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शहर के 1.53 करोड़ के पेयजल लाइन प्रोजेक्ट पर दूसरी बार लगे ऑब्जेक्शन
Updated Sun, 03 Dec 2017 12:42 AM IST
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1.53 करोड़ के पेयजल लाइन प्रोजेक्ट पर फिर लगा ऑब्जेक्शन
अमर उजाला ब्यूरो
चरखी दादरी।
लंबी जद्दोजहद के बाद नगर पार्षदों की मांग पर पेयजल लाइनों के लिए तैयार इस्टीमेट की फाइल पर अब दूसरा ऑब्जेक्शन लग गया है। इतना ही नहीं इस्टीमेट राशि भी 20 लाख रुपये घटा दी गई है। करीब 11 माह बाद भी इस प्रोजेक्ट को मंजूरी नहीं मिलने से नगर पार्षद और चेयरमैन भी सकते में हैं। नगर परिषद चेयरमैन और पार्षदों ने इस संबंध में जनस्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी असंतोष जताया है। नगर परिषद चेयरमैन का तर्क है कि विभाग इस्टीमेट ठीक प्रकार से तैयार करे तो वे विभाग के मंत्री से मिलकर इसे मंजूर करवाने की पूरी कोशिश करेंगे। 29 दिसंबर 2016 को जनस्वास्थ्य विभाग की तरफ से शहर के सभी वार्डों में पार्षदों को साथ लेकर सर्वे कर यह इस्टीमेट तैयार हुआ था। इस सर्वे में हर वार्ड के पार्षद की ओर से गलियों में पेयजल लाइन की डिमांड की गई थी।
मौजूदा सरकार बनने के करीब डेढ़ साल तक तो शहर के विकास के लिए कोई प्रक्रिया ही शुरू नहीं हुई थी। शहर को किसी प्रकार का बजट नहीं मिल पा रहा था। ऐसे में शहरवासियों में भी रोष बना रहा। शहर के सभी वार्डों में इस समय गली निर्माण व नई पेयजल लाइनों की जरूरत बनी हुई है। सीएम की घोषणा के तहत पांच करोड़ की बजट राशि भी पिछले सप्ताह ही मिली है। इस दौरान शहर के विकास की गति रूकी रही।
शहर का काफी एरिया अवैध है लेकिन अब यह एरिया पूरी तरह से आबाद होने की वजह से इसे वैध करना भी सरकार व परिषद विवशता बनने लगी है ऐसे में इन अवैध कालोनियों में करीब पांच हजार मकान बने हैं। इन लोगों को भी पेयजल व सीवरेज के अलावा सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं की जरूरत बनी हुई है लेकिन इस ओर भी कोई ध्यान नहीं दे रहा है। विभाग ने कई अवैध कालोनियों में बिजली व पेयजल लाइनें बिछा भी रखी हैं लेकिन यहां सड़क नहीं बनी हैं। इन भागों में रहने वाले लोगों को खासी परेशानी झेलनी पड़ रही है। नई एप्रूवड कालोनियों में भी नई पेयजल व सीवरेज लाइनें बिछनी हैं।
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दिसंबर-2016 में पार्षदों ने शहर में पेयजल, सीवरेज सिस्टम में सुधार नहीं होने पर रोष भी जताया था। इसे लेकर कई पार्षद और चेयरमैन जनस्वास्थ्य विभाग के तत्कालीन कार्यकारी अभियंता से भी मिले थे। इस दौरान जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और पार्षदों के बीच तनातनी भी बढ़ी थी। इन पार्षदों का तर्क था कि शहर में पेयजल और सीवरेज व्यवस्था पूरी तरह से लचर है। कॉलोनियों में पेयजल लाइनें नहीं बिछाए जाने से लोगों को पीने तक का पानी नसीब नहीं हो पा रहा है। पार्षदों ने अधिकारियों के समक्ष मांग रखी थी कि वार्डों में सीवरेज की भी नई लाइनें बिछाए जाने की जरूरत है।
