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एडी, जुलैक्स व टारगर मच्छर का ढंक ढहा न दें कहीं कहर!

Sun, 25 Jun 2017 12:48 AM IST
Updated Sun, 25 Jun 2017 12:48 AM IST
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एडी, जुलैक्स व टारगर मच्छर का ढंक ढहा न दें कहीं कहर!
नहीं निकला बरसाती पानी तो मच्छर बढ़ा सकते हैं परेशानी
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वायरल के प्रकोप सात दिन में 30 प्रतिशत बढ़ी ओपीडी, खड़े पानी और कूड़ा कर्कट वाली जगहों पर पनपते हैं एडी, जुलैक्स और टारगर प्रजाति के मच्छर
अमर उजाला ब्यूरो
चरखी दादरी।
शहर में पिछले दिनों हुई बरसात के बाद खड़ा पानी आपकी सेहत बिगाड़ सकता है, क्योंकि इस बरसाती पानी से एडी, जुलैक्स और टारगर प्रजाति के मच्छर पनप रहे हैं। मच्छरों की बढ़ रही तादाद से शहर में वायरल का प्रकोप भी बढ़ रहा है, हालात यह है कि पिछले सात दिन में 30 प्रतिशत तक ओपीडी बढ़ चुकी है। सरकारी ही नहीं प्राइवेट अस्पतालों में वायरल, जुकाम और खांसी से पीड़ित लोग इलाज के लिए आ रहे हैं। स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों की मानेे तो बरसात के दिनों में पैदा होने वाले ये मच्छर स्वस्थ मनुष्य को वायरल की चपेट में ले लेते है। पिछले सप्ताह से हो रही बरसात के कारण कबीर नगर, चरखी दरवाजा, हरिनगर और सीसीआई फाटक रोड से ढाणी फाटक रोड समेत करीब डेढ़ दर्जन क्षेत्रों में खाली पड़े प्लॉटों व आवासीय प्रतिष्ठानों के बाहर अब भी पानी जमा है। इसकी निकासी के प्रबंध न होने से एक जगह खड़े बरसाती पानी और गंदगी से मच्छर पनपने लगे हैं। बुधवार को सिविल अस्पताल में 390 मरीजों की जांच गई। वीरवार को भी 398 से ज्यादा ओपीडी आई जिनमें अधिकतर वायरल, जुकाम व अन्य बुखार से पीड़ित होने के मामले सामने आए। लैब में खून टेस्ट करवाने वाले लोगों की संख्या भी बढ़ गई है। शुक्रवार को सिविल अस्पताल में 398 मरीजों की जांच गई थी लेकिन अब मौसम में बदलाव के चलते यह आंकड़ा दिनों दिन बढ़ने लगा है। लंबे समय तक जमा बरसाती पानी में एडी मच्छर के अलावा जुलैक्स और टारगर मच्छर अधिक संख्या में पैदा होने लगते हैं जो मलेरिया, डेंगू, वायरल का प्रमुख कारण बन जाते हैं। ऐसे में जिला प्रशासन को लोगों को जागरूक करने के साथ-साथ उचित पानी निकासी की व्यवस्था करने की ओर जल्द कदम उठाने की जरूरत है।

