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इंटेग्रेटिड वाटर शेड मैनेजमेंट प्रोग्राम-2018 तैयार, बजट के लिए सरकार को भेजा

Fri, 06 Jul 2018 12:33 AM IST
Updated Fri, 06 Jul 2018 12:33 AM IST
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इंटेग्रेटिड वाटर शेड मैनेजमेंट प्रोग्राम-2018 तैयार, बजट के लिए सरकार को भेजा
अमर उजाला ब्यूरो
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चरखी दादरी। जिले के लिए इंटेग्रेटिड वाटर शेड मैनेजमेंट प्रोग्राम-2018 तैयार कर जिला प्रशासन ने सरकार के पास भेज दिया है। इस प्लान के तहत चंडीगढ़ से रिमोट सेंसिस के जरिए सात गांवों का चयन किया गया है। इसके तहत जमीन को बरसाती पानी से रिचार्ज करनेे का प्लान है। ताकि भूमिगत जलस्तर बढ़ सके और जल का संरक्षण हो सके। अब जिला प्रशासन ने इस प्रोजेक्ट को गति देने के लिए सरकार से बजट की डिमांड की है। इस प्लान का वर्क प्रोग्राम तैयार कर चंडीगढ़ भेजा गया है।
पेयजल और सिंचाई के पानी की पिछले कुछ सालों से लगातार कमी होती आ रही है। जिले में पीने के पानी का संकट बढ़ा है तो नहरी पानी का संकट भी लगातार गहराता जा रहा है। हर मानसून में बारिश भी कम होती रही है। इस वजह से जमीन का वाटर लेवल गिरता जा रहा है जो आने वाले समय में विकराल समस्या पैदा कर सकता है। जलवायु परिवर्तन के तहत यह भी एक बड़ा विषय बनता जा रहा है। कई सालों से सरकारें इस पर चिंतन करती आ रही है तथा प्रोजेक्ट तैयार होते हैं लेकिन ठीक प्रकार से लागू नहीं हो पाते। ऐसे में स्थिति में सुधार नहीं हो पा रहा है। जल संरक्षण जितना जरूरी है उतना ही जलदोहन को रोकना भी आवश्यक है। बिना अनुमति अवैध बोरिंग की संख्या बढ़ती जा रही है। रेतीले भागों में जमीनी ट्यूबवेल का पानी हर साल 50 से 60 फीट तक नीचे जा रहा है। किसानों को दो से तीन बिजली की मोटरें लगाकर पानी का उठान करना पड़ रहा है।
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पानी के सदुपयोग के लिए बनाए प्लान
अब सरकार ने इंटेग्रेटिड वाटर शेड मैनेजमेंट नाम से प्लान तैयार की है। इसके तहत जमीन को पानी से रिचार्ज करना है। रिचार्ज के तौर-तरीके भी इस प्लान के तहत सुझाए गए हैं। गांवों में इनलेट यानी गोघाट बनाए जाए। इसी प्रकार नहर से अंडर पाइप लाइन दबाकर सिंचाई विभाग की अनुमति से गांवों में बने सभी जोहड़ों में पानी डाला जाए। स्कूल भवन अन्य भवनों की छत के पानी का संग्रह कर इसे जलीय कुंड में डाला जाए। बारिश के पानी का हर तरीके से सदुपयोग किया जाए। बारिश का पानी जैसे-तैसे नीचे जमीन में जाए। ताकि जलस्तर को बढ़ाया जा सके और डॉर्क जोन की स्थिति न बनने पाए।
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इन गांवों का किया चयन
चंडीगढ़ स्थित रिमोट सेंसिस से जिले के सात गांवों का चयन किया गया है। इन गांवों में बिरही कलां, कलियाणा, खेड़ी बत्तर, झिंझर, जयश्री, सांवड़ व कोहलावास शामिल है।


11 सदस्यीय कमेटी करेगी काम
चयनित गांवों में कम से कम 11 सदस्यीय कमेटी इस प्रोजेक्ट को सिरे चढ़ाने काम करेगी। इस कमेटी के चेयरमैन सरपंच की देखरेख में इस प्लान पर काम होना है। इस प्रोजेक्ट पर 60 प्रतिशत केंद्र सरकार और 40 प्रतिशत राज्य सरकार खर्च करेगी लेकिन अभी इस प्रोजेक्ट के लिए बजट नहीं पहुंचा है।

वर्जन
प्रशासन ने इसकी पूरी वर्क प्लान तैयार कर सरकार को भेज दी है। सरकार से बजट राशि मिलने पर ही इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू हो सकेगा।
- मनोज कुमार, एडीसी।
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