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Hisar News: डेयरी शिफ्टिंग का इंतजार...बदबू में घुटती जिंदगी, सिस्टम की नहीं टूटती नींद, ढाणी श्यामलाल, विनोद नगर, भारत नगर और टिब्बा दानाशेर में सीवर ओवरफ्लो से लोग परेशान
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नई सब्जी मंडी रोड पर फैला सीवर का पानी।
हिसार। नियमों की धज्जियां और सिस्टम की बेपरवाही शहर के कई इलाकों में लोगों की जिंदगी पर भारी पड़ रही है। ढाणी श्यामलाल, विनोद नगर, भारत नगर और टिब्बा दानाशेर में सीवर का गंदा पानी गलियों और सड़कों पर जमा है। बदबू से परेशान लोगों को घरों से निकलते समय मुंह पर कपड़ा ढकना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि रिहायशी इलाकों में चल रही 50 से ज्यादा डेयरियों से निकलने वाला गोबर और गंदा पानी सीवर में डाला जा रहा है। इससे सीवर जाम होने की समस्या बढ़ रही है। पशु डेयरियों से निकलने वाला गोबर, मवेशियों का कचरा और गंदा पानी सीधे सीवर लाइनों में बहाया जाता है। इससे सीवर ओवरफ्लो हो रहे हैं। गंदा पानी सड़कों और गलियों में फैलने से लोगों का निकलना मुश्किल हो गया है। जमा गंदगी से मच्छर पनपने और बीमारियां फैलने का खतरा भी बढ़ रहा है।
शिकायतों के बावजूद राहत नहीं
लोगों का कहना है कि वे नगर निगम, जिला प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के चक्कर काट चुके हैं। इसके बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ। सड़कों पर फैले गोबर से लोगों को डेंगू, मलेरिया, डायरिया और त्वचा संबंधी बीमारियों का डर सता रहा है। इसके बावजूद नगर निगम प्रशासन कोई कदम नहीं उठा रहा।
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टैक्स भरते हैं, सुविधाओं को तरस रहे
स्थानीय निवासी मनोहर लाल, जयप्रकाश, नरेश कुमार, गोपाल चंद और रामनिवास ने बताया कि शहर में टैक्स चुकाने के बावजूद बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल रहीं। सीवर का पानी मुख्य सड़क से गलियों तक भरा रहता है। इससे दुकानदारों का कारोबार प्रभावित हो रहा है। बच्चों का बाहर निकलना मुश्किल है और बुजुर्ग भी परेशान हैं। लोगों ने आरोप लगाया कि डेयरियों में काम करने वाले कर्मचारी पाइप के जरिये गोबर और अन्य गंदगी सीवर में डालते हैं। इससे आए दिन सीवर जाम हो जाते हैं।
नई सब्जी मंडी रोड पर भी बदहाली
नई सब्जी मंडी रोड पर हालात गंभीर हैं। मंडी के मुख्य गेट पर एक महीने से सीवर का पानी जमा है। आगे सड़क और आसपास की गलियों में भी गंदा पानी भरा हुआ है। घरों और दुकानों के सामने जलभराव से लोग परेशान हैं। क्षेत्रवासियों ने संबंधित विभागों से समस्या का स्थायी समाधान करने की मांग की है।
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दुकानदारों के फोटो हैं चारों के
डेयरियों से निकली गंदगी सीधे सीवर लाइन में जा रही है। एक महीने से तो मंडी के गेट पर गंदा पानी भरा हुआ है। हालत ऐसी है कि मुंह पर कपड़ा रखकर निकलना पड़ता है। सांस लेना भी मुश्किल है। - सतीश कुमार, दुकानदार।
गलियों व मेन रोड पर भरा सीवर का गंदा पानी नरक जैसे हालात बनाए हुए हैं। बेबस जनता कुछ नहीं कर पा रही है और अधिकारी व नेताओं के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही। - धर्मपाल, दुकानदार।
ढाणी श्यामलाल, विनोद नगर, भारत नगर, टिब्बा दानाशेर आदि एरिया में तो डेयरियों के कारण आए दिन सीवर जाम रहते हैं। इससे ओवरफ्लो होकर गंदा पानी सड़कों पर भर रहा है। हालात बदतर हैं। - सुभाष चंद्र, दुकानदार।
डेयरियों की गंदगी ही सीवर जाम का सबसे बड़ा कारण है। जब तक डेयरियां शहर से बाहर शिफ्ट नहीं होंगी, तब तक इसका स्थायी समाधान नहीं होगा। डेयरी शिफ्टिंग के प्रोजेक्ट को निगम प्रशासन जल्दी सिरे चढ़ाएं। - सुभाष सैनी, दुकानदार।
शहर में सीवर जाम का सबसे बड़ा कारण डेयरियों से निकलने वाली गंदगी ही है। अन्य लोग भी प्लास्टिक, पॉलिथीन सीवर लाइन में डाल देते हैं। इससे सीवर जाम की समस्या आती है। लोगों को खुद भी जागरूक होना होगा। - बलकार रेड्ढू, एक्सईएन, जनस्वास्थ्य विभाग।
