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Hisar News: ज्योति मल्होत्रा को जमानत दिलाने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर करेंगे
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हिसार। पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के आरोप में गिरफ्तार यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा की जमानत के लिए अब उनके वकील पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में याचिका दायर करेंगे। वकील की ओर से जमानत को लेकर याचिका तैयार की जा रही है। पिछले सप्ताह जिला अदालत ने ज्योति मल्होत्रा की याचिका खारिज कर देंगे।
यूट्यूब चैनल चलाने वाली ज्योति मल्होत्रा (33) को हिसार सिविल लाइन थाना पुलिस ने 16 मई को पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। ज्योति के खिलाफ पुलिस ने करीब 2500 पेज की चार्जशीट तैयार कर अदालत को सौंपी थी। जिसका कुछ हिस्सा संवेदनशील होने के चलते ज्योति को नहीं सौंपा गया। ज्योति मल्होत्रा की जमानत के लिए मई महीने में उनके वकील ने लोअर कोर्ट में याचिका दायर की थी। लोअर कोर्ट ने जमानत याचिका खारिज कर दी थी। जिसके बाद ज्योति के वकील कुमार मुकेश ने अक्तूबर माह में एडीजे की अदालत में याचिका दायर की। एडीजे की अदालत ने भी जमानत याचिका को खारिज कर दिया था। अदालत ने जमानत याचिका खारिज करने के मामले में लिखा कि रिकॉर्ड के अनुसार प्रथम दृष्टया काफी गंभीर मामला है। आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम और बीएनएस प्रावधानों के तहत आरोपी के इलेक्ट्रॉनिक उपकरण से फोरेंसिक सामग्री बरामद की गई है। एसएमएसी (मल्टी-एजेंसी सेंटर) खुफिया इनपुट और परिस्थितिजन्य विदेशी अधिकारियों के साथ संपर्कों का मैट्रिक्स और संवेदनशील क्षेत्रों में गतिविधियां क्षेत्र सामूहिक रूप से एक उचित आशंका पैदा करते हैं। जमानत देने पर जांच में बाधा उत्पन्न हो सकती है, डिजिटल डेटा से छेड़छाड़ की सुविधा हो सकती है।
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यूट्यूब चैनल चलाने वाली ज्योति मल्होत्रा (33) को हिसार सिविल लाइन थाना पुलिस ने 16 मई को पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। ज्योति के खिलाफ पुलिस ने करीब 2500 पेज की चार्जशीट तैयार कर अदालत को सौंपी थी। जिसका कुछ हिस्सा संवेदनशील होने के चलते ज्योति को नहीं सौंपा गया। ज्योति मल्होत्रा की जमानत के लिए मई महीने में उनके वकील ने लोअर कोर्ट में याचिका दायर की थी। लोअर कोर्ट ने जमानत याचिका खारिज कर दी थी। जिसके बाद ज्योति के वकील कुमार मुकेश ने अक्तूबर माह में एडीजे की अदालत में याचिका दायर की। एडीजे की अदालत ने भी जमानत याचिका को खारिज कर दिया था। अदालत ने जमानत याचिका खारिज करने के मामले में लिखा कि रिकॉर्ड के अनुसार प्रथम दृष्टया काफी गंभीर मामला है। आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम और बीएनएस प्रावधानों के तहत आरोपी के इलेक्ट्रॉनिक उपकरण से फोरेंसिक सामग्री बरामद की गई है। एसएमएसी (मल्टी-एजेंसी सेंटर) खुफिया इनपुट और परिस्थितिजन्य विदेशी अधिकारियों के साथ संपर्कों का मैट्रिक्स और संवेदनशील क्षेत्रों में गतिविधियां क्षेत्र सामूहिक रूप से एक उचित आशंका पैदा करते हैं। जमानत देने पर जांच में बाधा उत्पन्न हो सकती है, डिजिटल डेटा से छेड़छाड़ की सुविधा हो सकती है।
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