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उपर चलती रही लॉ एंड ऑर्डर की मीटिंग, ढाई घंटे तक नीचे लगते रहे पुलिस मुर्दाबाद के नारे
Updated Wed, 14 Feb 2018 12:50 AM IST
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पुलिस पर दबाव बनाने का आरोप, शहर में प्रदर्शन
अमर उजाला ब्यूरो
चरखी दादरी।
लघु सचिवालय स्थित डीसी कार्यालय में मंगलवार सुबह लॉ एंड आर्डर के लिए अधिकारियों की बैठक चलती रही और बाहर ढाई घंटे तक लोग पुलिस मुर्दाबाद के नारे लगाते रहे। प्रदर्शनकारी खेमे ने पुलिस अधिकारियों पर भ्रष्टाचार और पीड़ित को ही समझौते के लिए मजबूर करने का दबाव बनाने के गंभीर आरोप लगाए। पीड़ित अशोक के समर्थन में उतरे वाल्मीकि समाज के लोगों, पार्षद, कुछ अधिवक्ताओं और पूर्व पार्षदों ने संबंधित अधिकारियों पर मामला दर्ज करने और तुरंत प्रभाव से गिरफ्तारी की मांग की।
बैठक की वजह से डीसी या एसपी के ज्ञापन लेने के लिए नहीं आने के कारण प्रदर्शनकारियों ने धरना शुरू कर दिया। बाद में ज्ञापन लेने पहुंचे तहसीलदार नवनीत को लौटाया तो वहीं डीएसपी हेडक्वार्टर प्रदीप कुमार के आश्वासन से भी वे संतुष्ट नहीं हुए। डीएसपी के साथ मौजूद लोगों की झड़प भी हुईं। इसके बाद एक पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल पुलिस अधीक्षक हिमांशु गर्ग से मिला और उन्हें मामले से अवगत कराया। प्रतिनिधिमंडल के अनुसार 25 फरवरी तक मामले की जांच कर कार्रवाई का आश्वासन पुलिस अधीक्षक ने दिया है। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर तब तक पुलिस प्रशासन ने आरोपी अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं की तो अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर देंगे।
यह है मामला
ज्ञापन में प्रदर्शनकारी खेमे ने बताया कि वाल्मीकि बस्ती निवासी अशोक ने तीन मई को सिटी पुलिस थाने में एक वाहन एजेंसी के खिलाफ धोखाधड़ी की शिकायत दी थी। इस संबंध में सिटी थाने के मुंशी ने मामला दर्ज करने के लिए पांच हजार रुपये की डिमांड की थी। उसने उसे 1900 रुपये दिए और इसकी वीडियो रिकॉर्डिंग भी कर ली। पीड़िता का आरोप है कि उसने उक्त मुंशी के खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायत दी थी और 13 सितंबर को कुछ पुलिस कर्मचारी उसके पास आए और शिकायत वापस न लेने पर झूठे मामले में फंसाने की धमकी देने लगे। पीड़ित ने बताया कि इस संबंध में मुंशी के साथ-साथ अन्य अधिकारी भी संलिप्त हैं। पुलिस ने महज मुंशी पर कार्रवाई कर अपना पल्ला झाड़ लिया। पीड़ित अशोक के साथ पार्षद विनोद वाल्मीकि व पूर्व पार्षद सुंदर सहित समाज के अन्य लोग मंगलवार को शहर में प्रदर्शन कर लघु सचिवालय पहुंचे और पुलिस के खिलाफ नारेबाजी कर अपना रोष जताने लगे। लोगों ने ज्ञापन डीसी या एसपी को ही देने की बात कही। खुफिया विभाग के अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को मीटिंग का हवाला देकर अन्य किसी अधिकारी को ज्ञापन सौंपने का तर्क दिया, जिसे मानने से इंकार कर दिया। इसके बाद तहसीलदार नवनीत कुमार ज्ञापन लेने नीचे पहुंचे लेकिन प्रदर्शनकारी खेमे ने उन्हें वापस भेज दिया। इसके बाद डीएसपी हेड क्वार्टर प्रदीप कुमार प्रदर्शनकारी खेमे को आश्वासन देने पहुंचे। करीब 15 मिनट बातचीत का दौर चला और इस दौरान न केवल प्रदर्शनकारी खेमा असंतुष्ट नजर आया बल्कि डीएसपी के साथ लोग उलझते भी नजर आए। इसके बाद डीएसपी भी लौट गए और प्रदर्शनकारियों ने धरना शुरू कर दिया। करीब ढाई घंटे तक प्रदर्शनकारी खेमा धरने पर बैठा रहा। इस दौरान पूर्व मंत्री सतपाल सांगवान भी पीड़ित को समर्थन देने लघु सचिवालय पहुंचे।
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वर्जन:::
अगर पीड़ित पक्ष के पास कोई सबूत है तो पेश करें। सबूतों की जांच के बाद ही पुलिस संबंधित कर्मचारी पर आगामी कार्रवाई अमल में लाएगी। मैंने ये आश्वासन ही उन्हें दिया था। - प्रदीप कुमार, डीएसपी हेड क्वार्टर
