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ठंड का कहर: प्रतिदिन निमोनिया से पीड़ित एक बच्चा पहुंच रहा है अस्पताल
Updated Sat, 06 Jan 2018 01:29 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
झज्जर।
बढ़ती ठंड नौनिहाल के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव डाल रही है। ठंड और संक्रमण के कारण काफी संख्या में बच्चे निमोनिया की चपेट में आ रहे हैं। एक दिसंबर से पांच जनवरी तक तक निमोनिया पीड़ित 35 बच्चे सामान्य अस्पताल के वार्ड में भर्ती हो चुके हैं। सामान्य अस्पताल में निमोनिया से पीड़ित नौनिहालों की बात की जाए तो यह आंकड़ा प्रतिदिन एक बच्चे का बन रहा है। वहीं, अगर प्राईवेट अस्पतालों को इसमें शामिल किया जाए तो यह आंकड़ा रोजाना का 2-3 बच्चों का बन रहा है।
चिंताजनक बात यह है कि निमोनिया से पीड़ित बच्चों में पांच वर्ष से कम आयु वालों की संख्या अधिक है। मौसम में बदलाव की वजह से हर दिन ये केस बढ़ते जा रहे हैं। सामान्य अस्पताल में इस समय चाइल्ड स्पेशलिस्ट की ओपीडी 100 से अधिक पहुंच रही है, इससे चिकित्सक और अभिभावक चिंतित नजर आ रहे हैं।
एक माह से पांच वर्ष तक के बच्चे निमोनिया से ग्रस्त
ठंड की वजह से वार्ड में भर्ती बच्चों में अधिक संख्या एक माह से पांच वर्ष तक के नौनिहालों की है। अगर इससे कम आयु वर्ग की बात की जाए तो दो साल से कम आयु के नौनिहाल अधिकता में निमोनिया से पीड़ित हैं। इसके चलते नीकू वार्ड में चिकित्सकों को अधिक राउंड लगाने पड़ रहे हैं। गनीमत है कि अभी तक निमोनिया की वजह से कोई अनहोनी नहीं हुई है। निमोनिया पीड़ितों की संख्या बढ़ना चिकित्सकों की टेंशन बढ़ा रहा है।
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ये हैं शुरूआती लक्षण
- निमोनिया होने पर छोटे बच्चों को सांस लेने में दिक्कत शुरू हो जाती है।
- खाने-पीने में बच्चा कमी करने के साथ सुस्त रहने लग जाता है।
- पसलियां धंसने लग जाती हैं।
- जल्दी-जल्दी खांसना, बुखार आन और नाक बहना।
ये रखें सावधानी
- नवजात बच्चों को बीमार व्यक्ति के संपर्क में न लाएं।
- छोटे बच्चों को गर्म कपड़ों से बाहर न निकालें।
- साबुन से हाथ धोकर ही बच्चों को छुएं।
- अधिक से अधिक दूध और पानी का सेवन कराएं।
- नंगे पैर फर्श पर न दौड़ने दें।
ठंड में बचाव बेहद जरूरी : डॉ. प्रीति
शिशु रोग विभाग की चिकित्सक डॉ. प्रीति दुग्गल के अनुसार छोटे बच्चों को ठंड से बचाना बेहद जरूरी है। संक्रमण के खतरे के चलते छोटे बच्चे निमोनिया की चपेट में आ रहे हैं। बच्चों का ठंड से बचाव रखें। वहीं, निमोनिया के लक्षण नजर आने पर बच्चे को तुरंत चिकित्सक के पास लेकर जाएं। निमोनिया ज्यादा दिन तक रहने पर दिक्कत हो सकती है। ठंड के चलते इन दिनों छोटे बच्चों की ओपीडी बढ़ी हुई है। हर रोज निमोनिया से पीड़ित एक बच्चा अस्पताल पहुंच रहा है।
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झज्जर।
बढ़ती ठंड नौनिहाल के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव डाल रही है। ठंड और संक्रमण के कारण काफी संख्या में बच्चे निमोनिया की चपेट में आ रहे हैं। एक दिसंबर से पांच जनवरी तक तक निमोनिया पीड़ित 35 बच्चे सामान्य अस्पताल के वार्ड में भर्ती हो चुके हैं। सामान्य अस्पताल में निमोनिया से पीड़ित नौनिहालों की बात की जाए तो यह आंकड़ा प्रतिदिन एक बच्चे का बन रहा है। वहीं, अगर प्राईवेट अस्पतालों को इसमें शामिल किया जाए तो यह आंकड़ा रोजाना का 2-3 बच्चों का बन रहा है।
चिंताजनक बात यह है कि निमोनिया से पीड़ित बच्चों में पांच वर्ष से कम आयु वालों की संख्या अधिक है। मौसम में बदलाव की वजह से हर दिन ये केस बढ़ते जा रहे हैं। सामान्य अस्पताल में इस समय चाइल्ड स्पेशलिस्ट की ओपीडी 100 से अधिक पहुंच रही है, इससे चिकित्सक और अभिभावक चिंतित नजर आ रहे हैं।
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एक माह से पांच वर्ष तक के बच्चे निमोनिया से ग्रस्त
ठंड की वजह से वार्ड में भर्ती बच्चों में अधिक संख्या एक माह से पांच वर्ष तक के नौनिहालों की है। अगर इससे कम आयु वर्ग की बात की जाए तो दो साल से कम आयु के नौनिहाल अधिकता में निमोनिया से पीड़ित हैं। इसके चलते नीकू वार्ड में चिकित्सकों को अधिक राउंड लगाने पड़ रहे हैं। गनीमत है कि अभी तक निमोनिया की वजह से कोई अनहोनी नहीं हुई है। निमोनिया पीड़ितों की संख्या बढ़ना चिकित्सकों की टेंशन बढ़ा रहा है।
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ये हैं शुरूआती लक्षण
- निमोनिया होने पर छोटे बच्चों को सांस लेने में दिक्कत शुरू हो जाती है।
- खाने-पीने में बच्चा कमी करने के साथ सुस्त रहने लग जाता है।
- पसलियां धंसने लग जाती हैं।
- जल्दी-जल्दी खांसना, बुखार आन और नाक बहना।
ये रखें सावधानी
- नवजात बच्चों को बीमार व्यक्ति के संपर्क में न लाएं।
- छोटे बच्चों को गर्म कपड़ों से बाहर न निकालें।
- साबुन से हाथ धोकर ही बच्चों को छुएं।
- अधिक से अधिक दूध और पानी का सेवन कराएं।
- नंगे पैर फर्श पर न दौड़ने दें।
ठंड में बचाव बेहद जरूरी : डॉ. प्रीति
शिशु रोग विभाग की चिकित्सक डॉ. प्रीति दुग्गल के अनुसार छोटे बच्चों को ठंड से बचाना बेहद जरूरी है। संक्रमण के खतरे के चलते छोटे बच्चे निमोनिया की चपेट में आ रहे हैं। बच्चों का ठंड से बचाव रखें। वहीं, निमोनिया के लक्षण नजर आने पर बच्चे को तुरंत चिकित्सक के पास लेकर जाएं। निमोनिया ज्यादा दिन तक रहने पर दिक्कत हो सकती है। ठंड के चलते इन दिनों छोटे बच्चों की ओपीडी बढ़ी हुई है। हर रोज निमोनिया से पीड़ित एक बच्चा अस्पताल पहुंच रहा है।