{"_id":"5d0fd18f8ebc3e2ad6490480","slug":"15613177587-charkhidadri-news26","type":"story","status":"publish","title_hn":"मोगों की संख्या पर्याप्त नहीं होने से हो रही पानी की चोरी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मोगों की संख्या पर्याप्त नहीं होने से हो रही पानी की चोरी
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
चरखी दादरी। जिले में नहरी पानी की कमी, जमीनी पानी खारा होने और नहरों में सरकारी मोगों की संख्या कम होने की वजह से किसान नहरी पानी की ज्यादा मात्रा में चोरी करने को विवश हैं। जिले को हर टर्न में 300 क्यूसेक पानी कम मिल रहा है यही वजह से पानी नहरों की टेल तक नहीं पहुंच पा रहा है और जलघरों में भी पानी का संकट बना रहता है। जिले में हर 15 दिन में 1200 क्यूसेक पानी की जरूरत है तब जाकर सिंचाई व पेयजल संकट से निजात संभव है। गत 11 जून से नहरों में पानी चल रहा है लेकिन आज तक एक भी टेल फीड नहीं हुई है।
पिछले कुछ सालों से जिले में मानसून की औसत से काफी कम बारिश हुई है। मई-जून माह में पानी की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। नहरी पानी के जरिए किसान जैसे-तैसे फसलों की सिंचाई करते है। जिले की सभी माइनरों व डिस्टीब्यूटरी के अलावा मेन नहरों में पानी एक साथ चलता है। जिले की मेन लोहारू नहर है। इस नहर की क्षमता 900 क्यूसेक पानी तक है। इसके तहत काफी डिस्टीब्यूटरी व माइनर हैं। 2017 में मानसून सीजन में जिले की 41 बड़ी व छोटी नहरों के अंतिम छोर तक पानी पहुंचा था। उसके बाद से पानी टेल तक नहीं पहुंच पा रहा है। 2017 में जिले की नंगला माइनर की टेल 39 साल बाद फीड हुई थी। इसी प्रकार कालूवाला माइनर की टेल पर 37 साल बाद पानी पहुंचा था। कुड़ल डिस्टीब्यूटरी में 20 साल बाद और भैरवी माइनर की टेल 27 साल बाद फीड हुई थी। जिससे नहरी पानी की सदैव कमी बनी रहती है। जिले को हर पखवारे 1200 क्यूसेक पानी की जरूरत है तब जाकर सिंचाई व पेयजल की पूर्ति संभव है। पानी की कमी की वजह से किसान नहरी पानी की ज्यादा मात्रा में चोरी कर रहे हैं। जिले में अधिकतर एरिया में भूमिगत जलस्तर खारा होने की वजह से किसान नहरी पानी की जरूरत महसूस करते हैं। जिन किसानों ने सिंचाई के लिए अपने खेतों में बोरिंग ट्यूबवेल कर रखे हैं वो ट्यूबवेल भी नहरी पानी पर ही निर्भर बने हुए हैं। नहरी एवं तराई एरिया में ही ज्यादा संख्या में बोरिंग ट्यूबवेल लगे हुए हैं। मानसून सीजन मेेें पर्याप्त बारिश न होने व नहरी पानी का संकट बढ़ने पर यह ट्यूबवेल भी फेल हो जाते हैं।
ये हैं जिले की छोटी-बड़ी नहरें व माइनर
लोहरवाड़ा माइनर, लोहारू नहर, समसपुर माइनर, कितलाना डिस्टीब्यूटरी, भैरवी माइनर, साहुवास माइनर, पांडवान माइनर, अटेला डिस्टीब्यूटरी, बिरही माइनर, बिरही सब माइनर, डूडीवाला डिस्टीब्यूटरी, रामपुरा डिस्टीब्यूटरी, कुड़ल डिस्टीब्यूटरी, कालूवाला माइनर, नंगला माइनर, उमरवास माइनर, केहरपुरा, भारीवास माइनर, भारीवास सब माइनर, पोकरवास माइनर, पोकरवास सब माइनर, पिचौपा डिस्टीब्यूटरी, हड़ोदी डिस्टीब्यूटरी, गोकल डिस्टीब्यूटरी, पिचौपा माइनर, कुब्जानगर माइनर, गुडाना माइनर ,शीशवाला सब माइनर, झोझू कलां माइनर, बलाली माइनर, बलाली सब माइनर, खेड़ी सनसनवाल माइनर, 1-आर माइनर बधवाना, रामनगर माइनर, मकड़ाना सब माइनर, दूधवा माइनर, दूधवा रेजिंग माइनर, पैतावास कलां माइनर, मानकावास माइनर, रूपगढ़ माइनर, गौरीपुर माइनर व प्रहलादगढ़ माइनर प्रमुख रूप से शामिल हैं।
