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किसानों का रिलायंस से टकराव शुरू
Updated Sun, 10 Sep 2017 01:32 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
बादली (झज्जर)।
रिलायंस की स्पेशल इकॉनोमिक जोन से संबंधित नीतियों से नाराज बादली क्षेत्र के किसान अब सीधे टकराव के मूड में हैं। किसानों ने रिलायंस के खिलाफ असहयोग आंदोलन छेड़ने की घोषणा की है। एसईजेड संबंधी मामलों पर शनिवार को गांव सोंधी में गुलिया चौबीसी के चबूतरे पर तीसा की पंचायत हुई। पंचायत में असहयोग का निर्णय लेकर किसानों ने रिलायंस के एक बोर्ड को उखाड़कर फेंक दिया और जमीन पर बनाए गए गड्ढों को भरना शुरू कर दिया। किसानों में यह आक्रोश रॉयल्टी न मिलने और दूसरे वादे पूरे नहीं होने से पनपा है।
पंचायत में तीसा के अलावा भी कई गांवों के किसानों व अन्य प्रमुख लोगों ने भाग लिया। पंचायत में फैसला लेकर किसानों ने सोंधी गांव से एसईजेड की जमीन पर कब्जा करने की शुरुआत कर दी। किसानों ने कंपनी की ओर से जमीन में किए गए गहरे गड्ढों को भरना शुरू किया। सोंधी के चबूतरे पर हुई पंचायत की अध्यक्षता गुलिया के प्रधान सुनील गुलिया ने की। पंचायत में नित्यानंद पंडित, जिला पार्षद जगबीर निमाना, अजय गुलिया, सतेंद्र, महाबीर पेलपा, चांद, राकेश, काला निमाना, जगदेव पेलपा सहित आसपास के गांवों की सभी पंचायतों और किसानों ने भी भाग लिया।
एसडीएम को नहीं दिया समय
पंचायत में जिला प्रशासन की ओर से एसडीएम जगनिवास, डीएसपी अजमेर सिंह, बीडीपीओ रामफल और इकबाल सिंह राठी भी मौजूद रहे। एसडीएम ने समस्या का समाधान कराने के लिए किसानों से कंपनी के साथ बातचीत करने के लिए समय मांगा। मगर किसानों ने समय देने से इंकार कर दिया। इसके बाद सभी अधिकारी पंचायत छोड़कर चले गए और पंचायत के फैसले के इंतजार में बाहर बैठ गए।
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ये मुद्दे रहे हावी
पंचायत में किसानों ने कहा कि 11 साल पहले जमीन खरीदते समय तय हुआ था कि रिलायंस जिन किसानों की जमीन लेगी। उनको 35 साल तक रॉयल्टी भी देगी। मगर सैकड़ों किसानों को एक बार भी रॉयल्टी नहीं दी गई। क्षेत्र का विकास करने और इलाके के बेरोजगारों को नौकरियां देना का वादा भी किसानों ने पूरा नहीं किया। जहां सैकड़ों कंपनियां स्थापित करने का वादा किया गया था। वहां अभी तक केवल दो कंपनी लगाई गई हैं। ये सब किसानों के साथ विश्वासघात है। इस चर्चा के बाद पंचायत ने रिलायंस के साथ असहयोग करने का फैसला लिया। बाद में इकट्ठे होकर जमीन पर कब्जे की पहल शुरू कर दी। गौरतलब है कि फिलहाल खाली पड़ी जमीन पर गड्ढे खोदकर और कीकर आदि के पेड़ उगाकर किसानों को को जमीन से दूर रखने की कोशिश की जा रही है।
क्या कहती है कंपनी :
रिलायंस के जन संपर्क अधिकारी पीतांबर हिंदवान का कहना है नियमानुसार औद्योगिक इकाइयां स्थापित की जा रही हैं। इसके अतिरिक्त 365 एकड़ जमीन पर औद्योगिक कालोनी की स्वीकृति ली गई है। औद्योगिक पार्क के लिए एसडीओएस पेस को 120 एकड़ जमीन दी है। पात्र किसानों को रॉयल्टी समय पर दी जा रही है। युवाओं को एमईटी में रोजगार दिलाने के लिए प्रयास जारी हैं। राज्य सरकार भी एसईजेड में कंपनियां स्थापित कराने की कोशिश कर रही है। कंपनियां लगीं तो युवाओं को नौकरी भी मिलेंगी। ग्रामीणों को समय-समय पर मूलभूत सुविधाएं भी मुहैया कराई जा रही हैं।
- रॉयल्टी नहीं मिलने और दूसरे वादे पूरे न होने से किसानों में फैला है आक्रोश
- किसानों ने रिलायंस के खिलाफ शुरू किया असहयोग आंदोलन
- पंचायत छोड़ गए एसडीएम और डीएसपी
