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जेल में बैठकर करता रहा शहर की सफाई, निगम देता रहा वेतन

Wed, 20 Jan 2016 01:37 AM IST
अमर उजाला हिसार/ब्यूरो
अमर उजाला हिसार/ब्यूरो Updated Wed, 20 Jan 2016 01:37 AM IST
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worker was in Jail, in municipal corporation record working in city, given five month sallary

नगर निगम के सफाई कर्मचारी शहर में सफाई कर रहे हैं या नहीं इसका रखवाला कोई नहीं। निगम की लापरवाही तो ऐसी है कि पढ़ने और सुनने वाले भी हैरान हो जाएं।

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निगम का एक कर्मचारी तीन महीने जेल में बंद रहा मगर निगम के रिकॉर्ड में वह शहर में सफाई का काम कर रहा था।

इतना ही नहीं जेल में बैठे इस कर्मचारी को निगम वेतन भी देता रहा। करीब पांच महीने की गैर हाजिरी के बावजूद उसे कोई न नोटिस मिला और न ही वह सस्पेंड किया गया।
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क्या कर रही है प्री ऑडिट
नगर निगम में एक कर्मचारी बिना काम किए वेतन लेता रहा, यह आसानी से हजम होने वाली बात तो नहीं है। हाजिरी रजिस्टर में बिना उपस्थिति दर्ज उसका वेतन कैसे बन गया।
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वेतन जारी करने से पहले प्री ऑडिट ने ऑब्जेक्शन क्यों नहीं लगाई। इस मामले में सीएसआई, एसआई और दरोगा की भी लापरवाही साफ नजर आ रही है।

खुद ने आकर बताया साहब जेल में था तो खुुली अधिकारियों की आंखें
तीन महीने जेल में और कुल पांच महीने गैर हाजिर रहने के बाद कर्मचारी खुद निगम में ड्यूटी देने पहुंचा। उस वक्त अधिकारियों की आंखें खुली की यह कर्मचारी को कई महीने से दिखाई ही नहीं दिया।

जब अधिकारियों ने उससे पूछा कि आखिर कहां थे। इस पर कर्मचारी ने जवाब दिया साहब जेल में, एक बार तो लगा मजाक कर रहा है।

कर्मचारी ने कहा सर यह सच है मैं जेल में था। निगम को सूचना नहीं दे पाया। इसके बाद अधिकारी चौंक गए और कहा कि यह कैसे संभव है। फिर तो सस्पेंड होगे।

जब जांच खुली तो वेतन तक देता रहा निगम
नगर निगम सचिव ने जब सेनेटरी ब्रांच में उसका रिकॉर्ड चेक करवाया तो और चौंकाने वाला मामला सामने आया। कर्मचारी को तो निगम वेतन भी दे रहा था। फिर निगम में हड़कंप मच गया।


कर्मचारी से वेतन के रुपये वापस लेने पर सहमति, सचिव ने लगाई रोक
निगम का जो कर्मचारी इस स्थायी कर्मचारी को वेतन जारी करता रहा उसने इससे वेतन वापस जमा करवाने का दबाव बनाया। मामला सचिव तक पहुंच गया।

सचिव ने उस पर रोक लगवा दी और कहा कि यह कोई घर का मामला नहीं आप कैश पेमेंट वो भी दिया हुआ वेतन वापस कैसे जमा कर सकते हो। इसकी विभागीय जांच के बाद नियमों के आधार पर ही वेतन वापस होगा।

मामले की जांच की जा रही है। कर्मचारी पारिवारिक मामले में जेल में बंद था। आखिर उसका वेतन कैसे मिलता रहा इसका पता भी लगाया जा रहा है। जबकि नियम के हिसाब से तो वह उसी वक्त सस्पेंड किया जाना चाहिए था।
- वीरेंद्र सिंह, सचिव, नगर निगम हिसार

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