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ओडीएफ के तहत 7500 परिवारों ने बनवाए थे शौचालय, दो साल बाद भी नौ करोड़ की राशि अटकी
Updated Mon, 10 Dec 2018 12:52 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
चरखी दादरी। जिले को खुले में शौच मुक्त बनाने के लिए दो साल पहले बनाए गए 7500 शौचालयों की 9 करोड़ की पेमेंट अटकी पड़ी है। सरकार के निर्देश पर प्रति शौचालय 12 हजार रुपये की राशि खर्च की गई। सरकार के निर्देश पर पंचायतों व नगर परिषद के जरिए ये शौचालय बनवाए गए थे। इनमें से 20 फीसदी शौचालयों पर सहायता राशि नहीं मिलने से लोग गेट तक नहीं लगवा पाए हैं। ऐसे में ओडीएफ अभियान को यह बड़ा झटका है।
स्वच्छता के लक्ष्य को हासिल करने के लिए सरकार हर पहलू पर काम कर रही है। इसके लिए हर स्तर पर काम शुरू कर रखा है लेकिन खुले में शौच मुक्त बनाने की मुहिम को सिरे चढ़ाना सबसे मुश्किल बना हुआ है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में खुले में शौच करने पर पूर्णतया रोक लगाना कठिन कार्य बना हुआ है। हालांकि इसके लिए गांवों में निगरानी कमेटी भी बना रखी हैं। समय-समय पर जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं। ग्राम पंचायतों की भी मदद ली जा रही है। गांवों में कचरे के समायोजन पर भी फोकस किया जा रहा है लेकिन गांवों की बाहरी सीमा में एकत्र कचरा परेशानी का कारण बन रहा है। गांव व शहर में सार्वजनिक भागों में सफाई के लिए विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। स्कूल, आंगनबाड़ी, मंदिर परिसर, चौपाल, चौक व मेन गलियों में विशेष सफाई अभियान चलाए जा रहे हैं।
2016 में बनाए गए थे शौचालय
खुले में शौचमुक्त मुहिम के तहत जिले में 2016 के दौरान 7500 शौचालय बनाए गए थे। इनमें सार्वजनिक शौचालय भी शामिल हैं। इसके अलावा जिन जरूरतमंद लोगों को शौचालयों की जरूरत थी वहां प्रति शौचालय 12 हजार रुपये का बजट खर्च किया गया। ग्राम पंचायतों को निर्देश दिए गए कि जरूरत के अनुसार गंावों में घरों में शौचालय बनवाए जाएं ताकि लोगों का खुले में शौच करने का सिलसिला बंद हो सके और गांव को सुंदर व स्वच्छ बनाया जा सके। इसके लिए हर गांव में यह शौचालय बनाए गए।
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अब तक शौचालय निर्माण की पेमेंट नहीं मिली
दो साल बीतने पर भी इन शौचालयों की पेमेंट सरकार की ओर से जारी नहीं की गई है। गांवों में पंचायत के पीआरआई फंड से भी यह शौचालय बनवाए गए। उस समय पंचायतों से कहा गया था कि शौचालय बनने के बाद इनकी लागत का बजट मुहैया करवा दिया जाएगा लेकिन आज तक यह बजट नहीं मिल सका है। ऐसे में ओडीएफ मुहिम का लक्ष्य पूरा नहीं हो पा रहा है। स्वच्छता को लेकर अब पंचायतों का भी मनोबल टूट रहा है।
किसी ने कर्ज लेकर बनवाया तो कोई नहीं लगवा पाया गेट
हमने करीब सवा साल पहले शौचालय बनवाया था। उस समय सात हजार रुपये की राशि मिली थी। लंबा इंतजार करने के बाद भी सहायता राशि नहीं मिली तो साढ़े पांच हजार अपनी जेब से लगाने पड़े।
-सुंदर देवी, वार्ड-11 निवासी
मुझे चेक द्वारा करीब डेढ़ साल पहले सात हजार रुपये की राशि मिली थी। इसके बाद से ही दूसरी किश्त का इंतजार है। हमने पांच हजार रुपये कर्ज लेकर शौचालय का निर्माण कराया था।
मनभरी देवी, वाल्मीकि नगर निवासी
- करीब दो साल पहले 13 हजार रुपये खर्च कर शौचालय का निर्माण कराया था। अब तक सात हजार रुपये का एक ही चेक हमें मिला है और दूसरे का लंबे समय से इंतजार है। अधिकारी ठोस जवाब नहीं दे रहे।
-पिंकी, कबीर नगर निवासी
मैंने घर में शौचालय बनवाया था और उस समय 12 हजार रुपये की सहायता राशि सरकार द्वारा देने का अधिकारियों ने आश्वासन दिया था। अब तक सात हजार ही मिले है जिसके चलते गेट नहीं लगवा पा रहा हूं।
-विक्रम, कबीर नगर निवासी
कुछ बजट एप्रूव हो गया है। इस बजट से पहले पंचायतों द्वारा खर्च की गई राशि का भुगतान किया जाएगा। जल्द ही यह पैसा मिलने पर शौचालयों के निर्माण की पेमेंट का भुगतान कर दिया जाएगा। पंचायतें इस मुहिम में लगी रहें और ग्रामीणों को भी जागरूक करें।