विज्ञापन
नहरों में सरकारी मोगों की है कमी
सिंचाई विभाग के नियम एवं प्रावधानों के अनुसार किसान भी किसान को नहर में लगे सरकारी मोगे से ही सिंचाई करनी होती है। मोगा लगने पर खेतों में सिंचाई के लिए नाले भी होने चाहिए ताकि किसान बारी-बारी से सिंचाई कर सकें। मोगे से सिंचाई के लिए प्रति एकड़ समय भी निर्धारित होता है। सरकारी मोगे सेे सिंचाई करने पर किसान से रबी-खरीफ दोनों फसलों का सिंचाई के एवज में प्रति एकड़ आबियाना वसूला जाता है। नहरों में मोगों की पर्याप्त संख्या न होने की वजह से किसान आनन-फानन में नहर पर इंजन व साइफन पाइप लगाकर पानी का उठान कर लेते हैं जो पानी की चोरी मानी जाती है। यह मोगे सभी माइनर, सब माइनर व डिस्टीब्यूटरी में लगाए जाने का प्रावधान है ताकि किसान सिंचाई कर सके। नहर की पानी की टर्न 15 दिन की होती है ऐसे में किसान चाहते हैं समय रहते वे सिंचाई कर ले।
बाक्स: किसान बोले: पर्याप्त मात्रा में नहीं मिलता नहरा पानी
किसानों को पर्याप्त मात्रा में नहरी पानी मिलना चाहिए। जलघरों में भी पानी नहीं पहुंच पा रहा है। सिंचाई के लिए और संसाधन नहीं हैं। पानी पूरा मिलना चाहिए।
किसान उदयवीर
नहरों में मोगों की भी कमी हैं। पर्याप्त संख्या में नहरों में मोगे लगाने चाहिए ताकि किसान समय पर अपनी फसलों की सिंचाई कर सकें। नहरों पानी कम मात्रा में मिलता है।
अनूप सिंह
नहरों में पर्याप्त मात्रा में पानी मिले और सरकारी मोगे के साथ पक्का नाला खेतों में बनाना चाहिए। जलघरों के लिए भी पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं मिल पाता है। सिंचाई के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी मिलना चाहिए।
महेंद्र सिंह
नहरों में उचित दूरी पर सरकारी मोगे लगाकर पक्के नाले बनाने चाहिए ताकि सभी किसान बारी-बारी से खेतों में सिंचाई कर सके। इससे पानी की चोरी भी नहीं होगी। पानी कम मात्रा में मिलता है।
राकेश
नियमानुसार किसान को नहर में लगे सरकारी मोगे से ही सिंचाई करनी होती है। विभाग ने जरूरत के अनुसार मोगे लगा रखे हैं। किसानों को पानी की चोरी नहीं करनी चाहिए ताकि पानी टेल तक पहुंचे और सबको पर्याप्त मात्रा में पानी मिल सके।
राहुल छिल्लर, एसडीओ, सिंचाई विभाग
पिछले कुछ सालों से जिले में मानसून की औसत से काफी कम बारिश हुई है। मई-जून माह में पानी की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। नहरी पानी के जरिए किसान जैसे-तैसे फसलों की सिंचाई करते है। जिले की सभी माइनरों व डिस्टीब्यूटरी के अलावा मेन नहरों में पानी एक साथ चलता है। जिले की मेन लोहारू नहर है। इस नहर की क्षमता 900 क्यूसेक पानी तक है। इसके तहत काफी डिस्टीब्यूटरी व माइनर हैं। 2017 में मानसून सीजन में जिले की 41 बड़ी व छोटी नहरों के अंतिम छोर तक पानी पहुंचा था। उसके बाद से पानी टेल तक नहीं पहुंच पा रहा है। 2017 में जिले की नंगला माइनर की टेल 39 साल बाद फीड हुई थी। इसी प्रकार कालूवाला माइनर की टेल पर 37 साल बाद पानी पहुंचा था। कुड़ल डिस्टीब्यूटरी में 20 साल बाद और भैरवी माइनर की टेल 27 साल बाद फीड हुई थी। जिससे नहरी पानी की सदैव कमी बनी रहती है। जिले को हर पखवारे 1200 क्यूसेक पानी की जरूरत है तब जाकर सिंचाई व पेयजल की पूर्ति संभव है। पानी की कमी की वजह से किसान नहरी पानी की ज्यादा मात्रा में चोरी कर रहे हैं। जिले में अधिकतर एरिया में भूमिगत जलस्तर खारा होने की वजह से किसान नहरी पानी की जरूरत महसूस करते हैं। जिन किसानों ने सिंचाई के लिए अपने खेतों में बोरिंग ट्यूबवेल कर रखे हैं वो ट्यूबवेल भी नहरी पानी पर ही निर्भर बने हुए हैं। नहरी एवं तराई एरिया में ही ज्यादा संख्या में बोरिंग ट्यूबवेल लगे हुए हैं। मानसून सीजन मेेें पर्याप्त बारिश न होने व नहरी पानी का संकट बढ़ने पर यह ट्यूबवेल भी फेल हो जाते हैं।
