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प्लानिंग के बावजूद पुराने ढर्रे पर बिजली आपूर्ति
Updated Mon, 02 Oct 2017 12:27 AM IST
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प्लानिंग के बावजूद पुराने ढर्रे पर बिजली आपूर्ति
अमर उजाला ब्यूरो
चरखी दादरी।
शहर में करीब आठ साल पहले लगाए लाल रंग के 863 ट्रांसफार्मरों मेें से 300 आज तक चालू नहीं हो सके हैं। इससे शहर की बिजली आपूर्ति सीधे प्रभावित हो रही है। एक साल पहले बिजली निगम ने इसकी सुध ली थी। यह ट्रांसफार्मर जिन केबल्स से कनेक्ट हैं, पंक्चर होने की वजह से उनको चालू नहीं किया जा सका था। ऐसे में शहरवासियों को अभी बिजली की और परेशानी झेलनी पड़ेगी। शहर में इस समय 863 लाल रंग के ट्रांसफार्मर हैं। इस समय करीब 1300 पुराने ट्रांसफार्मरों के जरिए ही बिजली की आपूर्ति हो रही है।
करीब आठ साल पहले शहर में लाल रंग की टंकियां (ट्रांसफार्मर) लगाए गए थे। इनको मोटी केबल से कनेक्ट किया गया था ताकि इनमें चोरी न हो सके। टंकियां लगाने के बाद इनको चालू नहीं किया गया था। पिछले साल जब शहर में बिजली संकट अधिक गहराया तब बिजली निगम ने लाल रंग के ट्रांसफार्मर चालू कर बिजली आपूर्ति का मन बनाया। जब यह लाल रंग की टंकी चालू की गई तो सभी केबलों में फाल्ट मिला। सभी केबल पंक्चर मिली जिससे आपूर्ति करना मुश्किल हो गया।
12 किलोमीटर लंबाई में केबल पंक्चर मिली
पूरे शहर में 12 किलोमीटर लंबाई में यह केबल पंक्चर मिली। जगह- जगह इन केबलों में फाल्ट मिले। बाद में निगम ने इसके लिए अलग से बजट का प्रावधान किया और इन पंक्चर केबल को अनबंडलिंग करने की प्लानिंग की। निगम ने गत दिसंबर माह में इन पंक्चर पड़ी केबलों की अनबंडलिंग का काम शुरू किया था। आज तक यह पूरा नहीं हो सका है जबकि यह केवल तीन माह का कार्य है। निगम की धीमी कार्यशैली के चलते शहरवासियों को बिजली संकट से अभी स्थायी रूप से निजात नहीं मिलने वाली है।
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आज तक चालू नहीं हुए 300 ट्रांसफार्मर
आज तक लाल रंग के 300 ट्रांसफार्मर चालू नहीं हो सके हैं। इस समय शहर में पुराने ट्रांसफार्मरों से काम चलाया जा रहा है। लोड की वजह से एक ही स्थान पर दो-दो ट्रांसफार्मर रखे हैं ताकि उस एरिया को लोड की समस्या से निजात मिल सके। पूरे शहर में करीब 1300 पुराने ढर्रे के ट्रांसफार्मर लगे हैं। इनकी हालत काफी खस्ता बनी हुई है। इनकी आउटपुट क्षमता भी कम बनी हुई है जिससे ये ट्रांसफार्मर निर्धारित पूरा लोड झेलने की स्थिति में नहीं हैं। इन टांसफार्मर में बार-बार ट्रिंपिंग की शिकायतें मिलती रहती हैं जिससे घंटों बिजली आपूर्ति ठप बनी रहती है। जब ठीक करने के लिए परमिट लिया जाता है तो आसपास के एरिया में भी बिजली आपूर्ति बाधित हो जाती है। इसका असर शहर की पेयजल आपूर्ति पर भी पड़ता है।
863 हैं लाल रंग के ट्रांसफार्मर
शहर में इस समय लाल रंग के ट्रांसफार्मरों की संख्या 863 है जो सभी नई मोटी केबल से कनेक्ट हैं। इस एक ट्रांसफार्मर से 20 से 25 घरों में ही सप्लाई संभव है। लोड बांटकर इन ट्रांसफार्मर के जरिए बिजली आपूर्ति संभव है। इन पंक्चर पड़ी केबल को अनबंडलिंग करके इनके बीच चीनी-मिट्टी का यंत्र लगाया जाना है ताकि फाल्ट से छुटकारा मिल सके और लाइन सुचारु चलती रहे। इतना समय बीत जाने पर भी 300 लाल रंग के ट्रांसफार्मर चालू नहीं किए जा सके हैं। अब आने वाले त्योहारों के दौरान बिजली की खपत और बढ़ेगी।
वर्जन--
लाल रंग के ट्रांसफार्मरों को चालू करने के लिए निगम का कार्य प्रगति पर है। शहर में सभी 863 ट्रांसफार्मर चालू होने के बाद बिजली व्यवस्था में काफी सुधार आएगा। इस काम को जल्द ही पूरा किया जाएगा। - भागीरथ, कार्यकारी अभियंता बिजली निगम
