{"_id":"5a230a004f1c1b6e468b7fc0","slug":"161512245760-jhajjar-bahadurgarh-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"सुप्रीम कोर्ट ने किसानों को दी बड़ी राहत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सुप्रीम कोर्ट ने किसानों को दी बड़ी राहत
Updated Sun, 03 Dec 2017 01:46 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमर उजाला ब्यूरो
बहादुरगढ़।
करीब 22 साल पहले हुडा के रिहायशी सेक्टरों के लिए जमीन चले जाने से प्रभावित हुए चार गांवों के हजारों किसानों को सर्वोच्च न्यायालय ने बड़ी राहत दी है। जिस जमीन को सरकार ने दो-तीन लाख रुपये प्रति एकड़ में अधिग्रहीत किया था, अब उस भूमि का मुआवजा 20 लाख रुपये प्रति एकड़ तक देना होगा। चार तरह का ब्याज मिलाकर किसानों को करीब 50 लाख रुपये प्रति एकड़ मिलेंगे। फैसले से इन किसानों में खुशी की लहर दौड़ गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने हुडा के रिहायशी सेक्टरों के लिए अधिग्रहीत की गई किसानों की जमीन के मुआवजे में 22 साल पहले से ही 8 लाख रुपये प्रति एकड़ की बढ़ोतरी कर दी है। यानी किसानों को एक एकड़ का मूल मुआवजा 12 से 20 लाख रुपये तक मिलेगा। ऊपर से चार तरह का ब्याज जोड़कर किसानों को 50 से 55 लाख रुपये तक मिलेंगे। कोर्ट के इस फैसले से बहादुरगढ़, बीर बरकताबाद-नयागांव, बालोर और हसनपुर-परनाला के कई हजार किसानों को लाभ होगा। जमीन अधिग्रहण के वक्त सरकार ने किसानों को कोड़ियों के भाव मुआवजा दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने मुआवजा बढ़ाने का यह फैसला गत 17 नवंबर को पहली ही सुनवाई में दे दिया। राज्य को आदेशों के खिलाफ अपील करने के लिए छह महीने का समय दिया गया है।
इनको होगा लाभ
सुप्रीम कोर्ट के इन ताजा आदेशों से बहादुरगढ़ के पूर्व विधायक नफे सिंह राठी, हर्षदीप जेलदार व अन्य, जयराम राठी, वेद सिंह राठी, भीम सिंह, सूरत सिंह, बिजेंद्र नंबरदार, हरजिंद्र, तारीफ सिंह, रामकुमार सैनी, मांगेरामस राजे, चंदन सिंह, सुरते, कृष्ण, दौलतराम सैनी, रामरति, रणसिंह सैनी, सरजीत, सतबीर, सतनारायण, मदन जैन, उदय सिंह सैनी, महासिंह राठी, रण सिंह (3), राजन राठी, लच्छी सैनी, संतराम शर्मा व सतनारायण शर्मा को भी लाभ होगा। बीर बरकताबाद के किसानों रोहतास सैनी, महेंद्र, धर्मा, धारे, रामकुमार जुगती, जगबीर, दरियाव सिंह, पूर्व पंच कृष्ण, बलबीर, रामधारी, ओमप्रकाश, प्रकाशी, भूप सिंह व बलबीर पुत्र भरतू आदि और गांव बालोर के किसान राम सिंह, सतबीर सरपंच, रामकरण, रामचंद्र, नत्थू एडवोकेट, राजेंद्र व बलबीर आदि भी राहत पाने वाले किसानों में शामिल हैं।
विज्ञापन
चार गांवों की हजारों एकड़ जमीन की थी अधिग्रहीत
राज्य सरकार ने हुडा के रिहायशी सेक्टर विकसित करने के लिए इन चारों गांवों की हजारों एकड़ जमीन को अधिग्रहीत की थी। सेक्टर-9 व 9-ए के लिए सरकार ने सेक्शन-4 का नोटिस 12 मई 1995 को जारी किया। एलएओ ने 24 अप्रैल 1998 को अवार्ड घोषित किया। तब सरकार ने दो, अढ़ाई, तीन व चार लाख रुपये प्रति एकड़ की दर से मुआवजा दिया था। बहादुरगढ़ में दिल्ली रोड के साथ तीन एकड़ अंदर तक चार लाख, चाही जमीन का 2.50 लाख और बरानी जमीन का मुआवजा दिया था। अब सर्वोच्च न्यायालय ने सभी श्रेणियां ख़त्म करते हुए हर तरह की जमीन का मुआवजा 12 लाख रुपये प्रति एकड़ देने का आदेश दिया है।
--------------
किसानों को पर्याप्त मुआवजा नहीं मिला तो पहुंचे हाईकोर्ट