पार्षदों की मांग पर करवाई गई थी सर्वे
जनस्वास्थ्य विभाग ने पार्षदों की मांग पर शहर के सभी वार्डों में सर्वे करवाई थी। सर्वे में इन पार्षदों को भी शामिल किया गया था। पार्षदों के साथ विभाग अधिकारियों ने सभी 21 वार्डों की रिपोर्ट तैयार की थी। सर्वे में हर वार्ड में दो से पांच तक गली निर्माण की जरूरत सामने आई तथा पेयजल लाइन के लिए भी काफी गलियों को चिह्नित किया था।
विभाग ने तैयार किया था इस्टीमेट
जनस्वास्थ्य विभाग ने इस्टीमेट तैयार किया था। पार्षदों के दबाव के चलते यह प्रक्रिया तीन दिन में ही पूरी कर ली गई थी। विभाग ने इस्टीमेट तैयार कर हेड आफिस भेज दिया था। विभाग की तरफ से भेजी गई इस्टीमेट फाइल पर फरवरी माह में पहली बार ऑब्जेक्शन लगे थे। ऑब्जेक्शन के तहत यह निर्देश थे कि किसी गली या पेयजल लाइन को किसी दूसरे प्रोजेक्ट में तो शामिल नहीं कर रखा है ताकि रिपीटेशन न होने पाए। इसके अलावा और भी छोटे- मोटे ऑब्जेक्शन लगाए थे।
बजट राशि भी घटाई
विभाग ने यह ऑब्जेक्शन रिमूव कर 27 फरवरी 2017 को दोबारा से फाइल हेड ऑफिस भेज दी थी लेकिन अब दूसरी बार इस फाइल पर फिर ऑब्जेक्शन लग गया है। ऑब्जेक्शन में हेड आफिस का तर्क है कि इस इस्टीमेट में शहर के पहले से भेज रखे अन्य इस्टीमेट के कार्य आपस में मेल खाते हैं ऐसे में कई पेयजल लाइनें और कार्य आपस में मेल खा रहे हैं इस स्थिति में इसकी मंजूरी संभव नहीं है। हेड ऑफिस ने इस प्रोजेक्ट की बजट राशि को 1.73 करोड़ से घटाकर 1.53 करोड़ कर दिया है। अब जनस्वास्थ्य विभाग कार्यकारी अभियंता कार्यालय की तरफ से इस फाइल पर लगे ऑब्जेक्शन को रिमूव किया जा रहा है। विभाग इस प्रोजेक्ट के सभी बिंदुओं की गहनता से स्टडी कर रहा है ताकि कोई बिंदु छूटने न पाए और हेड ऑफिस के ऑब्जेक्शन भी रिमूव हो जाए। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस प्रोजेक्ट के तहत सभी नई लाइन बिछाई जानी है। पुरानी लाइनों के इस्टीमेट इससे कतई मेल नहीं खा रहे हैं।
12 हजार 795 मीटर लंबी लाइन बिछाई जानी है
शहर में इस 153 लाख के प्रोजेक्ट से सभी वार्डों में 12 हजार 795 मीटर लंबी पेयजल लाइनें बिछाई जानी हैं ताकि सभी वार्डों में पानी का समुचित प्रबंध हो सके। इसके लिए बाकायदा पार्षदों की ओर से एरिया को चिह्नित करवाया गया था।
क्या कहते हैं नप चेयरमैन
जनस्वास्थ्य विभाग को अच्छी प्रकार से यह इस्टीमेट तैयार करना चाहिए ताकि ऑब्जेक्शन की गुंजाइश ही पैदा न हो सके। विभाग अगर ठीक प्रकार से इस्टीमेट तैयार कर भेजता है तो वे विभाग के मंत्री से मिलकर इसे मंजूरी दिलवाने की कोशिश करेंगे। - नगर परिषद चेयरमैन, संजय छपारिया
कोट --
जल्द ही इस इस्टीमेट के ऑब्जेक्शन रिमूव कर हेड ऑफिस भेज दिया जाएगा। प्रोजेक्ट की मंजूरी मिलते ही शहर में पेयजल लाइन बिछाए जाने का काम शुरू हो जाएगा। - जेई नरेंद्र कुमार, जनस्वास्थ्य विभाग
