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नशे की चपेट में आ रहे युवा, नशा मुक्ति केंद्र में हर महीने 70 प्रतिशत युवा ले रहे इलाज

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 01 Mar 2022 11:01 PM IST
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Youth getting in the grip of drugs, 70 percent youth are taking treatment every month in drug de-addiction center
हिसार। जिले में नशा लगातार अपने पैर पसारता जा रहा है। नागरिक अस्पताल में हर महीने करीब 300 लोग नशे की लत छोड़ने के लिए काउंसलिंग के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें से करीब 175 मरीजों की उम्र 25 से 35 वर्ष है। वहीं करीब 25 प्रतिशत महिलाएं शामिल हैं। नशे की आदी महिलाओं का मुख्य कारण लंबी बीमारी, घरेलू कलह और हाई सोसायटी है। स्वास्थ्य विभाग के चिकित्सकों द्वारा इन लोगों को नशा छोड़ने की तरकीब बताई जा रही है और मानसिक तौर पर मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है।
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ज्यादातर महिलाओं में नशे की लत किसी न किसी बीमारी के चलते लगती है। नशा मुक्ति केंद्र ओपीडी में आने वाली महिलाओं में ऐसी महिलाएं इलाज के लिए आ रही जो पहले किसी बीमारी जैसे दर्द के कारण अफीम का सेवन या पेट की समस्या के चलते हुक्के का सेवन करती थी। लेकिन धीरे-धीरे वह नशा उनकी आदत बन गया। जिस कारण से वह नशे की आदी हो चुकी हैं।
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शुरुआती लक्षण
व्यवहार में बदलाव आना
बार बार पैसों की डिमांड करना
ज्यादा समय घर से बाहर रहना
नींद न आना
खानपान में बदलाव आना
शारीरिक व मानसिक लक्षण
नशा न मिलने पर शरीर में कंपन होना
उल्टी आना
आंखों में पानी आते रहना
बहुत ज्यादा गुस्सा आना
चिड़चिड़ापन रहना
मानसिक रूप से परेशान रहना
बचाव
नशे के आदी व्यक्ति के साथ परिवार को संयमता बरतनी चाहिए
परिवार को आदी व्यक्ति की परेशानी समझनी चाहिए
नशे के आदी को प्यार से समझाना चाहिए
समय पर काउंसलर की सलाह ले
नशे के दुष्प्रभाव
फेफड़ों में इन्फेक्शन का खतरा
लीवर की समस्या होना
मानसिक बीमारियां होना
कैंसर का खतरा रहता है
चोरी की लत लग जाना
किसी ने गैस की समस्या तो किसी ने शौकिया लेना शुरू किया नशा
केस : 1
पेट में काफी दर्द रहता था, दवाइयों से आराम नहीं हुआ। किसी ने बताया कि गैस की समस्या है। हुक्का पीने से ठीक हो जाएगा। जिस कारण हुक्का पीना शुरू किया तो आदत बन गई। जिसको छोड़ने के लिए काफी समय से इलाज ले रही हूं। साथ-साथ काउंसिलिंग भी करवा रही हूं। - मॉडल टाउन निवासी महिला
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केस : 2
दोस्तों के साथ शौकिया तौर पर धूम्रपान शुरू किया। कब इसकी लत लग गई पता ही नहीं चला। अब इस लत को छोड़ने के लिए इलाज ले रही हूं। नशा एक बहुत ही बुरी लत है। एक बार यह लत लग जाने पर इसे छोड़ना मुश्किल हो जाता है। - सेक्टर-14 निवासी युवती
केस : 3
मार्केटिंग से जुड़ी नौकरी में काफी मानसिक दबाव रहता था। दोस्तों के साथ तनाव से बचने के लिए ड्रिंक लेना शुरू कर दिया। यह धीरे-धीरे लत पड़ गई, काफी नुकसान हो चुका है। अब परिवार ने मुझे काउंसिलिंग शुरू कराई है। नशा छोड़ना चाहती हूं। - सूर्य नगर निवासी युवती

किशोरों में भी नशे की लत देखने को मिल रही है। बच्चों की रोजाना की आदतों में अगर अभिभावकों को किसी भी तरह का कोई बदलाव नजर आए तो सतर्कता बरतें। नशे के आदी के साथ परिवार के सदस्यों को धैर्य से बात करनी चाहिए। परेशानी को समझने की कोशिश करनी चाहिए। परिवार और अभिभावकों से अपील है कि बच्चों के साथ व्यवहार अच्छा रखें। समय पर चिकित्सकों की सलाह ले। - डॉ. पूनम दहिया, मनोरोग विशेषज्ञ, नागरिक अस्पताल हिसार
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