सेक्टर 1, 9, 9-ए, 10, 11, 12 व 13 के लिए ली गई जमीन के मुआवजे को कम बताते हुए राजेंद्र सिंह व अन्य किसानों ने जिला अदालत में मुआवजा बढ़ाने की गुहार लगाई। पर्याप्त राहत नहीं मिली तो ये किसान हाई कोर्ट गए। यहां से भी निराशा हाथ लगी तो 21 साल के बाद वर्ष 2017 में एसएलपी नंबर 31831 के जरिए सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई। किसानों ने सेक्टर-9 के करीब सामने स्थित राधा स्वामी सत्संग भवन के लिए 19,36000 रुपये प्रति एकड़ व 10 फीसद ब्याज की दर से जमीन बिकने का उदाहरण देते हुए बाजार भाव पर मुआवजा दिलाने की मांग की। मुआवजा बढ़ाने की मांग को लेकर लगाई 71 अन्य याचिकाओं को भी अदालत ने उपरोक्त याचिका के साथ जोड़ कर गत 17 नवंबर को सुनवाई की और किसानों को बड़ी राहत दी।
क्या कहते हैं किसान
तत्कालीन सरकार ने हमारी जमीन कोड़ियों के भाव ले ली थी। हमारे रोजगार ख़त्म हो गए थे। दो दशक से अधिक समय तक हम खून के आंसू रोए। लेकिन न्यायपालिका में भरोसा था इसलिए केस लड़ते रहे। अंतत: सुप्रीम कोर्ट ने गत 17 नवंबर को पहली ही सुनवाई में हम किसानों के हक़ में फैसला देकर न्यायपालिका में हमारा विश्वास अधिक गहरा कर दिया है।
-रवींद्र सैनी, याचिकाकर्ता किसान
--
जल्द मुआवजे की मांग सुप्रीम कोर्ट में हमारे मामलों की पैरवी चंडीगढ़ के वकील एमएल शर्मा और दिल्ली के वकील तरुण गुप्ता ने की। जस्टिस नागेश्वर राव और जस्टिस अरुण मिश्रा की खंडपीठ ने फैसला दिया। अब सरकार को हमारा सारा बकाया मुआवजा शीघ्र जारी करना चाहिए ताकि हम सभी किसान अपने रोजगार के लिए इस पैसे का सदुपयोग कर सकें।
-नरेंद्र राठी, याचिकाकर्ता किसान
सुप्रीम कोर्ट की बड़ी राहत : प्रभावित किसानों को मिलेगा छह गुणा अधिक पैसा
-बहादुरगढ़ व तीन गांवों के हजारों किसानों को होगा फायदा
-हुडा ने कोड़ियों के भाव दिया था मुआवजा
-करीब 22 साल पहले अधिग्रहीत की गई थी जमीन
-किसानों की सरकार से जल्द मुआवजा देने की मांग
विज्ञापन
बहादुरगढ़।
करीब 22 साल पहले हुडा के रिहायशी सेक्टरों के लिए जमीन चले जाने से प्रभावित हुए चार गांवों के हजारों किसानों को सर्वोच्च न्यायालय ने बड़ी राहत दी है। जिस जमीन को सरकार ने दो-तीन लाख रुपये प्रति एकड़ में अधिग्रहीत किया था, अब उस भूमि का मुआवजा 20 लाख रुपये प्रति एकड़ तक देना होगा। चार तरह का ब्याज मिलाकर किसानों को करीब 50 लाख रुपये प्रति एकड़ मिलेंगे। फैसले से इन किसानों में खुशी की लहर दौड़ गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने हुडा के रिहायशी सेक्टरों के लिए अधिग्रहीत की गई किसानों की जमीन के मुआवजे में 22 साल पहले से ही 8 लाख रुपये प्रति एकड़ की बढ़ोतरी कर दी है। यानी किसानों को एक एकड़ का मूल मुआवजा 12 से 20 लाख रुपये तक मिलेगा। ऊपर से चार तरह का ब्याज जोड़कर किसानों को 50 से 55 लाख रुपये तक मिलेंगे। कोर्ट के इस फैसले से बहादुरगढ़, बीर बरकताबाद-नयागांव, बालोर और हसनपुर-परनाला के कई हजार किसानों को लाभ होगा। जमीन अधिग्रहण के वक्त सरकार ने किसानों को कोड़ियों के भाव मुआवजा दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने मुआवजा बढ़ाने का यह फैसला गत 17 नवंबर को पहली ही सुनवाई में दे दिया। राज्य को आदेशों के खिलाफ अपील करने के लिए छह महीने का समय दिया गया है।
विज्ञापन
इनको होगा लाभ