विज्ञापन
ये हैं जिले की छोटी-बड़ी नहरें व माइनर
लोहरवाड़ा माइनर, लोहारू नहर, समसपुर माइनर, कितलाना डिस्टीब्यूटरी, भैरवी माइनर, साहुवास माइनर, पांडवान माइनर, अटेला डिस्टीब्यूटरी, बिरही माइनर, बिरही सब माइनर, डूडीवाला डिस्टीब्यूटरी, रामपुरा डिस्टीब्यूटरी, कुड़ल डिस्टीब्यूटरी, कालूवाला माइनर, नंगला माइनर, उमरवास माइनर, केहरपुरा, भारीवास माइनर, भारीवास सब माइनर, पोकरवास माइनर, पोकरवास सब माइनर, पिचौपा डिस्टीब्यूटरी, हड़ोदी डिस्टीब्यूटरी, गोकल डिस्टीब्यूटरी, पिचौपा माइनर, कुब्जानगर माइनर, गुडाना माइनर ,शीशवाला सब माइनर, झोझू कलां माइनर, बलाली माइनर, बलाली सब माइनर, खेड़ी सनसनवाल माइनर, 1-आर माइनर बधवाना, रामनगर माइनर, मकड़ाना सब माइनर, दूधवा माइनर, दूधवा रेजिंग माइनर, पैतावास कलां माइनर, मानकावास माइनर, रूपगढ़ माइनर, गौरीपुर माइनर व प्रहलादगढ़ माइनर प्रमुख रूप से शामिल हैं।
विज्ञापन
नहरों में सरकारी मोगों की है कमी
सिंचाई विभाग के नियम एवं प्रावधानों के अनुसार किसान भी किसान को नहर में लगे सरकारी मोगे से ही सिंचाई करनी होती है। मोगा लगने पर खेतों में सिंचाई के लिए नाले भी होने चाहिए ताकि किसान बारी-बारी से सिंचाई कर सकें। मोगे से सिंचाई के लिए प्रति एकड़ समय भी निर्धारित होता है। सरकारी मोगे सेे सिंचाई करने पर किसान से रबी-खरीफ दोनों फसलों का सिंचाई के एवज में प्रति एकड़ आबियाना वसूला जाता है। नहरों में मोगों की पर्याप्त संख्या न होने की वजह से किसान आनन-फानन में नहर पर इंजन व साइफन पाइप लगाकर पानी का उठान कर लेते हैं जो पानी की चोरी मानी जाती है। यह मोगे सभी माइनर, सब माइनर व डिस्टीब्यूटरी में लगाए जाने का प्रावधान है ताकि किसान सिंचाई कर सके। नहर की पानी की टर्न 15 दिन की होती है ऐसे में किसान चाहते हैं समय रहते वे सिंचाई कर ले।
बाक्स: किसान बोले: पर्याप्त मात्रा में नहीं मिलता नहरा पानी
किसानों को पर्याप्त मात्रा में नहरी पानी मिलना चाहिए। जलघरों में भी पानी नहीं पहुंच पा रहा है। सिंचाई के लिए और संसाधन नहीं हैं। पानी पूरा मिलना चाहिए।
किसान उदयवीर
नहरों में मोगों की भी कमी हैं। पर्याप्त संख्या में नहरों में मोगे लगाने चाहिए ताकि किसान समय पर अपनी फसलों की सिंचाई कर सकें। नहरों पानी कम मात्रा में मिलता है।
अनूप सिंह
नहरों में पर्याप्त मात्रा में पानी मिले और सरकारी मोगे के साथ पक्का नाला खेतों में बनाना चाहिए। जलघरों के लिए भी पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं मिल पाता है। सिंचाई के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी मिलना चाहिए।
महेंद्र सिंह
नहरों में उचित दूरी पर सरकारी मोगे लगाकर पक्के नाले बनाने चाहिए ताकि सभी किसान बारी-बारी से खेतों में सिंचाई कर सके। इससे पानी की चोरी भी नहीं होगी। पानी कम मात्रा में मिलता है।
राकेश
नियमानुसार किसान को नहर में लगे सरकारी मोगे से ही सिंचाई करनी होती है। विभाग ने जरूरत के अनुसार मोगे लगा रखे हैं। किसानों को पानी की चोरी नहीं करनी चाहिए ताकि पानी टेल तक पहुंचे और सबको पर्याप्त मात्रा में पानी मिल सके।
राहुल छिल्लर, एसडीओ, सिंचाई विभाग