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दवा न मिलने पर डिस्पेंसरी के बाहर पूर्व फौजियों का हंगामा
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बहादुरगढ़। सेक्टर-6 स्थित सरकारी डिस्पेंसरी में दवा न मिलने पर सोमवार सुबह पूर्व फौजियों ने हंगामा कर दिया। फौजियों का आरोप है कि उनकी पेंशन से सरकार हर माह एक हजार रुपये काटती है। इसके बाद भी दवा समय से नहीं मिल रही। पिछले एक माह से दवा लेने के लिए डिस्पेंसरी के चक्कर काट रहे हैं और डिस्पेंसरी के डॉक्टर दवा न होने की बात कह रहें।
पूर्व फौजी राज सिंह ने बताया कि पूरे माह दवा नहीं मिलती। इस वजह से वह सुबह छह बजे से ही लाइन में लग गए ताकि दवा मिल जाए। इसी तरह रिटायर सूबेदार इंद्रजीत रोहिल्ला ने बताया कि जनवरी से दवा नहीं मिली। डॉक्टर एक दवा दे देते, इसके बाद अन्य दवा बाहर मेडिकल स्टोर से खरीदने को बोलते हैं। धर्मवीर का कहना है कि पिछले 15 दिन से डायबिटीज की समस्या है। इसके लिए हर रोज 750 रुपये का इंजेक्शन लगता है। डिस्पेंसरी में न होने के चलते उनको भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है।
डिस्पेंसरी में बैठने के लिए नहीं कोई व्यवस्था
पूर्व फौजियों का कहना है कि सुबह छह बजे से लाइन में खड़े होने से पैरों में दर्द शुरू हो जाता। डिस्पेंसरी में बैठने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं है। इसलिए लोगों के घरों के बाहर बैठकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है। कई फौजी तो व्हील चेयर से भी डिस्पेंसरी पहुंचे पर उन्हें भी निराश हाथ लगी।
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इंचार्ज बोले
हम लगातार अधिकारियों को पत्र लिखकर दवाओं की डिमांड करते रहते हैं। दो माह से कुछ ज्यादा ही समस्या आ रही है। आने वाले कुछ दिनों में दवाओं की कमी खत्म हो जाएगी।
डॉ. सुशील कुमार, डिस्पेंसरी इंचार्ज, सेक्टर-6
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पूर्व फौजी राज सिंह ने बताया कि पूरे माह दवा नहीं मिलती। इस वजह से वह सुबह छह बजे से ही लाइन में लग गए ताकि दवा मिल जाए। इसी तरह रिटायर सूबेदार इंद्रजीत रोहिल्ला ने बताया कि जनवरी से दवा नहीं मिली। डॉक्टर एक दवा दे देते, इसके बाद अन्य दवा बाहर मेडिकल स्टोर से खरीदने को बोलते हैं। धर्मवीर का कहना है कि पिछले 15 दिन से डायबिटीज की समस्या है। इसके लिए हर रोज 750 रुपये का इंजेक्शन लगता है। डिस्पेंसरी में न होने के चलते उनको भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है।
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डिस्पेंसरी में बैठने के लिए नहीं कोई व्यवस्था
पूर्व फौजियों का कहना है कि सुबह छह बजे से लाइन में खड़े होने से पैरों में दर्द शुरू हो जाता। डिस्पेंसरी में बैठने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं है। इसलिए लोगों के घरों के बाहर बैठकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है। कई फौजी तो व्हील चेयर से भी डिस्पेंसरी पहुंचे पर उन्हें भी निराश हाथ लगी।
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इंचार्ज बोले
हम लगातार अधिकारियों को पत्र लिखकर दवाओं की डिमांड करते रहते हैं। दो माह से कुछ ज्यादा ही समस्या आ रही है। आने वाले कुछ दिनों में दवाओं की कमी खत्म हो जाएगी।
डॉ. सुशील कुमार, डिस्पेंसरी इंचार्ज, सेक्टर-6