साढे़ तीन सौ पार पहुंची ओपीडी
शहर के सिविल अस्पताल में रोजाना ओपीडी बढ़नी शुरू हो गई है। अस्पताल में मंगलवार को 375 मरीजों की ओपीडी थी वहीं बुधवार को बढ़कर 390 तक पहुंच गई। वीरवार को 398 तो शुक्रवार को भी इतनी ही ओपीडी रही। इनके अलावा प्राइवेट अस्पताल में भी अब ओपीडी बढ़ने लगी है। चिकित्सकों के अनुसार जलजनित बीमारियों में पेट संबंधी रोग भी अधिक बढ़ते हैं। ऐसे में अल्ट्रासाउंड करवाने वाले मरीजों की संख्या भी बढ़ रही है। अस्पताल में लाइन लंबी होने पर अब परेशानी अधिक बढ़ गई है। सिविल अस्पताल में मरीजों को कई देर तक लाइन में खड़ा होकर चेकअप करवाना पड़ रहा है। खासकर महिलाओं को काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है। बुखार के टाइप जानने के लिए चिकित्सक खून टेस्ट करवाने की राय दे रहे हैं ताकि बुखार की टाइप का पता लगने पर उसी के अनुरूप इलाज किया जा सके।
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खाली प्लॉटों से गंदगी व पानी निकासी का प्रबंध करे प्रशासन
मौसम में बदलाव की वजह से बुखार आदि के मामले बढ़ने लगे हैं। कॉलोनियों में मकानों के बाहर भी बरसाती पानी का जमाव है जिससे मच्छर पैदा हो रहे हैं। प्रशासन से शहर में बरसाती पानी समय रहते निकलवाए जाने की मांग है। -केसर
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इस मौसम में बुखार और जुकाम की अधिक शिकायत होती है। अब जलभराव से मच्छर अधिक हो गए हैं जिससे अब बीमारियां बढ़ने लगी हैं। अस्पताल की सुविधाओं में विस्तार करना चाहिए। शहर में बरसाती पानी का जमाव नहीं रहने दिया जाना चाहिए। नियमित रूप से नालियों और सार्वजनिक स्थानों की सफाई होनी चाहिए। -रामलाल
इस मौसम में बुखार तो आम बात है। जलभराव होने पर मच्छर पैदा होते हैं जिससे विभिन्न प्रकार के बुखार होने से परेशानी बढ़ती है। शहर में बरसाती पानी नहीं रहना चाहिए। बरसाती नालों, नालियों व अन्य स्थानों पर जमा पानी की निकासी की व्यवस्था होनी चाहिए ताकि रोग न फैलने पाए। -योगिता
जलजनित बीमारियां का प्रमुख कारण जगह-जगह जलभराव व उसमें पैदा होने वाले मच्छर हैं। इन मच्छरों से बचाव का भी प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग को प्रबंध करना चाहिए। समय- समय पर शहर में मच्छरों पर दवा आदि का छिड़काव किया जा सकता है। गड्ढों में बरसाती पानी का जमाव नहीं होना चाहिए। -पवन कुमार
हेल्थ एक्सपर्ट व्यू :
रिटायर्ड एसएमओ डॉ. उमेद सिंह दिसौदिया का कहना है कि बरसाती पानी का लंबे समय तक जमाव न रहने दें। कूलर को नियमित साफ करें तथा इसके लिए एक दिन ड्राइ-डे मनाएं। सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करना चाहिए। डॉ. उमेद सिंह का मानना है कि इन दिनों में बरसाती व पेयजल का भी किसी न किसी रूप में मिश्रण हो जाता है इस पानी के सेवन से पेट संबंधी रोग ज्यादा बढ़ते हैं। उनका कहना है कि इस मौसम में उल्टी, दस्त व बुखार का होना स्वाभाविक है। उनके अनुसार पानी को उबालकर इस्तेमाल करना चाहिए। कच्ची सब्जी नहीं खानी चाहिए। खुले में नहीं सोना चाहिए। खुले नालों में पानी का जमाव न रहने दें।

वर्जन :
प्लॉटों से गंदगी का उठान कर्मचारी कर रहे हैं। हमने कर्मचारियों से हर गली के प्लॉट से कूड़े व गंदगी के उठान के साथ नालियों की नियमित सफाई करने के निर्देश भी दे रखे हैं। -संजय यादव, सचिव नगर परिषद

फोटो 19 पुराना बस स्टैंड के समीप घरों के सामने जमा दूषित पानी।
फोटो 20 पुराने शहर में घरों के सामने खाली प्लाट में जमा बरसाती पानी।
फोटो 21 सिविल अस्पताल में लगी मरीजों की लंबी लाइन।
फोटो 22 सिविल अस्पताल में खून की जांच करती स्वास्थ्य कर्मी।
फोटो 23 उपचार का इंतजार करती महिलाएं।
फोटो 24 दूषित पानी में जमा मच्छर।
फोटो 25 केसर
फोटो 26 रामलाल
फोटो 27 योगिता
फोटो 28 पवन कुमार
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