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Hisar News: अवैध काॅलोनियां नहीं हो सकीं वैध, मूलभूत सुविधाओं के लिए चुनाव का इंतजार
Tue, 24 Sep 2024 01:26 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
Updated Tue, 24 Sep 2024 01:26 AM IST
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हिसार की अवैध काॅलोनी के वैध होने के बाद इंटरलाॅकिंग सड़क बनाने कर्मचारी।
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हिसार। सरकारें समय-समय पर अवैध कॉलोनियों को वैध कर मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाने के सपने दिखाती हैं, लेकिन ये सपने धरातल पर उतरने में वर्ष लग जाते हैं। नेता चुनावों में वोट लेने के लिए सबसे पहले अवैध कॉलोनियों को नियमित करने का वादा करते हैं, पर वोट लेकर जाने के बाद फिर कोई इन इलाकों की तरफ नजर तक नहीं फेरता और लोग पानी-बिजली और सड़कों के बिना जूझते रहते हैं।
जब अवैध कॉलोनियां बसने लगती हैं, तब किसी को कोई आपत्ति नहीं होती। वोट के लिए सब आंखें मूंदे रहते हैं, लेकिन जीतने के बाद इन कॉलोनियों में रहने वालों को कोई शक्ल तक नहीं दिखाता। हिसार में भी 100 के करीब ऐसी कॉलोनियां हैं, जिनके वैध होने का इंतजार अब तक पूरा नहीं हो सका है। सरकार भी अवैध कॉलोनियों में बने मकानों पर बुलडोजर चलवाने में पीछे नहीं रहती। लोगों ने बताया कि चुनावी माहौल से पहले हर पार्टियां अवैध कॉलोनियां को वैध करने का प्रलोभन देती है। परंतु बजट में कोई प्रावधान नहीं किया जाता।
सरकार को चाहिए कि नई कॉलोनियां व सेक्टर का निर्माण करे। मूलभूत सुविधाएं दुरुस्त की जाएं। सेक्टरों व कॉलोनियों में जमीन के रेट कम हो तो आमजन यहां रहने के लिए सोच सकें। सरकार केवल अवैध कॉलोनियों को वैध करने की घोषणाएं करती है, धरातल पर सुविधाएं नहीं मिलतीं। - दलबीर किरमारा।
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जैसे ही चुनाव आते हैं, राजनेता अवैध कॉलोनियों को वैध कराने के सपने दिखाते हैं। सेक्टरों व नियमित कॉलोनियों में जमीन के दाम अधिक रहने के कारण लोग सस्ती जमीन के चक्कर में अवैध कॉलोनियों में मकान बनाकर रहने लगते हैं। वोट के लिए कोई अवैध नहीं पर जीत के बाद सरकारें अवैध कॉलोनियों में कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटतीं। - धर्मवीर पान्नू।
अवैध कॉलोनियों को वैध करने के लिए विशेष बजट जारी नहीं होगा तब तक घोषणाएं पूरी नहीं हो सकती। सरकार प्रति वर्ष फरवरी माह में बजट जारी करती है। इस बजट के कॉलम में अवैध कॉलोनियों को वैध करने के लिए कोई राशि अलॉट नहीं होती। जब चुनाव आते हैं तो सरकार केवल प्रावधान का नाम देकर अवैध कॉलोनियों को वैध करने का नारा देती है। लोगों को सुविधाएं मुहैया करवाई जाए। - देवेंद्र सिंहमार
सरकार को पहले अवैध कॉलोनियों को वैध करने के लिए प्रक्रिया तय करनी चाहिए, ताकि मूलभूत सुविधाएं दुरुस्त हो सके। दूसरे चरण में सस्ते दर में रेट फिक्स हो, ताकि आमजन की कॉलोनियों व सेक्टरों तक पहुंच हो सके। गरीब व्यक्ति जहां भी सस्ती जमीन खरीदकर मकान बनाता है तो सरकार उसे अवैध की श्रेणी में रखती है। - एडवोेकेट वीरेंद्र सिंह मलिक।
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जब अवैध कॉलोनियां बसने लगती हैं, तब किसी को कोई आपत्ति नहीं होती। वोट के लिए सब आंखें मूंदे रहते हैं, लेकिन जीतने के बाद इन कॉलोनियों में रहने वालों को कोई शक्ल तक नहीं दिखाता। हिसार में भी 100 के करीब ऐसी कॉलोनियां हैं, जिनके वैध होने का इंतजार अब तक पूरा नहीं हो सका है। सरकार भी अवैध कॉलोनियों में बने मकानों पर बुलडोजर चलवाने में पीछे नहीं रहती। लोगों ने बताया कि चुनावी माहौल से पहले हर पार्टियां अवैध कॉलोनियां को वैध करने का प्रलोभन देती है। परंतु बजट में कोई प्रावधान नहीं किया जाता।
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सरकार को चाहिए कि नई कॉलोनियां व सेक्टर का निर्माण करे। मूलभूत सुविधाएं दुरुस्त की जाएं। सेक्टरों व कॉलोनियों में जमीन के रेट कम हो तो आमजन यहां रहने के लिए सोच सकें। सरकार केवल अवैध कॉलोनियों को वैध करने की घोषणाएं करती है, धरातल पर सुविधाएं नहीं मिलतीं। - दलबीर किरमारा।
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जैसे ही चुनाव आते हैं, राजनेता अवैध कॉलोनियों को वैध कराने के सपने दिखाते हैं। सेक्टरों व नियमित कॉलोनियों में जमीन के दाम अधिक रहने के कारण लोग सस्ती जमीन के चक्कर में अवैध कॉलोनियों में मकान बनाकर रहने लगते हैं। वोट के लिए कोई अवैध नहीं पर जीत के बाद सरकारें अवैध कॉलोनियों में कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटतीं। - धर्मवीर पान्नू।
अवैध कॉलोनियों को वैध करने के लिए विशेष बजट जारी नहीं होगा तब तक घोषणाएं पूरी नहीं हो सकती। सरकार प्रति वर्ष फरवरी माह में बजट जारी करती है। इस बजट के कॉलम में अवैध कॉलोनियों को वैध करने के लिए कोई राशि अलॉट नहीं होती। जब चुनाव आते हैं तो सरकार केवल प्रावधान का नाम देकर अवैध कॉलोनियों को वैध करने का नारा देती है। लोगों को सुविधाएं मुहैया करवाई जाए। - देवेंद्र सिंहमार
सरकार को पहले अवैध कॉलोनियों को वैध करने के लिए प्रक्रिया तय करनी चाहिए, ताकि मूलभूत सुविधाएं दुरुस्त हो सके। दूसरे चरण में सस्ते दर में रेट फिक्स हो, ताकि आमजन की कॉलोनियों व सेक्टरों तक पहुंच हो सके। गरीब व्यक्ति जहां भी सस्ती जमीन खरीदकर मकान बनाता है तो सरकार उसे अवैध की श्रेणी में रखती है। - एडवोेकेट वीरेंद्र सिंह मलिक।