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अमर उजाला इंपैक्ट: ठेकेदार ने शहर में लगाए पिंजरे, बंदरों से अब मिलेगी निजात
Updated Thu, 28 Dec 2017 12:41 AM IST
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गुड़-चना : शहर को मिलेगी राहत, बंदर होंगे परेशान
अमर उजाला ब्यूरो
चरखी दादरी।
शहरवासियों को अब जल्द ही बंदरों के आतंक से छुटकारा मिल जाएगा। बंदर पकड़ो अभियान शुरू करने के लिए उत्तर प्रदेश से दादरी पहुंचे ठेकेदार ने शहर में पिंजरे भी लगा दिए हैं। वीरवार से बंदरों को पकड़ने का काम शुरू हो जाएगा। ठेकेदार ने अभियान की शुरुआत वार्ड दो से की है। वार्ड में इसके लिए पिंजरे भी लगा दिए हैं। ठेकेदार के तीन कर्मचारी शहर में नियमित रूप से अभियान चलाएंगे। उसने बताया कि पिंजरे में गुड़-चना को चारा बनाया जाएगा। जैसे ही बंदरों का झुंड इन्हें खाने आएगा पिंजरे का दरवाजा अपने आप बंद हो जाएगा। इसके बाद इन्हें बड़े पिंजरे से निकालकर छोटे पिंजरों में बंद किया जाएगा और 40 से 50 बंदर होते ही इन्हें जंगलों में छोड़ा जाएगा।
ठेकेदार और नगर परिषद के बीच 500 बंदर पकड़ने का ठेका हुआ है। ठेकेदार इसके लिए 700 रुपये प्रति बंदर लेगा। अमर उजाला ने शहर के करीब 70 हजार लोगों से जुड़े बंदरों के मुद्दे को अपने अलग-अलग संस्करणों में प्रमुखता से प्रकाशित किया था। दो साल की जद्दोजहद के बाद मंगलवार रात पकड़ने के लिए ठेकेदार की टीम दादरी शहर पहुंच गई। नप टीम ने बुधवार दोपहर शहर में पिंजरे लगाने का काम भी शुरू कर दिया। बंदरों को पकड़ने के लिए छोटे पिंजरों की जगह बड़े पिंजरे ही लगाए हैं। ठेकेदार का तर्क है कि एक प्रयास में 10 से 15 बंदर पिंजरे में पकड़े जाएंगे और इसके बाद इन्हें छोटे पिंजरों में रखा जाएगा। उन्होंने बताया कि 40 से 50 बंदर होते ही इन्हें नगर परिषद द्वारा तय की गई जगह पर छोड़ा जाएगा।
शहरवासी पिछले कई सालों से बंदरों के आतंक से परेशान थे। बंदरों के काटने की घटनाएं बढ़ने पर अमर उजाला ने इस मुद्दे को अपने अलग-अलग संस्करणों में प्रकाशित किया। गत 21 नवंबर को अमर उजाला ने राहत: बंदर पकड़ने के लिए नगर परिषद को मिला ठेकेदार नामक शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। बुधवार सुबह उसने शहर का अवलोकन किया और वार्ड दो से अभियान की शुरुआत की। पार्षद महेश गुप्ता से विचार-विमर्श करने के बाद ठेकेदार ने बंदर संभावित जगहों पर बड़ा पिंजरा लगा दिया। इस समय पुराना शहर, पुरानी अनाज मंडी क्षेत्र, घिकाड़ा रोड, हरि नगर, गांधी नगर, प्रेम नगर, वार्ड 10, वार्ड 21, रेलवे रोड, दिल्ली रोड, चरखी दरवाजा, हीरा चौक, एमसी कालोनी में बंदरों का आतंक है। पिछले कुछ समय की अगर बात करें तो 25 से 30 लोगों को बंदर काटकर घायल भी कर चुके हैं। इनमें ज्यादातर बच्चे, बुजुर्ग व महिलाएं शामिल हैं।
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अमर उजाला ने उठाया था मुद्दा
अमर उजाला ने दो जून के संस्करण में कौन पकड़े बंदर, पार्षदों ने लगाई गुहार नामक शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। इसके बाद 27 जून के संस्करण में घरों में सुरक्षित नहीं वार्ड के बाशिंदे नामक शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। इसके बाद नप अधिकारियों ने ठेकेदार तलाशने की कवायद शुरू की और इसके लिए टेंडर भी लगाए। इसके बाद अमर उजाला ने गत 22 अक्तूबर को बंदरों को पकड़ने की कवायद शुरू नामक शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। इसके बाद अमर उजाला ने गत 21 नवंबर के संस्करण में राहत: पकड़ने के लिए नगर परिषद को मिला ठेकेदार नामक शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी।
वर्जन::
मेरे वार्ड में ठेकेदार ने पिंजरे लगाए हैं। वार्डवासियों को उम्मीद है कि जल्द से जल्द बंदरों से निजात अब मिलेगा। बंदरों की समस्या का फी पुरानी है और लोग काफी परेशान भी है। - महेश गुप्ता, पार्षद वार्ड दो
वर्जन::
ठेकेदार अपनी टीम सहित पहुंच चुका है। जल्द से जल्द शहरवासियों को बंदरों से निजात दिलाने का हमारा प्रयास है। इस बार अभियान को पूर्ण रूप से सिरे चढ़ाया जाएगा। - संजय यादव, सचिव नगर परिषद