- डॉ. मनोज कुमार, अतिरिक्त उपायुक्त
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चरखी दादरी। जिले को खुले में शौच मुक्त बनाने के लिए दो साल पहले बनाए गए 7500 शौचालयों की 9 करोड़ की पेमेंट अटकी पड़ी है। सरकार के निर्देश पर प्रति शौचालय 12 हजार रुपये की राशि खर्च की गई। सरकार के निर्देश पर पंचायतों व नगर परिषद के जरिए ये शौचालय बनवाए गए थे। इनमें से 20 फीसदी शौचालयों पर सहायता राशि नहीं मिलने से लोग गेट तक नहीं लगवा पाए हैं। ऐसे में ओडीएफ अभियान को यह बड़ा झटका है।
स्वच्छता के लक्ष्य को हासिल करने के लिए सरकार हर पहलू पर काम कर रही है। इसके लिए हर स्तर पर काम शुरू कर रखा है लेकिन खुले में शौच मुक्त बनाने की मुहिम को सिरे चढ़ाना सबसे मुश्किल बना हुआ है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में खुले में शौच करने पर पूर्णतया रोक लगाना कठिन कार्य बना हुआ है। हालांकि इसके लिए गांवों में निगरानी कमेटी भी बना रखी हैं। समय-समय पर जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं। ग्राम पंचायतों की भी मदद ली जा रही है। गांवों में कचरे के समायोजन पर भी फोकस किया जा रहा है लेकिन गांवों की बाहरी सीमा में एकत्र कचरा परेशानी का कारण बन रहा है। गांव व शहर में सार्वजनिक भागों में सफाई के लिए विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। स्कूल, आंगनबाड़ी, मंदिर परिसर, चौपाल, चौक व मेन गलियों में विशेष सफाई अभियान चलाए जा रहे हैं।
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2016 में बनाए गए थे शौचालय
खुले में शौचमुक्त मुहिम के तहत जिले में 2016 के दौरान 7500 शौचालय बनाए गए थे। इनमें सार्वजनिक शौचालय भी शामिल हैं। इसके अलावा जिन जरूरतमंद लोगों को शौचालयों की जरूरत थी वहां प्रति शौचालय 12 हजार रुपये का बजट खर्च किया गया। ग्राम पंचायतों को निर्देश दिए गए कि जरूरत के अनुसार गंावों में घरों में शौचालय बनवाए जाएं ताकि लोगों का खुले में शौच करने का सिलसिला बंद हो सके और गांव को सुंदर व स्वच्छ बनाया जा सके। इसके लिए हर गांव में यह शौचालय बनाए गए।
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अब तक शौचालय निर्माण की पेमेंट नहीं मिली
दो साल बीतने पर भी इन शौचालयों की पेमेंट सरकार की ओर से जारी नहीं की गई है। गांवों में पंचायत के पीआरआई फंड से भी यह शौचालय बनवाए गए। उस समय पंचायतों से कहा गया था कि शौचालय बनने के बाद इनकी लागत का बजट मुहैया करवा दिया जाएगा लेकिन आज तक यह बजट नहीं मिल सका है। ऐसे में ओडीएफ मुहिम का लक्ष्य पूरा नहीं हो पा रहा है। स्वच्छता को लेकर अब पंचायतों का भी मनोबल टूट रहा है।
किसी ने कर्ज लेकर बनवाया तो कोई नहीं लगवा पाया गेट
हमने करीब सवा साल पहले शौचालय बनवाया था। उस समय सात हजार रुपये की राशि मिली थी। लंबा इंतजार करने के बाद भी सहायता राशि नहीं मिली तो साढ़े पांच हजार अपनी जेब से लगाने पड़े।
-सुंदर देवी, वार्ड-11 निवासी
मुझे चेक द्वारा करीब डेढ़ साल पहले सात हजार रुपये की राशि मिली थी। इसके बाद से ही दूसरी किश्त का इंतजार है। हमने पांच हजार रुपये कर्ज लेकर शौचालय का निर्माण कराया था।
मनभरी देवी, वाल्मीकि नगर निवासी
- करीब दो साल पहले 13 हजार रुपये खर्च कर शौचालय का निर्माण कराया था। अब तक सात हजार रुपये का एक ही चेक हमें मिला है और दूसरे का लंबे समय से इंतजार है। अधिकारी ठोस जवाब नहीं दे रहे।
-पिंकी, कबीर नगर निवासी
मैंने घर में शौचालय बनवाया था और उस समय 12 हजार रुपये की सहायता राशि सरकार द्वारा देने का अधिकारियों ने आश्वासन दिया था। अब तक सात हजार ही मिले है जिसके चलते गेट नहीं लगवा पा रहा हूं।
-विक्रम, कबीर नगर निवासी
कुछ बजट एप्रूव हो गया है। इस बजट से पहले पंचायतों द्वारा खर्च की गई राशि का भुगतान किया जाएगा। जल्द ही यह पैसा मिलने पर शौचालयों के निर्माण की पेमेंट का भुगतान कर दिया जाएगा। पंचायतें इस मुहिम में लगी रहें और ग्रामीणों को भी जागरूक करें।
- डॉ. मनोज कुमार, अतिरिक्त उपायुक्त