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फूल सिंह नौंटकी के किस्से पर किया सांग का मंचन
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अमर उजाला ब्यूरो
बौंदकलां। बाबा चांदूदास महाराज के मेले के उपलक्ष्य में हरियाणवी सांग का आयोजन किया गया। सांगी बाबू दान सिंह चौहान और कलाकारों ने मंगलवार को निम्न जाति के युवक फूल सिंह और उच्च जाति की राजकुमारी नौटंकी की प्रेम कथा पर गाना प्रस्तुत किया।
कलाकारों ने गाने के मंचन में बताया कि फूल सिंह अपने दो भाईयों और दो भाभियों के साथ रहता है। नट और नटी से वह प्रेमनगर की राजकुमारी नौटंकी की प्रशंसा सुनकर वह नौटंकी को देखने को व्याकुल हो जाता है। नौटंकी राजा हरिसिंह की इकलौती संतान थी और राजा बेहद क्रूर प्रवृत्ति का था। स्वयंवर के बहाने युवकों को बुलाकर नौटंकी उन्हें तरह तरह की सजा देती है। राजकुमारी को आंख उठाकर देखना मृत्यु को बुलाने जैसा था। राजकुमारी नौटंकी अपने रथ में रखी वस्तुओं को फेंककर युवकों को उपहार देती है लेकिन उपहार में अक्सर ईंट पत्थर के टुकड़े रहते है। अगर कोई युवक उनसे बचने की कोशिश करता है तो माना जाता है कि वह चुपके से उसे देख रहा था। इसकी सजा के रूप में उसे मृत्युदंड दिया जाता है। इसी बीच फूल सिंह चुपके से नौटंकी को देखने में कामयाब हो जाता है और पत्थर की मार से परहेज भी नहीं करता। नौटंकी की सुंदरता पर फिदा फूल सिंह को उसकी भाभियां ताना मारती है। अगर इतने वीर हो तो नौटंकी को से ब्याह करके दिखाओ। यह बात फूल सिंह को चुभ जाती है। वह घर छोड़कर प्रेमनगर की राह पकड़ता है। एक बूढ़ी मालकिन की मदद से लड़की बन महल तक पहुंचने में कामयाब हो जाता है। सूझबूझ से वह नौटंकी की सहेली बन जाता है। इसी बीच नौटंकी के सामने अपने असली रूप में भी आता है। नौटंकी भी उससे प्रेम करने लगती है। जब इसकी भनक हरिसिंह को लगती है तो वह फूल सिंह को कैद कर लेता है और मृत्युदंड की सजा देता है। लेकिन नौटंकी वधशाला पहुंच अपने पिता से विद्रोह कर देती है। पिता को झुकना पड़ता है और फूल सिंह और नौटंकी की शादी हो जाती है।
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बौंदकलां। बाबा चांदूदास महाराज के मेले के उपलक्ष्य में हरियाणवी सांग का आयोजन किया गया। सांगी बाबू दान सिंह चौहान और कलाकारों ने मंगलवार को निम्न जाति के युवक फूल सिंह और उच्च जाति की राजकुमारी नौटंकी की प्रेम कथा पर गाना प्रस्तुत किया।
कलाकारों ने गाने के मंचन में बताया कि फूल सिंह अपने दो भाईयों और दो भाभियों के साथ रहता है। नट और नटी से वह प्रेमनगर की राजकुमारी नौटंकी की प्रशंसा सुनकर वह नौटंकी को देखने को व्याकुल हो जाता है। नौटंकी राजा हरिसिंह की इकलौती संतान थी और राजा बेहद क्रूर प्रवृत्ति का था। स्वयंवर के बहाने युवकों को बुलाकर नौटंकी उन्हें तरह तरह की सजा देती है। राजकुमारी को आंख उठाकर देखना मृत्यु को बुलाने जैसा था। राजकुमारी नौटंकी अपने रथ में रखी वस्तुओं को फेंककर युवकों को उपहार देती है लेकिन उपहार में अक्सर ईंट पत्थर के टुकड़े रहते है। अगर कोई युवक उनसे बचने की कोशिश करता है तो माना जाता है कि वह चुपके से उसे देख रहा था। इसकी सजा के रूप में उसे मृत्युदंड दिया जाता है। इसी बीच फूल सिंह चुपके से नौटंकी को देखने में कामयाब हो जाता है और पत्थर की मार से परहेज भी नहीं करता। नौटंकी की सुंदरता पर फिदा फूल सिंह को उसकी भाभियां ताना मारती है। अगर इतने वीर हो तो नौटंकी को से ब्याह करके दिखाओ। यह बात फूल सिंह को चुभ जाती है। वह घर छोड़कर प्रेमनगर की राह पकड़ता है। एक बूढ़ी मालकिन की मदद से लड़की बन महल तक पहुंचने में कामयाब हो जाता है। सूझबूझ से वह नौटंकी की सहेली बन जाता है। इसी बीच नौटंकी के सामने अपने असली रूप में भी आता है। नौटंकी भी उससे प्रेम करने लगती है। जब इसकी भनक हरिसिंह को लगती है तो वह फूल सिंह को कैद कर लेता है और मृत्युदंड की सजा देता है। लेकिन नौटंकी वधशाला पहुंच अपने पिता से विद्रोह कर देती है। पिता को झुकना पड़ता है और फूल सिंह और नौटंकी की शादी हो जाती है।
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