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शिक्षा विभाग का कमाल: 132 बच्चों को हिंदी पढ़ाने के लिए नहीं शिक्षक, संस्कृत टीचर पढ़ा रही हिंदी
Updated Fri, 22 Dec 2017 01:18 AM IST
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छठीं से आठवीं के बच्चों को संस्कृत टीचर पढ़ा रही हिंदी
बौंदकलां।
बौंदकलां के राजकीय विद्यालय में माध्यमिक व सीनियर कक्षाओं को पढ़ाने के लिए स्कूल में शिक्षकों की कमी है। इसके अलावा छठीं से 8वीं कक्षा के 132 बच्चों को पढ़ाने के लिए कोई हिंदी का शिक्षक नहीं है। वहीं शिक्षा विभाग ने 12 सितंबर को शिक्षा विभाग ने एक सस्पेंड टीचर का ट्रांसफर यहां किया था। लेकिन उक्त शिक्षक अपनी हाजिरी भिवानी डीईईओ कार्यालय में लगा रहा है। माध्यमिक वर्ग की कक्षाओं को हिंदी पढ़ाने का जिम्मा स्कूल प्रबंधन समिति एक संस्कृत शिक्षिका को सौंप रखा है। ऐसे में विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित हो रही है लेकिन शिक्षा विभाग गहरी नींद में सो रहा है। इन अव्यवस्थाओं के चलते स्कूल में शिक्षा का स्तर गिरता जा रहा है और पहले की तुलना में अब बच्चों की तादाद भी काफी कम रह गई है।
गौरतलब है कि राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय की मिडिल विंग में कक्षा छठीं से आठवीं कक्षा तक पढ़ाने के लिए हिंदी विषय का एक ही पद शिक्षा विभाग की ओर से स्वीकृत किया गया। शिक्षा विभाग ने ट्रांसफर पॉलिसी के तहत हिंदी टीचर को अचीना के सरकारी विद्यालय से यहां भेज दिया गया। शिक्षक ने विद्यालय में 12 सितंबर को ही ज्वाइन किया था लेकिन विभाग की ओर से भेजा गया ये टीचर अचीना विद्यालय प्रकरण में पहले से ही सस्पेंड चल रहा है। इस सस्पेंड हिंदी टीचर की हाजिरी भी जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय भिवानी में ही लगती है।
संस्कृत टीचर व जेबीटी प्रशिक्षिका पढ़ा रही हिंदी
मिडिल विंग में कक्षा छठी से लेकर आठवीं तक विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए संस्कृत विषय के टीचर द्वारा ही हिंदी पढ़ाई जा रही है। इसके साथ ही विद्यालय में अध्यापन का प्रशिक्षण ले रही जेबीटी प्रशिक्षिका भी 132 बच्चों को हिंदी पढ़ा रही है। हालांकि इसके बावजूद भी बच्चों की पढ़ाई काफी हद तक प्रभावित हो रही है। सूत्रों की मानें तो शिक्षकों की डिमांड कई दफा उच्चाधिकारियों के समक्ष उठाई जा चुकी है लेकिन अब तक इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया है।
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माध्यमिक व सीनियर वर्ग में इन शिक्षकों की है कमी
जानकारी के अनुसार बौंदकलां राजकीय स्कूल में तीन शाखाएं हैं। प्राइमरी शाखा में करीब 125 बच्चे हैं जबकि माध्यमिक शाखा में 132 बच्चे हैं। माध्यमिक शाखा के बच्चों का हिंदी अध्यापक की कमी बेहद खल रही है। वहीं, सीनियर कक्षाओं के लिए गणित, फिजिक्स व कॉमर्स के शिक्षक नहीं है। शिक्षकों की कमी के चलते स्कूल पर तालाबंदी भी हो चुकी है लेकिन इसके बाद भी शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया।
शिक्षा विभाग हिंदी शिक्षक भेजे तभी होगी समस्या हल : प्रधानाचार्य
विद्यालय में मिडिल विंग में हिंदी का एक ही पद है। जो शिक्षक भेजा गया था वह पहले से ही सस्पेंड चल रहा है। उसकी हाजिरी भी डीईईओ कार्यालय भिवानी में लगती है। ऐसे में यहां हिंदी पढ़ाने के लिए कोई भी टीचर नहीं है। मजबूरीवश संस्कृत टीचर और एक जेबीटी प्रशिक्षिका की मदद ली जा रही है।
