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लक्ष्य तय करने से मिलती है कामयाबी
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बहादुरगढ़। कामयाबी प्रतिशत से नहीं, बल्कि लक्ष्य तय करने से हासिल होती है। इसके लिए लगातार पढ़ना जरूरी नहीं होता है। यह कहना है बहादुरगढ़ के एसआर सेंचुरी स्कूल से पढ़ाई करके कामयाबी हासिल करने वाले लाइनपार निवासी परीक्षित और मनीष का। दोनों विद्यार्थियों ने अपना लक्ष्य तय करके मुकाम हासिल किया है। वर्तमान में परीक्षित झारखंड के देवघर में जज के रूप में सेवाएं दे रहे हैं तो मनीष दिल्ली के ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (एम्स) में मरीजों का बखूबी इलाज करने में व्यस्त हैं। दरअसल, मई के पहले सप्ताह में सीबीएसई के दसवीं और बारहवीं कक्षा का परीक्षा परिणाम घोषित हुआ था। इन परीक्षाओं में विद्यार्थियों ने जहां 90 से लेकर 98 प्रतिशत तक अंक हासिल किए और कुछ विद्यार्थियों ने 90 प्रतिशत से कम अंक हासिल किए। परीक्षाओं में कम अंक हासिल करने वाले विद्यार्थियों के चेहरों पर मायूसी देखी गई। जिन विद्यार्थियों ने कम अंक हासिल करने पर अपने आपका मनोबल गिरा समझा। उनके लिए बहादुरगढ़ के लाइनपार के रहने वाले परीक्षित एक मिसाल हैं। परीक्षित आज झारखंड के देवघर में जज के रूप में तैनात हैं। फोन पर अमर उजाला से बातचीत में परीक्षित ने कहा कि कम अंक हासिल करने पर विद्यार्थियों को मायूस नहीं होना चाहिए। बल्कि अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए प्रयास करने चाहिए। लक्ष्य तय करने के बाद विद्यार्थी इस मुकाम को जरूर हासिल करता है। उन्होंने स्वयं का उदाहरण देते हुए बताया कि उन्होंने बारहवीं कक्षा की परीक्षा वर्ष 2011 में 78 प्रतिशत अंक के साथ उत्तीर्ण की थी। उन्होंने बताया कि बारहवीं कक्षा पास करने के बाद उन्होंने आईआईटी की परीक्षा दी, उसमें वह पास नहीं हुए। इसके बाद ट्रिपल ई की परीक्षा में किस्मत आजमाई, मगर किस्मत ने इसमें भी साथ नहीं दिया। इसके बाद बी फार्मेसी में उन्होंने रजिस्ट्रेशन कराया। यहां भी उन्हें असफलता ही हाथ लगी। उन्होंने अपना लक्ष्य तय किया और जज बनने का सपना देखा। लॉ के लिए उन्होंने रोहतक यूनिवर्सिटी में इंट्रेस टेस्ट दिया और इसमें सफलता मिलने के बाद वे आगे बढ़े। इसके बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा और उनका सलेक्शन जज के रूप में झारखंड में हो गया। परीक्षित अकेला ऐसा शख्स नहीं है, जिसने लक्ष्य तय करने के बाद सफलता हासिल की है।
जितना भी पढ़े उसे करें आत्मसात : डॉ. मनीष
एसआर सेंचुरी स्कूल से छात्र मनीष ने भी बड़ी सफलता पाई है। मनीष ने बारहवीं की परीक्षा वर्ष 2007 में उत्तीर्ण की थी। मनीष ने भी लक्ष्य तय किया और उस दिशा में आगे बढ़ने की ठान ली। मनीष आज दिल्ली के एम्स में डॉक्टर बनकर मरीजों की सेवाएं कर रहे हैं। उन्होंने फोन पर बातचीत में कहा कि वर्तमान दौर में जहां विद्यार्थी अंकों के प्रतिशत देखकर आगे बढ़ने की सोचते हैं, लेकिन विद्यार्थियों को प्रतिशत देखकर नहीं बल्कि लक्ष्य तय करके आगे बढ़ना चाहिए। यूं तो विद्यार्थियों को लगातार पढ़ाई के प्रति संजीदा रहना चाहिए, लेकिन परीक्षा के दिनों में पढ़ाई को कुछ ज्यादा समय देने की जरूरत होती है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी जितना भी पढ़े उसको आत्मसात करते रहे और कुछ देर के बाद आराम जरूर करें। देर रात तक पढ़ने के बजाय सुबह उठकर पढ़ना अच्छा होता है। साथ ही विद्यार्थियों को उस समय तक पढ़ना चाहिए जब तक उनका शरीर साथ दे।
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जितना भी पढ़े उसे करें आत्मसात : डॉ. मनीष
एसआर सेंचुरी स्कूल से छात्र मनीष ने भी बड़ी सफलता पाई है। मनीष ने बारहवीं की परीक्षा वर्ष 2007 में उत्तीर्ण की थी। मनीष ने भी लक्ष्य तय किया और उस दिशा में आगे बढ़ने की ठान ली। मनीष आज दिल्ली के एम्स में डॉक्टर बनकर मरीजों की सेवाएं कर रहे हैं। उन्होंने फोन पर बातचीत में कहा कि वर्तमान दौर में जहां विद्यार्थी अंकों के प्रतिशत देखकर आगे बढ़ने की सोचते हैं, लेकिन विद्यार्थियों को प्रतिशत देखकर नहीं बल्कि लक्ष्य तय करके आगे बढ़ना चाहिए। यूं तो विद्यार्थियों को लगातार पढ़ाई के प्रति संजीदा रहना चाहिए, लेकिन परीक्षा के दिनों में पढ़ाई को कुछ ज्यादा समय देने की जरूरत होती है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी जितना भी पढ़े उसको आत्मसात करते रहे और कुछ देर के बाद आराम जरूर करें। देर रात तक पढ़ने के बजाय सुबह उठकर पढ़ना अच्छा होता है। साथ ही विद्यार्थियों को उस समय तक पढ़ना चाहिए जब तक उनका शरीर साथ दे।
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