कहना है कि गोशाला के पास आय के साधन ना के बराबर हैं। चंद े से अलग उन्हें साल में 2 लाख का गोबर खाद बेचकर काम चलाना होता है जबकि इसके अतिरिक्त अभी तक गोसेवा आयोग की तरफ से केवल 2 लाख गायों की देखरेख के लिए दिए गए हैं। बीते वर्ष 2 लाख रुपये की गाय बेची गई हैं। आय के लिए उन्हें सिर्फ गोशाला के वार्षिक कार्यक्रम में आने वाले चंदे पर निर्भर रहना पड़ता है। इसके अतिरिक्त उन्हें सरकार से कोई मदद नहीं मिलती है और ना ही प्रशासन की तरफ से कभी कोई आर्थिक सहायता की गई है।
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---फोटो 8 : दोपहर 1 : 30 पर ट्रॉली में भर कर लाया गया सूखा चारा।
---फोटो 9 : दोपहर 2 बजे बाड़े में गाय को चारा डालते एक पूर्व सैनिक।
---फोटो 10 : बीमार गोवंश को दिखाते ग्रामीण।
---फोटो 11: गाय को ठंड से बचाने के लिए हाल ही में बुपनियां गांव द्वारा बनवाया गया शेड दिखाते कमेटी सदस्य।
---फोटो 12 : गांव खेड़का गुर्जर स्थित गोशाला में टहलते गोवंश।
---फोटो 13 : गोवंश की देखभाल को लेकर मंथन करते कर्मचारी।
---फोटो 14 : पूर्व सैनिक सतपाल
---फोटो 15 : बांक ा प्रधान
---फ ोटो 16 : प्रधान सतपाल-
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