{"_id":"598a17cb4f1c1b896c8b4ad0","slug":"161502222283-jhajjar-bahadurgarh-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"संसार रूपी अखाड़े में जीतने के लिए प्रतिदिन आत्मिक दृष्टि और वृति को पक्का करने की आवश्यकता है: प्रेमलता","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
संसार रूपी अखाड़े में जीतने के लिए प्रतिदिन आत्मिक दृष्टि और वृति को पक्का करने की आवश्यकता है: प्रेमलता
Updated Wed, 09 Aug 2017 01:28 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आध्यात्मिकता के लिए सभी को समझने की आवश्यकता: प्रेमलता
अमर उजाला ब्यूरो
चरखी दादरी।
इस सृष्टि रूपी रंगमंच पर सभी आत्माएं एक्टर के रूप में एक्टिंग कर रही हैं और डायरेक्टर स्वयं परमात्मा है। इसलिए हर आत्मा रूपी एक्टर को श्रेष्ठ एक्टिंग करने के लिए डायरेक्टर से जुड़ना आवश्यक है। आध्यात्मिकता के लिए एक वर्ग विशेष को नहीं बल्कि सबको समझने की आवश्यकता है। ये उदगार प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की चरखी दादरी शाखा की सेवाकेंद्र संचालिका ब्रह्माकुमारी प्रेमलता ने व्यक्त किए।
उन्होंने गांव बलाली के कोच महावीर फौगाट को पावनता का धागा बांधते हुए कहा कि जिस तरह अखाड़े में जीतने के लिए प्रतिदिन अभ्यास की आवश्यकता पड़ती है। उसी तरह संसार रूपी अखाड़े में जीतने के लिए प्रतिदिन आत्मिक दृष्टि और वृत्ति को पक्का करने की आवश्यकता है। इस अवसर पर महावीर फौगाट ने कहा कि अगर हमें जीवन से असुरक्षा और भ्रष्टाचार को खत्म करना है तो अवश्य ही इस विद्यालय की शिक्षाओं को जीवन में धारण करना होगा।
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
चरखी दादरी।
इस सृष्टि रूपी रंगमंच पर सभी आत्माएं एक्टर के रूप में एक्टिंग कर रही हैं और डायरेक्टर स्वयं परमात्मा है। इसलिए हर आत्मा रूपी एक्टर को श्रेष्ठ एक्टिंग करने के लिए डायरेक्टर से जुड़ना आवश्यक है। आध्यात्मिकता के लिए एक वर्ग विशेष को नहीं बल्कि सबको समझने की आवश्यकता है। ये उदगार प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की चरखी दादरी शाखा की सेवाकेंद्र संचालिका ब्रह्माकुमारी प्रेमलता ने व्यक्त किए।
उन्होंने गांव बलाली के कोच महावीर फौगाट को पावनता का धागा बांधते हुए कहा कि जिस तरह अखाड़े में जीतने के लिए प्रतिदिन अभ्यास की आवश्यकता पड़ती है। उसी तरह संसार रूपी अखाड़े में जीतने के लिए प्रतिदिन आत्मिक दृष्टि और वृत्ति को पक्का करने की आवश्यकता है। इस अवसर पर महावीर फौगाट ने कहा कि अगर हमें जीवन से असुरक्षा और भ्रष्टाचार को खत्म करना है तो अवश्य ही इस विद्यालय की शिक्षाओं को जीवन में धारण करना होगा।
विज्ञापन