सुप्रीम कोर्ट के इन ताजा आदेशों से बहादुरगढ़ के पूर्व विधायक नफे सिंह राठी, हर्षदीप जेलदार व अन्य, जयराम राठी, वेद सिंह राठी, भीम सिंह, सूरत सिंह, बिजेंद्र नंबरदार, हरजिंद्र, तारीफ सिंह, रामकुमार सैनी, मांगेरामस राजे, चंदन सिंह, सुरते, कृष्ण, दौलतराम सैनी, रामरति, रणसिंह सैनी, सरजीत, सतबीर, सतनारायण, मदन जैन, उदय सिंह सैनी, महासिंह राठी, रण सिंह (3), राजन राठी, लच्छी सैनी, संतराम शर्मा व सतनारायण शर्मा को भी लाभ होगा। बीर बरकताबाद के किसानों रोहतास सैनी, महेंद्र, धर्मा, धारे, रामकुमार जुगती, जगबीर, दरियाव सिंह, पूर्व पंच कृष्ण, बलबीर, रामधारी, ओमप्रकाश, प्रकाशी, भूप सिंह व बलबीर पुत्र भरतू आदि और गांव बालोर के किसान राम सिंह, सतबीर सरपंच, रामकरण, रामचंद्र, नत्थू एडवोकेट, राजेंद्र व बलबीर आदि भी राहत पाने वाले किसानों में शामिल हैं।
विज्ञापन
चार गांवों की हजारों एकड़ जमीन की थी अधिग्रहीत
राज्य सरकार ने हुडा के रिहायशी सेक्टर विकसित करने के लिए इन चारों गांवों की हजारों एकड़ जमीन को अधिग्रहीत की थी। सेक्टर-9 व 9-ए के लिए सरकार ने सेक्शन-4 का नोटिस 12 मई 1995 को जारी किया। एलएओ ने 24 अप्रैल 1998 को अवार्ड घोषित किया। तब सरकार ने दो, अढ़ाई, तीन व चार लाख रुपये प्रति एकड़ की दर से मुआवजा दिया था। बहादुरगढ़ में दिल्ली रोड के साथ तीन एकड़ अंदर तक चार लाख, चाही जमीन का 2.50 लाख और बरानी जमीन का मुआवजा दिया था। अब सर्वोच्च न्यायालय ने सभी श्रेणियां ख़त्म करते हुए हर तरह की जमीन का मुआवजा 12 लाख रुपये प्रति एकड़ देने का आदेश दिया है।
--------------
किसानों को पर्याप्त मुआवजा नहीं मिला तो पहुंचे हाईकोर्ट
सेक्टर 1, 9, 9-ए, 10, 11, 12 व 13 के लिए ली गई जमीन के मुआवजे को कम बताते हुए राजेंद्र सिंह व अन्य किसानों ने जिला अदालत में मुआवजा बढ़ाने की गुहार लगाई। पर्याप्त राहत नहीं मिली तो ये किसान हाई कोर्ट गए। यहां से भी निराशा हाथ लगी तो 21 साल के बाद वर्ष 2017 में एसएलपी नंबर 31831 के जरिए सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई। किसानों ने सेक्टर-9 के करीब सामने स्थित राधा स्वामी सत्संग भवन के लिए 19,36000 रुपये प्रति एकड़ व 10 फीसद ब्याज की दर से जमीन बिकने का उदाहरण देते हुए बाजार भाव पर मुआवजा दिलाने की मांग की। मुआवजा बढ़ाने की मांग को लेकर लगाई 71 अन्य याचिकाओं को भी अदालत ने उपरोक्त याचिका के साथ जोड़ कर गत 17 नवंबर को सुनवाई की और किसानों को बड़ी राहत दी।
क्या कहते हैं किसान
तत्कालीन सरकार ने हमारी जमीन कोड़ियों के भाव ले ली थी। हमारे रोजगार ख़त्म हो गए थे। दो दशक से अधिक समय तक हम खून के आंसू रोए। लेकिन न्यायपालिका में भरोसा था इसलिए केस लड़ते रहे। अंतत: सुप्रीम कोर्ट ने गत 17 नवंबर को पहली ही सुनवाई में हम किसानों के हक़ में फैसला देकर न्यायपालिका में हमारा विश्वास अधिक गहरा कर दिया है।
-रवींद्र सैनी, याचिकाकर्ता किसान
--
जल्द मुआवजे की मांग सुप्रीम कोर्ट में हमारे मामलों की पैरवी चंडीगढ़ के वकील एमएल शर्मा और दिल्ली के वकील तरुण गुप्ता ने की। जस्टिस नागेश्वर राव और जस्टिस अरुण मिश्रा की खंडपीठ ने फैसला दिया। अब सरकार को हमारा सारा बकाया मुआवजा शीघ्र जारी करना चाहिए ताकि हम सभी किसान अपने रोजगार के लिए इस पैसे का सदुपयोग कर सकें।
-नरेंद्र राठी, याचिकाकर्ता किसान
सुप्रीम कोर्ट की बड़ी राहत : प्रभावित किसानों को मिलेगा छह गुणा अधिक पैसा
-बहादुरगढ़ व तीन गांवों के हजारों किसानों को होगा फायदा
-हुडा ने कोड़ियों के भाव दिया था मुआवजा
-करीब 22 साल पहले अधिग्रहीत की गई थी जमीन
-किसानों की सरकार से जल्द मुआवजा देने की मांग