डेयरियों को शहर से बाहर करने के प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है। डेयरियों का सर्वे भी किया जा चुका है। जल्द ही इस समस्या के समाधान की उम्मीद है। - डॉ. प्रदीप हुड्डा, अतिरिक्त निगम आयुक्त, नगर निगम।
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स्थानीय लोगों का आरोप है कि रिहायशी इलाकों में चल रही 50 से ज्यादा डेयरियों से निकलने वाला गोबर और गंदा पानी सीवर में डाला जा रहा है। इससे सीवर जाम होने की समस्या बढ़ रही है। पशु डेयरियों से निकलने वाला गोबर, मवेशियों का कचरा और गंदा पानी सीधे सीवर लाइनों में बहाया जाता है। इससे सीवर ओवरफ्लो हो रहे हैं। गंदा पानी सड़कों और गलियों में फैलने से लोगों का निकलना मुश्किल हो गया है। जमा गंदगी से मच्छर पनपने और बीमारियां फैलने का खतरा भी बढ़ रहा है।
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शिकायतों के बावजूद राहत नहीं
लोगों का कहना है कि वे नगर निगम, जिला प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के चक्कर काट चुके हैं। इसके बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ। सड़कों पर फैले गोबर से लोगों को डेंगू, मलेरिया, डायरिया और त्वचा संबंधी बीमारियों का डर सता रहा है। इसके बावजूद नगर निगम प्रशासन कोई कदम नहीं उठा रहा।
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टैक्स भरते हैं, सुविधाओं को तरस रहे
स्थानीय निवासी मनोहर लाल, जयप्रकाश, नरेश कुमार, गोपाल चंद और रामनिवास ने बताया कि शहर में टैक्स चुकाने के बावजूद बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल रहीं। सीवर का पानी मुख्य सड़क से गलियों तक भरा रहता है। इससे दुकानदारों का कारोबार प्रभावित हो रहा है। बच्चों का बाहर निकलना मुश्किल है और बुजुर्ग भी परेशान हैं। लोगों ने आरोप लगाया कि डेयरियों में काम करने वाले कर्मचारी पाइप के जरिये गोबर और अन्य गंदगी सीवर में डालते हैं। इससे आए दिन सीवर जाम हो जाते हैं।
नई सब्जी मंडी रोड पर भी बदहाली
नई सब्जी मंडी रोड पर हालात गंभीर हैं। मंडी के मुख्य गेट पर एक महीने से सीवर का पानी जमा है। आगे सड़क और आसपास की गलियों में भी गंदा पानी भरा हुआ है। घरों और दुकानों के सामने जलभराव से लोग परेशान हैं। क्षेत्रवासियों ने संबंधित विभागों से समस्या का स्थायी समाधान करने की मांग की है।
दुकानदारों के फोटो हैं चारों के
डेयरियों से निकली गंदगी सीधे सीवर लाइन में जा रही है। एक महीने से तो मंडी के गेट पर गंदा पानी भरा हुआ है। हालत ऐसी है कि मुंह पर कपड़ा रखकर निकलना पड़ता है। सांस लेना भी मुश्किल है। - सतीश कुमार, दुकानदार।
गलियों व मेन रोड पर भरा सीवर का गंदा पानी नरक जैसे हालात बनाए हुए हैं। बेबस जनता कुछ नहीं कर पा रही है और अधिकारी व नेताओं के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही। - धर्मपाल, दुकानदार।
ढाणी श्यामलाल, विनोद नगर, भारत नगर, टिब्बा दानाशेर आदि एरिया में तो डेयरियों के कारण आए दिन सीवर जाम रहते हैं। इससे ओवरफ्लो होकर गंदा पानी सड़कों पर भर रहा है। हालात बदतर हैं। - सुभाष चंद्र, दुकानदार।
डेयरियों की गंदगी ही सीवर जाम का सबसे बड़ा कारण है। जब तक डेयरियां शहर से बाहर शिफ्ट नहीं होंगी, तब तक इसका स्थायी समाधान नहीं होगा। डेयरी शिफ्टिंग के प्रोजेक्ट को निगम प्रशासन जल्दी सिरे चढ़ाएं। - सुभाष सैनी, दुकानदार।
शहर में सीवर जाम का सबसे बड़ा कारण डेयरियों से निकलने वाली गंदगी ही है। अन्य लोग भी प्लास्टिक, पॉलिथीन सीवर लाइन में डाल देते हैं। इससे सीवर जाम की समस्या आती है। लोगों को खुद भी जागरूक होना होगा। - बलकार रेड्ढू, एक्सईएन, जनस्वास्थ्य विभाग।
डेयरियों को शहर से बाहर करने के प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है। डेयरियों का सर्वे भी किया जा चुका है। जल्द ही इस समस्या के समाधान की उम्मीद है। - डॉ. प्रदीप हुड्डा, अतिरिक्त निगम आयुक्त, नगर निगम।