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बिना हेल्परों के दौड़ रही निजी स्कूलों की बस, प्रशासन चेतावनी देने तक सीमित
Updated Fri, 24 Aug 2018 01:06 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
चरखी दादरी/बौंदकलां। मोटर वाहन अधिनियम में निर्धारित मानकों की पालना के लिए निजी स्कूल संचालक कतई गंभीर नहीं है। जिला प्रशासन व शिक्षा विभाग के चेतावनी देने के बावजूद निजी स्कूल संचालकों की मनमानी जारी है और जिले में अब भी बिना महिला हेल्परों के कई बसें सड़कों पर दौड़ रही है। वीरवार को इसकी बानगी बौंदकलां स्कूली बस हादसे में भी देखने को मिली। हादसे में सामने आया कि जिस स्कूली बस के नीचे आने से 20 माह के मासूम की मौत हुई है उसमें महिला हेल्पर तक नहीं थी। स्वयं शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने भी माना कि अगर बस में हेल्पर होती तो शायद यश की जान न जाती। वहीं, निजी स्कूल संचालकों की मनमानी लगातार जारी है और जिला प्रशासन उन्हें चेतावनी देने तक ही सीमित है।
शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन के बार-बार चेतावनी देने के बावजूद निजी स्कूल संचालकों की मनमानी जारी है। जिले में अब भी कई निजी स्कूलों की बसें बिना महिला हेल्पर के दौड़ रही हैं और प्रशासन की तरफ से इन पर कोई कार्रवाई अमल में नहीं लाई जा रही। बौंदकलां खंड के गांव बौंदकलां, सांजरवास, रानीला, सांवड़, मिसरी, अचीना ताल, भागेश्वरी और अन्य गांवों में स्थित निजी स्कूलों में बसें सुबह और दोपहर को छुट्टी के बाद को सैंकड़ों विद्यार्थियों को लेकर निकलती हैं। इन बसों से बच्चों को उतारने और चढ़ाने के लिए कोई भी हेल्पर नहीं लगा रखा है। ऐसे में बस से उतरते और चढ़ते समय कोई भी मासूम हादसे का शिकार हो सकता है। कई निजी विद्यालय के संचालकों ने हेल्परों की जगह पर खानापूर्ति करने के लिए कुछ एक अध्यापिकाओं के जिम्मे ही हेल्पर का काम सौंप रखा है जबकि जमीनी हकीकत यह है कि ये अध्यापिकाएं भी केवल एक जगह ही बैठने का काम करती है। स्कूली विद्यार्थियों को स्वयं ही उतरना चढ़ना पड़ता है।
अचीना हादसे के बाद हुई थी स्कूली बसों की जांच, 60 से अधिक के काटे थे चालान
कुछ माह पूर्व अचीना ताल और मोरवाला के बीच भी एक निजी स्कूल की बस दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। इसमें तीन बच्चों सहित पांच लोगों की मौत हुई थी और जिला उपायुक्त ने संबंधित अधिकारियों को स्कूली बसों की चेकिंग करने के आदेश जारी किए थे। इनकी पालना करते हुए ट्रैफिक पुलिस ने लगातार पांच दिनों तक चेकिंग अभियान चलाया था और इस दौरान करीब 60 से अधिक बसों के चालान काटे गए थे। इसके बाद से ही बसों की चेकिंग नहीं की गई है।
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हेल्पर नहीं रखने वालों पर विभाग करेगा सख्त कार्रवाई : खंड शिक्षा अधिकारी
खंड शिक्षा अधिकारी बौंदकलां प्रकाश देवी ने बताया कि विभाग बसों की चेकिंग करता रहता है। इसके साथ ही निजी विद्यालयों ने लिखित में दे रखा है कि उन्होंने बसों पर हेल्पर लगा रखे हुए हैं। यदि इसके बाद भी कोई विद्यालय हेल्पर नहीं रखता है और कोई हादसा हो जाता है जो उस विद्यालय पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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चरखी दादरी/बौंदकलां। मोटर वाहन अधिनियम में निर्धारित मानकों की पालना के लिए निजी स्कूल संचालक कतई गंभीर नहीं है। जिला प्रशासन व शिक्षा विभाग के चेतावनी देने के बावजूद निजी स्कूल संचालकों की मनमानी जारी है और जिले में अब भी बिना महिला हेल्परों के कई बसें सड़कों पर दौड़ रही है। वीरवार को इसकी बानगी बौंदकलां स्कूली बस हादसे में भी देखने को मिली। हादसे में सामने आया कि जिस स्कूली बस के नीचे आने से 20 माह के मासूम की मौत हुई है उसमें महिला हेल्पर तक नहीं थी। स्वयं शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने भी माना कि अगर बस में हेल्पर होती तो शायद यश की जान न जाती। वहीं, निजी स्कूल संचालकों की मनमानी लगातार जारी है और जिला प्रशासन उन्हें चेतावनी देने तक ही सीमित है।
शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन के बार-बार चेतावनी देने के बावजूद निजी स्कूल संचालकों की मनमानी जारी है। जिले में अब भी कई निजी स्कूलों की बसें बिना महिला हेल्पर के दौड़ रही हैं और प्रशासन की तरफ से इन पर कोई कार्रवाई अमल में नहीं लाई जा रही। बौंदकलां खंड के गांव बौंदकलां, सांजरवास, रानीला, सांवड़, मिसरी, अचीना ताल, भागेश्वरी और अन्य गांवों में स्थित निजी स्कूलों में बसें सुबह और दोपहर को छुट्टी के बाद को सैंकड़ों विद्यार्थियों को लेकर निकलती हैं। इन बसों से बच्चों को उतारने और चढ़ाने के लिए कोई भी हेल्पर नहीं लगा रखा है। ऐसे में बस से उतरते और चढ़ते समय कोई भी मासूम हादसे का शिकार हो सकता है। कई निजी विद्यालय के संचालकों ने हेल्परों की जगह पर खानापूर्ति करने के लिए कुछ एक अध्यापिकाओं के जिम्मे ही हेल्पर का काम सौंप रखा है जबकि जमीनी हकीकत यह है कि ये अध्यापिकाएं भी केवल एक जगह ही बैठने का काम करती है। स्कूली विद्यार्थियों को स्वयं ही उतरना चढ़ना पड़ता है।
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अचीना हादसे के बाद हुई थी स्कूली बसों की जांच, 60 से अधिक के काटे थे चालान
कुछ माह पूर्व अचीना ताल और मोरवाला के बीच भी एक निजी स्कूल की बस दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। इसमें तीन बच्चों सहित पांच लोगों की मौत हुई थी और जिला उपायुक्त ने संबंधित अधिकारियों को स्कूली बसों की चेकिंग करने के आदेश जारी किए थे। इनकी पालना करते हुए ट्रैफिक पुलिस ने लगातार पांच दिनों तक चेकिंग अभियान चलाया था और इस दौरान करीब 60 से अधिक बसों के चालान काटे गए थे। इसके बाद से ही बसों की चेकिंग नहीं की गई है।
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हेल्पर नहीं रखने वालों पर विभाग करेगा सख्त कार्रवाई : खंड शिक्षा अधिकारी
खंड शिक्षा अधिकारी बौंदकलां प्रकाश देवी ने बताया कि विभाग बसों की चेकिंग करता रहता है। इसके साथ ही निजी विद्यालयों ने लिखित में दे रखा है कि उन्होंने बसों पर हेल्पर लगा रखे हुए हैं। यदि इसके बाद भी कोई विद्यालय हेल्पर नहीं रखता है और कोई हादसा हो जाता है जो उस विद्यालय पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।