देवदत्त कौशिक, प्रधानाचार्य, राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल
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बौंदकलां।
बौंदकलां के राजकीय विद्यालय में माध्यमिक व सीनियर कक्षाओं को पढ़ाने के लिए स्कूल में शिक्षकों की कमी है। इसके अलावा छठीं से 8वीं कक्षा के 132 बच्चों को पढ़ाने के लिए कोई हिंदी का शिक्षक नहीं है। वहीं शिक्षा विभाग ने 12 सितंबर को शिक्षा विभाग ने एक सस्पेंड टीचर का ट्रांसफर यहां किया था। लेकिन उक्त शिक्षक अपनी हाजिरी भिवानी डीईईओ कार्यालय में लगा रहा है। माध्यमिक वर्ग की कक्षाओं को हिंदी पढ़ाने का जिम्मा स्कूल प्रबंधन समिति एक संस्कृत शिक्षिका को सौंप रखा है। ऐसे में विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित हो रही है लेकिन शिक्षा विभाग गहरी नींद में सो रहा है। इन अव्यवस्थाओं के चलते स्कूल में शिक्षा का स्तर गिरता जा रहा है और पहले की तुलना में अब बच्चों की तादाद भी काफी कम रह गई है।
गौरतलब है कि राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय की मिडिल विंग में कक्षा छठीं से आठवीं कक्षा तक पढ़ाने के लिए हिंदी विषय का एक ही पद शिक्षा विभाग की ओर से स्वीकृत किया गया। शिक्षा विभाग ने ट्रांसफर पॉलिसी के तहत हिंदी टीचर को अचीना के सरकारी विद्यालय से यहां भेज दिया गया। शिक्षक ने विद्यालय में 12 सितंबर को ही ज्वाइन किया था लेकिन विभाग की ओर से भेजा गया ये टीचर अचीना विद्यालय प्रकरण में पहले से ही सस्पेंड चल रहा है। इस सस्पेंड हिंदी टीचर की हाजिरी भी जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय भिवानी में ही लगती है।
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संस्कृत टीचर व जेबीटी प्रशिक्षिका पढ़ा रही हिंदी
मिडिल विंग में कक्षा छठी से लेकर आठवीं तक विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए संस्कृत विषय के टीचर द्वारा ही हिंदी पढ़ाई जा रही है। इसके साथ ही विद्यालय में अध्यापन का प्रशिक्षण ले रही जेबीटी प्रशिक्षिका भी 132 बच्चों को हिंदी पढ़ा रही है। हालांकि इसके बावजूद भी बच्चों की पढ़ाई काफी हद तक प्रभावित हो रही है। सूत्रों की मानें तो शिक्षकों की डिमांड कई दफा उच्चाधिकारियों के समक्ष उठाई जा चुकी है लेकिन अब तक इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया है।
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माध्यमिक व सीनियर वर्ग में इन शिक्षकों की है कमी
जानकारी के अनुसार बौंदकलां राजकीय स्कूल में तीन शाखाएं हैं। प्राइमरी शाखा में करीब 125 बच्चे हैं जबकि माध्यमिक शाखा में 132 बच्चे हैं। माध्यमिक शाखा के बच्चों का हिंदी अध्यापक की कमी बेहद खल रही है। वहीं, सीनियर कक्षाओं के लिए गणित, फिजिक्स व कॉमर्स के शिक्षक नहीं है। शिक्षकों की कमी के चलते स्कूल पर तालाबंदी भी हो चुकी है लेकिन इसके बाद भी शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया।
शिक्षा विभाग हिंदी शिक्षक भेजे तभी होगी समस्या हल : प्रधानाचार्य
विद्यालय में मिडिल विंग में हिंदी का एक ही पद है। जो शिक्षक भेजा गया था वह पहले से ही सस्पेंड चल रहा है। उसकी हाजिरी भी डीईईओ कार्यालय भिवानी में लगती है। ऐसे में यहां हिंदी पढ़ाने के लिए कोई भी टीचर नहीं है। मजबूरीवश संस्कृत टीचर और एक जेबीटी प्रशिक्षिका की मदद ली जा रही है।
देवदत्त कौशिक, प्रधानाचार्य, राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल