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डेढ़ करोड़ से अधिक खर्च होने के बावजूद रोशन नहीं हुआ सांखोल से जाखोदा मार्ग 18-26-54
Updated Tue, 14 Nov 2017 01:25 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
बहादुरगढ़।
शहर के बीच से गुजरने वाले हाइवे पर सांखोल से जाखोदा तक डेढ़ करोड़ की लागत से लगाई गई लाइटें दो साल बाद भी चालू नहीं हो पाई हैं। इससे इस मार्ग से गुजरने वाले हजारों वाहन चालकों को परेशानी हो रही है। लाइटें न चालू होने पर नगर परिषद और पीडब्ल्यूडी विभाग अलग-अलग तर्क दे रहे हैं। पीडब्ल्यूडी द्वारा जहां नप द्वारा बिजली मीटर न लगवाने की बात कही जा रही है तो नगर परिषद अधिकारी पीडब्ल्यूडी की ओर से लाइटों की टेस्टिंग व चालू नहीं करवाने की बात कह रहे हैं। इस मामले में लापरवाही किसी की भी हो, मगर परेशानी जनता को हो रही है। दो वर्ष पहले सांखोल से लेकर जाखोदा बाईपास तक पीडब्ल्यूडी विभाग की ओर से सड़कों को रोशन करने के लिए 150-200 रोड लाइटें लगाई गई थी। मगर वे बिजली मीटर न लगने के कारण रोशन नहीं हो सकी। काफी लाइटों के शीशे भी टूट गए हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि सरकारी पैसे का किस तरह दुरुपयोग हो रहा है।
बढ़ेगा कोहरा, हो सकती है परेशानी
सांखोल से लेकर जाखोदा तक शाम होते ही यह मार्ग डार्क जोन में तब्दील हो जाता है। इससे हादसा होना खतरा भी लगातार बना रहता है। आने वाले दिनों में कोहरा भी अधिक होगा। ऐसे में समस्या और गंभीर हो जाएगी।
अधिकारियों को नहीं पता, कितनी लाइटें
ऐसा नहीं है कि इस मार्ग से कोई नेता, प्रशासनिक अधिकारी न गुजरता हो, लेकिन दो साल से किसी का कोई भी ध्यान नहीं गया। या फिर अधिकारी व नेता जानबूझकर आंखें मूंदे बैठे हैं। खास बात यह है अधिकारियों को तो यहां तक भी पता नहीं है कि यहां पर कितनी लाइटें व इन लाइटों पर कितनी राशि खर्च हुई थी।
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दो साल से नहीं लग पाया बिजली मीटर
पीडब्ल्यूडी विभाग के अधिकारियों का तर्क है कि उनके विभाग की ओर से लाइटें तो लगा दी गई थी। मगर लाइटों को रोशन करने के लिए बिजली मीटर नहीं लग पाया। अधिकारियों ने कहा कि शहर में रोड लाइटों व स्ट्रीट लाइटों को रोशन करने के लिए नगर परिषद की ओर से बिजली मीटर लगवाया जाता है। जोकि आज तक नहीं लग पाया है। इस मार्ग से प्रतिदिन एक लाख वाहन इधर-उधर आते-जाते हैं।
बोले- शहरवासी
सामाजिक कार्यकर्ता विजय भारती का कहना है कि दो वर्ष से सांखोल से जाखोदा बाईपास तक लगी लाइटें आखिरकार क्यों रोशन नहीं हो पाई। क्या कारण रहे। इस बारे में अधिकारियों को जवाब देना चाहिए।
शहरवासी सुधीर जैन का कहना है कि शाम होने के बाद यह मार्ग पूरी तरह अंधेरे में तब्दील हो जाता है। प्रशासनिक अधिकारियों व नेताओं को चाहिए कि लोगों को सहूलियत देने के हिसाब से लगाई गई लाइटें जल्द रोशन हो और इसका लाभ लोगों को मिले।
अधिकारियों से लेंगे जवाब : सिंहमार
पीडब्ल्यूडी विभाग के कार्यकारी अभियंता एसपी सिंहमार का कहना है कि दो वर्ष पहले लगी लाइटें तो उनके विभाग की ओर से लगा दी गई थी। मगर बिजली मीटर लगवाने की जिम्मेवारी नगर परिषद की है। आज तक बिजली मीटर क्यों नहीं लगा। इस बारे में वे अधिकारियों से जवाबदेही करेंगे। जल्द ही इन लाइटों को पूरी तरह दुरुस्त करवाया जाएगा।
पीडब्ल्यूडी ने नहीं कराई लाइटों की टेस्टिंग : शर्मा
नगर परिषद के एमई रमेश शर्मा का कहना है कि दो वर्ष पहले यह लाइटें पीडब्ल्यूडी (बीएंडआर) की एचएसआरडीसी विंग ने लगाई थी। मगर उन्होंने नगर परिषद को हैंड ओवर नहीं किया। यदि बीएंडआर के अधिकारी इन लाइटों को चालू करके नगर परिषद को दें तो उसके बाद यहां पर बिजली मीटर लगवाया जाएगा और लाइटें रोशन होंगी।
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बहादुरगढ़।
शहर के बीच से गुजरने वाले हाइवे पर सांखोल से जाखोदा तक डेढ़ करोड़ की लागत से लगाई गई लाइटें दो साल बाद भी चालू नहीं हो पाई हैं। इससे इस मार्ग से गुजरने वाले हजारों वाहन चालकों को परेशानी हो रही है। लाइटें न चालू होने पर नगर परिषद और पीडब्ल्यूडी विभाग अलग-अलग तर्क दे रहे हैं। पीडब्ल्यूडी द्वारा जहां नप द्वारा बिजली मीटर न लगवाने की बात कही जा रही है तो नगर परिषद अधिकारी पीडब्ल्यूडी की ओर से लाइटों की टेस्टिंग व चालू नहीं करवाने की बात कह रहे हैं। इस मामले में लापरवाही किसी की भी हो, मगर परेशानी जनता को हो रही है। दो वर्ष पहले सांखोल से लेकर जाखोदा बाईपास तक पीडब्ल्यूडी विभाग की ओर से सड़कों को रोशन करने के लिए 150-200 रोड लाइटें लगाई गई थी। मगर वे बिजली मीटर न लगने के कारण रोशन नहीं हो सकी। काफी लाइटों के शीशे भी टूट गए हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि सरकारी पैसे का किस तरह दुरुपयोग हो रहा है।
बढ़ेगा कोहरा, हो सकती है परेशानी
सांखोल से लेकर जाखोदा तक शाम होते ही यह मार्ग डार्क जोन में तब्दील हो जाता है। इससे हादसा होना खतरा भी लगातार बना रहता है। आने वाले दिनों में कोहरा भी अधिक होगा। ऐसे में समस्या और गंभीर हो जाएगी।
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अधिकारियों को नहीं पता, कितनी लाइटें
ऐसा नहीं है कि इस मार्ग से कोई नेता, प्रशासनिक अधिकारी न गुजरता हो, लेकिन दो साल से किसी का कोई भी ध्यान नहीं गया। या फिर अधिकारी व नेता जानबूझकर आंखें मूंदे बैठे हैं। खास बात यह है अधिकारियों को तो यहां तक भी पता नहीं है कि यहां पर कितनी लाइटें व इन लाइटों पर कितनी राशि खर्च हुई थी।
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दो साल से नहीं लग पाया बिजली मीटर
पीडब्ल्यूडी विभाग के अधिकारियों का तर्क है कि उनके विभाग की ओर से लाइटें तो लगा दी गई थी। मगर लाइटों को रोशन करने के लिए बिजली मीटर नहीं लग पाया। अधिकारियों ने कहा कि शहर में रोड लाइटों व स्ट्रीट लाइटों को रोशन करने के लिए नगर परिषद की ओर से बिजली मीटर लगवाया जाता है। जोकि आज तक नहीं लग पाया है। इस मार्ग से प्रतिदिन एक लाख वाहन इधर-उधर आते-जाते हैं।
बोले- शहरवासी
सामाजिक कार्यकर्ता विजय भारती का कहना है कि दो वर्ष से सांखोल से जाखोदा बाईपास तक लगी लाइटें आखिरकार क्यों रोशन नहीं हो पाई। क्या कारण रहे। इस बारे में अधिकारियों को जवाब देना चाहिए।
शहरवासी सुधीर जैन का कहना है कि शाम होने के बाद यह मार्ग पूरी तरह अंधेरे में तब्दील हो जाता है। प्रशासनिक अधिकारियों व नेताओं को चाहिए कि लोगों को सहूलियत देने के हिसाब से लगाई गई लाइटें जल्द रोशन हो और इसका लाभ लोगों को मिले।
अधिकारियों से लेंगे जवाब : सिंहमार
पीडब्ल्यूडी विभाग के कार्यकारी अभियंता एसपी सिंहमार का कहना है कि दो वर्ष पहले लगी लाइटें तो उनके विभाग की ओर से लगा दी गई थी। मगर बिजली मीटर लगवाने की जिम्मेवारी नगर परिषद की है। आज तक बिजली मीटर क्यों नहीं लगा। इस बारे में वे अधिकारियों से जवाबदेही करेंगे। जल्द ही इन लाइटों को पूरी तरह दुरुस्त करवाया जाएगा।
पीडब्ल्यूडी ने नहीं कराई लाइटों की टेस्टिंग : शर्मा
नगर परिषद के एमई रमेश शर्मा का कहना है कि दो वर्ष पहले यह लाइटें पीडब्ल्यूडी (बीएंडआर) की एचएसआरडीसी विंग ने लगाई थी। मगर उन्होंने नगर परिषद को हैंड ओवर नहीं किया। यदि बीएंडआर के अधिकारी इन लाइटों को चालू करके नगर परिषद को दें तो उसके बाद यहां पर बिजली मीटर लगवाया जाएगा और लाइटें रोशन होंगी।