- कंपनी के बोर्ड को किसानों ने उखाड़ फेंका
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बादली (झज्जर)।
रिलायंस की स्पेशल इकॉनोमिक जोन से संबंधित नीतियों से नाराज बादली क्षेत्र के किसान अब सीधे टकराव के मूड में हैं। किसानों ने रिलायंस के खिलाफ असहयोग आंदोलन छेड़ने की घोषणा की है। एसईजेड संबंधी मामलों पर शनिवार को गांव सोंधी में गुलिया चौबीसी के चबूतरे पर तीसा की पंचायत हुई। पंचायत में असहयोग का निर्णय लेकर किसानों ने रिलायंस के एक बोर्ड को उखाड़कर फेंक दिया और जमीन पर बनाए गए गड्ढों को भरना शुरू कर दिया। किसानों में यह आक्रोश रॉयल्टी न मिलने और दूसरे वादे पूरे नहीं होने से पनपा है।
पंचायत में तीसा के अलावा भी कई गांवों के किसानों व अन्य प्रमुख लोगों ने भाग लिया। पंचायत में फैसला लेकर किसानों ने सोंधी गांव से एसईजेड की जमीन पर कब्जा करने की शुरुआत कर दी। किसानों ने कंपनी की ओर से जमीन में किए गए गहरे गड्ढों को भरना शुरू किया। सोंधी के चबूतरे पर हुई पंचायत की अध्यक्षता गुलिया के प्रधान सुनील गुलिया ने की। पंचायत में नित्यानंद पंडित, जिला पार्षद जगबीर निमाना, अजय गुलिया, सतेंद्र, महाबीर पेलपा, चांद, राकेश, काला निमाना, जगदेव पेलपा सहित आसपास के गांवों की सभी पंचायतों और किसानों ने भी भाग लिया।
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एसडीएम को नहीं दिया समय
पंचायत में जिला प्रशासन की ओर से एसडीएम जगनिवास, डीएसपी अजमेर सिंह, बीडीपीओ रामफल और इकबाल सिंह राठी भी मौजूद रहे। एसडीएम ने समस्या का समाधान कराने के लिए किसानों से कंपनी के साथ बातचीत करने के लिए समय मांगा। मगर किसानों ने समय देने से इंकार कर दिया। इसके बाद सभी अधिकारी पंचायत छोड़कर चले गए और पंचायत के फैसले के इंतजार में बाहर बैठ गए।
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ये मुद्दे रहे हावी
पंचायत में किसानों ने कहा कि 11 साल पहले जमीन खरीदते समय तय हुआ था कि रिलायंस जिन किसानों की जमीन लेगी। उनको 35 साल तक रॉयल्टी भी देगी। मगर सैकड़ों किसानों को एक बार भी रॉयल्टी नहीं दी गई। क्षेत्र का विकास करने और इलाके के बेरोजगारों को नौकरियां देना का वादा भी किसानों ने पूरा नहीं किया। जहां सैकड़ों कंपनियां स्थापित करने का वादा किया गया था। वहां अभी तक केवल दो कंपनी लगाई गई हैं। ये सब किसानों के साथ विश्वासघात है। इस चर्चा के बाद पंचायत ने रिलायंस के साथ असहयोग करने का फैसला लिया। बाद में इकट्ठे होकर जमीन पर कब्जे की पहल शुरू कर दी। गौरतलब है कि फिलहाल खाली पड़ी जमीन पर गड्ढे खोदकर और कीकर आदि के पेड़ उगाकर किसानों को को जमीन से दूर रखने की कोशिश की जा रही है।
क्या कहती है कंपनी :
रिलायंस के जन संपर्क अधिकारी पीतांबर हिंदवान का कहना है नियमानुसार औद्योगिक इकाइयां स्थापित की जा रही हैं। इसके अतिरिक्त 365 एकड़ जमीन पर औद्योगिक कालोनी की स्वीकृति ली गई है। औद्योगिक पार्क के लिए एसडीओएस पेस को 120 एकड़ जमीन दी है। पात्र किसानों को रॉयल्टी समय पर दी जा रही है। युवाओं को एमईटी में रोजगार दिलाने के लिए प्रयास जारी हैं। राज्य सरकार भी एसईजेड में कंपनियां स्थापित कराने की कोशिश कर रही है। कंपनियां लगीं तो युवाओं को नौकरी भी मिलेंगी। ग्रामीणों को समय-समय पर मूलभूत सुविधाएं भी मुहैया कराई जा रही हैं।
- रॉयल्टी नहीं मिलने और दूसरे वादे पूरे न होने से किसानों में फैला है आक्रोश
- किसानों ने रिलायंस के खिलाफ शुरू किया असहयोग आंदोलन
- पंचायत छोड़ गए एसडीएम और डीएसपी
- कंपनी के बोर्ड को किसानों ने उखाड़ फेंका