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अमर उजाला ब्यूरो
चरखी दादरी।
शहर में करीब आठ साल पहले लगाए लाल रंग के 863 ट्रांसफार्मरों मेें से 300 आज तक चालू नहीं हो सके हैं। इससे शहर की बिजली आपूर्ति सीधे प्रभावित हो रही है। एक साल पहले बिजली निगम ने इसकी सुध ली थी। यह ट्रांसफार्मर जिन केबल्स से कनेक्ट हैं, पंक्चर होने की वजह से उनको चालू नहीं किया जा सका था। ऐसे में शहरवासियों को अभी बिजली की और परेशानी झेलनी पड़ेगी। शहर में इस समय 863 लाल रंग के ट्रांसफार्मर हैं। इस समय करीब 1300 पुराने ट्रांसफार्मरों के जरिए ही बिजली की आपूर्ति हो रही है।
करीब आठ साल पहले शहर में लाल रंग की टंकियां (ट्रांसफार्मर) लगाए गए थे। इनको मोटी केबल से कनेक्ट किया गया था ताकि इनमें चोरी न हो सके। टंकियां लगाने के बाद इनको चालू नहीं किया गया था। पिछले साल जब शहर में बिजली संकट अधिक गहराया तब बिजली निगम ने लाल रंग के ट्रांसफार्मर चालू कर बिजली आपूर्ति का मन बनाया। जब यह लाल रंग की टंकी चालू की गई तो सभी केबलों में फाल्ट मिला। सभी केबल पंक्चर मिली जिससे आपूर्ति करना मुश्किल हो गया।
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12 किलोमीटर लंबाई में केबल पंक्चर मिली
पूरे शहर में 12 किलोमीटर लंबाई में यह केबल पंक्चर मिली। जगह- जगह इन केबलों में फाल्ट मिले। बाद में निगम ने इसके लिए अलग से बजट का प्रावधान किया और इन पंक्चर केबल को अनबंडलिंग करने की प्लानिंग की। निगम ने गत दिसंबर माह में इन पंक्चर पड़ी केबलों की अनबंडलिंग का काम शुरू किया था। आज तक यह पूरा नहीं हो सका है जबकि यह केवल तीन माह का कार्य है। निगम की धीमी कार्यशैली के चलते शहरवासियों को बिजली संकट से अभी स्थायी रूप से निजात नहीं मिलने वाली है।
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आज तक चालू नहीं हुए 300 ट्रांसफार्मर
आज तक लाल रंग के 300 ट्रांसफार्मर चालू नहीं हो सके हैं। इस समय शहर में पुराने ट्रांसफार्मरों से काम चलाया जा रहा है। लोड की वजह से एक ही स्थान पर दो-दो ट्रांसफार्मर रखे हैं ताकि उस एरिया को लोड की समस्या से निजात मिल सके। पूरे शहर में करीब 1300 पुराने ढर्रे के ट्रांसफार्मर लगे हैं। इनकी हालत काफी खस्ता बनी हुई है। इनकी आउटपुट क्षमता भी कम बनी हुई है जिससे ये ट्रांसफार्मर निर्धारित पूरा लोड झेलने की स्थिति में नहीं हैं। इन टांसफार्मर में बार-बार ट्रिंपिंग की शिकायतें मिलती रहती हैं जिससे घंटों बिजली आपूर्ति ठप बनी रहती है। जब ठीक करने के लिए परमिट लिया जाता है तो आसपास के एरिया में भी बिजली आपूर्ति बाधित हो जाती है। इसका असर शहर की पेयजल आपूर्ति पर भी पड़ता है।
863 हैं लाल रंग के ट्रांसफार्मर
शहर में इस समय लाल रंग के ट्रांसफार्मरों की संख्या 863 है जो सभी नई मोटी केबल से कनेक्ट हैं। इस एक ट्रांसफार्मर से 20 से 25 घरों में ही सप्लाई संभव है। लोड बांटकर इन ट्रांसफार्मर के जरिए बिजली आपूर्ति संभव है। इन पंक्चर पड़ी केबल को अनबंडलिंग करके इनके बीच चीनी-मिट्टी का यंत्र लगाया जाना है ताकि फाल्ट से छुटकारा मिल सके और लाइन सुचारु चलती रहे। इतना समय बीत जाने पर भी 300 लाल रंग के ट्रांसफार्मर चालू नहीं किए जा सके हैं। अब आने वाले त्योहारों के दौरान बिजली की खपत और बढ़ेगी।
वर्जन--
लाल रंग के ट्रांसफार्मरों को चालू करने के लिए निगम का कार्य प्रगति पर है। शहर में सभी 863 ट्रांसफार्मर चालू होने के बाद बिजली व्यवस्था में काफी सुधार आएगा। इस काम को जल्द ही पूरा किया जाएगा। - भागीरथ, कार्यकारी अभियंता बिजली निगम