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सरकारी कार्यालयों में खाली पड़ी रही अधिकारियों की कुर्सियां
Updated Fri, 16 Feb 2018 01:30 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
बहादुरगढ़।
जींद में वीरवार को भाजपा की रैली थी तो सरकारी विभागों के सीनियर अधिकारियों की शहर के नाकों पर ड्यूटी लगा रखी थी। इससे कार्यालयों में दिनभर कुर्सियां खाली पड़ी रही और लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा।
शहर के जन स्वास्थ्य विभाग, पटवार भवन, तहसील कार्यालय, उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम, नगर परिषद कार्यालय के अलावा अन्य कई विभागों के सीनियर अधिकारियों के कार्यालय खाली रहे। इससे लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। जैसे-तैसे जूनियर अधिकारियों ने व्यवस्था को संभाला। कई सीनियर अधिकारी बहादुरगढ़ में लगे नाकों पर ड्यूटी देते रहे। एक-दो विभाग के सीनियर अधिकारियों ने दबी जुबान में बताया कि किसी भी पार्टी की सरकार आती है तो सबसे पहले रैलियों के लिए सरकारी अधिकारियों को ही ड्यूटी पर लगाया जाता है।
इससे काम में बाधा उत्पन्न होती है और लोगों के साथ-साथ उन्हें भी इससे परेशानी होती है क्योंकि कार्यालयों का अधिकतर काम लटक जाता है। अधिकारियों का तर्क है कि रैलियों में सरकारी अधिकारियों की ड्यूटी न लगाई जाए। नगर परिषद में अपनी पेंशन के बारे में जानकारी हासिल करने पहुंची बुजुर्ग महिला सतवंती ने बताया कि उसे पता नहीं था कि यहां पर अधिकारी नहीं मिलेेंगे और परेशान होना पड़ेगा।
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बहादुरगढ़।
जींद में वीरवार को भाजपा की रैली थी तो सरकारी विभागों के सीनियर अधिकारियों की शहर के नाकों पर ड्यूटी लगा रखी थी। इससे कार्यालयों में दिनभर कुर्सियां खाली पड़ी रही और लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा।
शहर के जन स्वास्थ्य विभाग, पटवार भवन, तहसील कार्यालय, उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम, नगर परिषद कार्यालय के अलावा अन्य कई विभागों के सीनियर अधिकारियों के कार्यालय खाली रहे। इससे लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। जैसे-तैसे जूनियर अधिकारियों ने व्यवस्था को संभाला। कई सीनियर अधिकारी बहादुरगढ़ में लगे नाकों पर ड्यूटी देते रहे। एक-दो विभाग के सीनियर अधिकारियों ने दबी जुबान में बताया कि किसी भी पार्टी की सरकार आती है तो सबसे पहले रैलियों के लिए सरकारी अधिकारियों को ही ड्यूटी पर लगाया जाता है।
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इससे काम में बाधा उत्पन्न होती है और लोगों के साथ-साथ उन्हें भी इससे परेशानी होती है क्योंकि कार्यालयों का अधिकतर काम लटक जाता है। अधिकारियों का तर्क है कि रैलियों में सरकारी अधिकारियों की ड्यूटी न लगाई जाए। नगर परिषद में अपनी पेंशन के बारे में जानकारी हासिल करने पहुंची बुजुर्ग महिला सतवंती ने बताया कि उसे पता नहीं था कि यहां पर अधिकारी नहीं मिलेेंगे और परेशान होना पड़ेगा।
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