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अमर उजाला ब्यूरो
चरखी दादरी।
लघु सचिवालय स्थित डीसी कार्यालय में मंगलवार सुबह लॉ एंड आर्डर के लिए अधिकारियों की बैठक चलती रही और बाहर ढाई घंटे तक लोग पुलिस मुर्दाबाद के नारे लगाते रहे। प्रदर्शनकारी खेमे ने पुलिस अधिकारियों पर भ्रष्टाचार और पीड़ित को ही समझौते के लिए मजबूर करने का दबाव बनाने के गंभीर आरोप लगाए। पीड़ित अशोक के समर्थन में उतरे वाल्मीकि समाज के लोगों, पार्षद, कुछ अधिवक्ताओं और पूर्व पार्षदों ने संबंधित अधिकारियों पर मामला दर्ज करने और तुरंत प्रभाव से गिरफ्तारी की मांग की।
बैठक की वजह से डीसी या एसपी के ज्ञापन लेने के लिए नहीं आने के कारण प्रदर्शनकारियों ने धरना शुरू कर दिया। बाद में ज्ञापन लेने पहुंचे तहसीलदार नवनीत को लौटाया तो वहीं डीएसपी हेडक्वार्टर प्रदीप कुमार के आश्वासन से भी वे संतुष्ट नहीं हुए। डीएसपी के साथ मौजूद लोगों की झड़प भी हुईं। इसके बाद एक पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल पुलिस अधीक्षक हिमांशु गर्ग से मिला और उन्हें मामले से अवगत कराया। प्रतिनिधिमंडल के अनुसार 25 फरवरी तक मामले की जांच कर कार्रवाई का आश्वासन पुलिस अधीक्षक ने दिया है। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर तब तक पुलिस प्रशासन ने आरोपी अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं की तो अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर देंगे।
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यह है मामला
ज्ञापन में प्रदर्शनकारी खेमे ने बताया कि वाल्मीकि बस्ती निवासी अशोक ने तीन मई को सिटी पुलिस थाने में एक वाहन एजेंसी के खिलाफ धोखाधड़ी की शिकायत दी थी। इस संबंध में सिटी थाने के मुंशी ने मामला दर्ज करने के लिए पांच हजार रुपये की डिमांड की थी। उसने उसे 1900 रुपये दिए और इसकी वीडियो रिकॉर्डिंग भी कर ली। पीड़िता का आरोप है कि उसने उक्त मुंशी के खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायत दी थी और 13 सितंबर को कुछ पुलिस कर्मचारी उसके पास आए और शिकायत वापस न लेने पर झूठे मामले में फंसाने की धमकी देने लगे। पीड़ित ने बताया कि इस संबंध में मुंशी के साथ-साथ अन्य अधिकारी भी संलिप्त हैं। पुलिस ने महज मुंशी पर कार्रवाई कर अपना पल्ला झाड़ लिया। पीड़ित अशोक के साथ पार्षद विनोद वाल्मीकि व पूर्व पार्षद सुंदर सहित समाज के अन्य लोग मंगलवार को शहर में प्रदर्शन कर लघु सचिवालय पहुंचे और पुलिस के खिलाफ नारेबाजी कर अपना रोष जताने लगे। लोगों ने ज्ञापन डीसी या एसपी को ही देने की बात कही। खुफिया विभाग के अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को मीटिंग का हवाला देकर अन्य किसी अधिकारी को ज्ञापन सौंपने का तर्क दिया, जिसे मानने से इंकार कर दिया। इसके बाद तहसीलदार नवनीत कुमार ज्ञापन लेने नीचे पहुंचे लेकिन प्रदर्शनकारी खेमे ने उन्हें वापस भेज दिया। इसके बाद डीएसपी हेड क्वार्टर प्रदीप कुमार प्रदर्शनकारी खेमे को आश्वासन देने पहुंचे। करीब 15 मिनट बातचीत का दौर चला और इस दौरान न केवल प्रदर्शनकारी खेमा असंतुष्ट नजर आया बल्कि डीएसपी के साथ लोग उलझते भी नजर आए। इसके बाद डीएसपी भी लौट गए और प्रदर्शनकारियों ने धरना शुरू कर दिया। करीब ढाई घंटे तक प्रदर्शनकारी खेमा धरने पर बैठा रहा। इस दौरान पूर्व मंत्री सतपाल सांगवान भी पीड़ित को समर्थन देने लघु सचिवालय पहुंचे।
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अगर पीड़ित पक्ष के पास कोई सबूत है तो पेश करें। सबूतों की जांच के बाद ही पुलिस संबंधित कर्मचारी पर आगामी कार्रवाई अमल में लाएगी। मैंने ये आश्वासन ही उन्हें दिया था। - प्रदीप कुमार, डीएसपी हेड क्वार्टर