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अमर उजाला ब्यूरो
चरखी दादरी।
शहरवासियों को अब जल्द ही बंदरों के आतंक से छुटकारा मिल जाएगा। बंदर पकड़ो अभियान शुरू करने के लिए उत्तर प्रदेश से दादरी पहुंचे ठेकेदार ने शहर में पिंजरे भी लगा दिए हैं। वीरवार से बंदरों को पकड़ने का काम शुरू हो जाएगा। ठेकेदार ने अभियान की शुरुआत वार्ड दो से की है। वार्ड में इसके लिए पिंजरे भी लगा दिए हैं। ठेकेदार के तीन कर्मचारी शहर में नियमित रूप से अभियान चलाएंगे। उसने बताया कि पिंजरे में गुड़-चना को चारा बनाया जाएगा। जैसे ही बंदरों का झुंड इन्हें खाने आएगा पिंजरे का दरवाजा अपने आप बंद हो जाएगा। इसके बाद इन्हें बड़े पिंजरे से निकालकर छोटे पिंजरों में बंद किया जाएगा और 40 से 50 बंदर होते ही इन्हें जंगलों में छोड़ा जाएगा।
ठेकेदार और नगर परिषद के बीच 500 बंदर पकड़ने का ठेका हुआ है। ठेकेदार इसके लिए 700 रुपये प्रति बंदर लेगा। अमर उजाला ने शहर के करीब 70 हजार लोगों से जुड़े बंदरों के मुद्दे को अपने अलग-अलग संस्करणों में प्रमुखता से प्रकाशित किया था। दो साल की जद्दोजहद के बाद मंगलवार रात पकड़ने के लिए ठेकेदार की टीम दादरी शहर पहुंच गई। नप टीम ने बुधवार दोपहर शहर में पिंजरे लगाने का काम भी शुरू कर दिया। बंदरों को पकड़ने के लिए छोटे पिंजरों की जगह बड़े पिंजरे ही लगाए हैं। ठेकेदार का तर्क है कि एक प्रयास में 10 से 15 बंदर पिंजरे में पकड़े जाएंगे और इसके बाद इन्हें छोटे पिंजरों में रखा जाएगा। उन्होंने बताया कि 40 से 50 बंदर होते ही इन्हें नगर परिषद द्वारा तय की गई जगह पर छोड़ा जाएगा।
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शहरवासी पिछले कई सालों से बंदरों के आतंक से परेशान थे। बंदरों के काटने की घटनाएं बढ़ने पर अमर उजाला ने इस मुद्दे को अपने अलग-अलग संस्करणों में प्रकाशित किया। गत 21 नवंबर को अमर उजाला ने राहत: बंदर पकड़ने के लिए नगर परिषद को मिला ठेकेदार नामक शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। बुधवार सुबह उसने शहर का अवलोकन किया और वार्ड दो से अभियान की शुरुआत की। पार्षद महेश गुप्ता से विचार-विमर्श करने के बाद ठेकेदार ने बंदर संभावित जगहों पर बड़ा पिंजरा लगा दिया। इस समय पुराना शहर, पुरानी अनाज मंडी क्षेत्र, घिकाड़ा रोड, हरि नगर, गांधी नगर, प्रेम नगर, वार्ड 10, वार्ड 21, रेलवे रोड, दिल्ली रोड, चरखी दरवाजा, हीरा चौक, एमसी कालोनी में बंदरों का आतंक है। पिछले कुछ समय की अगर बात करें तो 25 से 30 लोगों को बंदर काटकर घायल भी कर चुके हैं। इनमें ज्यादातर बच्चे, बुजुर्ग व महिलाएं शामिल हैं।
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अमर उजाला ने उठाया था मुद्दा
अमर उजाला ने दो जून के संस्करण में कौन पकड़े बंदर, पार्षदों ने लगाई गुहार नामक शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। इसके बाद 27 जून के संस्करण में घरों में सुरक्षित नहीं वार्ड के बाशिंदे नामक शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। इसके बाद नप अधिकारियों ने ठेकेदार तलाशने की कवायद शुरू की और इसके लिए टेंडर भी लगाए। इसके बाद अमर उजाला ने गत 22 अक्तूबर को बंदरों को पकड़ने की कवायद शुरू नामक शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। इसके बाद अमर उजाला ने गत 21 नवंबर के संस्करण में राहत: पकड़ने के लिए नगर परिषद को मिला ठेकेदार नामक शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी।
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मेरे वार्ड में ठेकेदार ने पिंजरे लगाए हैं। वार्डवासियों को उम्मीद है कि जल्द से जल्द बंदरों से निजात अब मिलेगा। बंदरों की समस्या का फी पुरानी है और लोग काफी परेशान भी है। - महेश गुप्ता, पार्षद वार्ड दो
वर्जन::
ठेकेदार अपनी टीम सहित पहुंच चुका है। जल्द से जल्द शहरवासियों को बंदरों से निजात दिलाने का हमारा प्रयास है। इस बार अभियान को पूर्ण रूप से सिरे चढ़ाया जाएगा। - संजय यादव, सचिव नगर परिषद