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अमर उजाला ब्यूरो
चरखी दादरी।
लंबी जद्दोजहद के बाद नगर पार्षदों की मांग पर पेयजल लाइनों के लिए तैयार इस्टीमेट की फाइल पर अब दूसरा ऑब्जेक्शन लग गया है। इतना ही नहीं इस्टीमेट राशि भी 20 लाख रुपये घटा दी गई है। करीब 11 माह बाद भी इस प्रोजेक्ट को मंजूरी नहीं मिलने से नगर पार्षद और चेयरमैन भी सकते में हैं। नगर परिषद चेयरमैन और पार्षदों ने इस संबंध में जनस्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी असंतोष जताया है। नगर परिषद चेयरमैन का तर्क है कि विभाग इस्टीमेट ठीक प्रकार से तैयार करे तो वे विभाग के मंत्री से मिलकर इसे मंजूर करवाने की पूरी कोशिश करेंगे। 29 दिसंबर 2016 को जनस्वास्थ्य विभाग की तरफ से शहर के सभी वार्डों में पार्षदों को साथ लेकर सर्वे कर यह इस्टीमेट तैयार हुआ था। इस सर्वे में हर वार्ड के पार्षद की ओर से गलियों में पेयजल लाइन की डिमांड की गई थी।
मौजूदा सरकार बनने के करीब डेढ़ साल तक तो शहर के विकास के लिए कोई प्रक्रिया ही शुरू नहीं हुई थी। शहर को किसी प्रकार का बजट नहीं मिल पा रहा था। ऐसे में शहरवासियों में भी रोष बना रहा। शहर के सभी वार्डों में इस समय गली निर्माण व नई पेयजल लाइनों की जरूरत बनी हुई है। सीएम की घोषणा के तहत पांच करोड़ की बजट राशि भी पिछले सप्ताह ही मिली है। इस दौरान शहर के विकास की गति रूकी रही।
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शहर का काफी एरिया अवैध है लेकिन अब यह एरिया पूरी तरह से आबाद होने की वजह से इसे वैध करना भी सरकार व परिषद विवशता बनने लगी है ऐसे में इन अवैध कालोनियों में करीब पांच हजार मकान बने हैं। इन लोगों को भी पेयजल व सीवरेज के अलावा सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं की जरूरत बनी हुई है लेकिन इस ओर भी कोई ध्यान नहीं दे रहा है। विभाग ने कई अवैध कालोनियों में बिजली व पेयजल लाइनें बिछा भी रखी हैं लेकिन यहां सड़क नहीं बनी हैं। इन भागों में रहने वाले लोगों को खासी परेशानी झेलनी पड़ रही है। नई एप्रूवड कालोनियों में भी नई पेयजल व सीवरेज लाइनें बिछनी हैं।
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दिसंबर-2016 में पार्षदों ने शहर में पेयजल, सीवरेज सिस्टम में सुधार नहीं होने पर रोष भी जताया था। इसे लेकर कई पार्षद और चेयरमैन जनस्वास्थ्य विभाग के तत्कालीन कार्यकारी अभियंता से भी मिले थे। इस दौरान जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और पार्षदों के बीच तनातनी भी बढ़ी थी। इन पार्षदों का तर्क था कि शहर में पेयजल और सीवरेज व्यवस्था पूरी तरह से लचर है। कॉलोनियों में पेयजल लाइनें नहीं बिछाए जाने से लोगों को पीने तक का पानी नसीब नहीं हो पा रहा है। पार्षदों ने अधिकारियों के समक्ष मांग रखी थी कि वार्डों में सीवरेज की भी नई लाइनें बिछाए जाने की जरूरत है।
पार्षदों की मांग पर करवाई गई थी सर्वे
जनस्वास्थ्य विभाग ने पार्षदों की मांग पर शहर के सभी वार्डों में सर्वे करवाई थी। सर्वे में इन पार्षदों को भी शामिल किया गया था। पार्षदों के साथ विभाग अधिकारियों ने सभी 21 वार्डों की रिपोर्ट तैयार की थी। सर्वे में हर वार्ड में दो से पांच तक गली निर्माण की जरूरत सामने आई तथा पेयजल लाइन के लिए भी काफी गलियों को चिह्नित किया था।
विभाग ने तैयार किया था इस्टीमेट
जनस्वास्थ्य विभाग ने इस्टीमेट तैयार किया था। पार्षदों के दबाव के चलते यह प्रक्रिया तीन दिन में ही पूरी कर ली गई थी। विभाग ने इस्टीमेट तैयार कर हेड आफिस भेज दिया था। विभाग की तरफ से भेजी गई इस्टीमेट फाइल पर फरवरी माह में पहली बार ऑब्जेक्शन लगे थे। ऑब्जेक्शन के तहत यह निर्देश थे कि किसी गली या पेयजल लाइन को किसी दूसरे प्रोजेक्ट में तो शामिल नहीं कर रखा है ताकि रिपीटेशन न होने पाए। इसके अलावा और भी छोटे- मोटे ऑब्जेक्शन लगाए थे।
बजट राशि भी घटाई
विभाग ने यह ऑब्जेक्शन रिमूव कर 27 फरवरी 2017 को दोबारा से फाइल हेड ऑफिस भेज दी थी लेकिन अब दूसरी बार इस फाइल पर फिर ऑब्जेक्शन लग गया है। ऑब्जेक्शन में हेड आफिस का तर्क है कि इस इस्टीमेट में शहर के पहले से भेज रखे अन्य इस्टीमेट के कार्य आपस में मेल खाते हैं ऐसे में कई पेयजल लाइनें और कार्य आपस में मेल खा रहे हैं इस स्थिति में इसकी मंजूरी संभव नहीं है। हेड ऑफिस ने इस प्रोजेक्ट की बजट राशि को 1.73 करोड़ से घटाकर 1.53 करोड़ कर दिया है। अब जनस्वास्थ्य विभाग कार्यकारी अभियंता कार्यालय की तरफ से इस फाइल पर लगे ऑब्जेक्शन को रिमूव किया जा रहा है। विभाग इस प्रोजेक्ट के सभी बिंदुओं की गहनता से स्टडी कर रहा है ताकि कोई बिंदु छूटने न पाए और हेड ऑफिस के ऑब्जेक्शन भी रिमूव हो जाए। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस प्रोजेक्ट के तहत सभी नई लाइन बिछाई जानी है। पुरानी लाइनों के इस्टीमेट इससे कतई मेल नहीं खा रहे हैं।
12 हजार 795 मीटर लंबी लाइन बिछाई जानी है
शहर में इस 153 लाख के प्रोजेक्ट से सभी वार्डों में 12 हजार 795 मीटर लंबी पेयजल लाइनें बिछाई जानी हैं ताकि सभी वार्डों में पानी का समुचित प्रबंध हो सके। इसके लिए बाकायदा पार्षदों की ओर से एरिया को चिह्नित करवाया गया था।
क्या कहते हैं नप चेयरमैन
जनस्वास्थ्य विभाग को अच्छी प्रकार से यह इस्टीमेट तैयार करना चाहिए ताकि ऑब्जेक्शन की गुंजाइश ही पैदा न हो सके। विभाग अगर ठीक प्रकार से इस्टीमेट तैयार कर भेजता है तो वे विभाग के मंत्री से मिलकर इसे मंजूरी दिलवाने की कोशिश करेंगे। - नगर परिषद चेयरमैन, संजय छपारिया
कोट --
जल्द ही इस इस्टीमेट के ऑब्जेक्शन रिमूव कर हेड ऑफिस भेज दिया जाएगा। प्रोजेक्ट की मंजूरी मिलते ही शहर में पेयजल लाइन बिछाए जाने का काम शुरू हो जाएगा। - जेई नरेंद्र कुमार, जनस्वास्थ्य विभाग